एक अच्छी शिक्षा देती ये कहानी जरूर पढ़िए – परिवर्तन

Moral Story परिवर्तन : सेठ करमचंद शहर के धनी लोगों में से एक था। पाँच साल पहले जब वह इस शहर में आया था तो उसके पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी। अपनी पत्नी सरलादेवी के गहने बेच कर उसने एक छोटी सी दुकान खोली थी। वह दिन रात मेहनत करता था। धीरे धीरे उसका धन्धा बढ़ने लगा। आज उसके पास चार बड़ी दुकानें हैं। दो फैक्ट्रियाँ और एक सुन्दर  बंगला है।

जैसे जैसे सेठ करम चंद धनी होता गया, उसका लोभ लालच और बढ़ता गया। गरीबों से उसे चिढ़ होने लगी। दान पुण्य को वह व्यर्थ समझने लगा। किन्तु सेठानी सरलादेवी नहीं बदली। वह दया की साक्षात मूर्ति थी और आड़े समय में सबकी हर सम्भव सहायता करती थी।

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उसके बंगले के सामने वाले फुटपाथ पर एक अंधा भिखारी बैठा करता था। सेठानी रोज उसे भोजन देती थी। वह भी उसे खूब दुआएँ देता था।
एक दिन चार पाँच लुटेरें सेठ जी के बंगले के सामने वाले फुटपाथ पर खड़े होकर उस बंगले में डाका डालने का षड्यंत्र बना रहे थे। अंधा भिखारी चुपचाप उनकी बातें सुनता रहा। वे इस बात से बिल्कुल बेखबर थे।

लुटेरों के चले जाने के बाद सेठानी अंधे भिखारी को खाना देने आई तो उसने उसे लुटेरों के षड्यन्त्र के बारे में बता दिया और सावधान रहे व पुलिस को सूचना देने की भी सलाह दी।
सेठ जी शहर से बाहर गए हुए थे। घर में रहने वाला नौकर श्यामू भी अपने भतीजे की शादी में गया हुआ था। बर्तन चैका करने वाली नौकरानी भी जा चुकी थी। घर का फोन खराब हो गया था। इसलिए वह मुनीम जी व पुलिस को भी सूचना नहीं दे सकती थी। उसके आसपास रहने वाले पड़ोसी भी धूर्त और ईष्र्या करने वाले थे। पुलिस स्टेशन पर वह कभी गई नहीं थी। वह घबरा गई कि अब वह क्या करे।

सेठानी फिर अंधे भिखारी के पास आई और उसे अपनी मजबूरी बताई। भिखारी ने साहस से काम लिया। सेठानी की मदद से उसने टैक्सी वाले को बुलाया और पुलिस स्टेशन पर जा पहुँचा।

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वहां उसने पुलिस इंस्पेक्टर को पूरी जानकारी दी। वह अंधे भिखारी की इस सूझबूझ से बड़ा प्रभावित हुआ। उसने लुटेरों को पकड़ने की योजना बनाई।
संध्या हुई तो सेठानी घबराने लगी। रात होते होते वह आतंकित हो उठी। बाहर सड़क के सामने वाले फुटपाथ पर रात के समय भी वह अंधा भिखारी बैठा रहा।

उसकेे साथ एक सिपाही भी भिखारी के वेश में लुटेरों की हरकतों पर नजर रखे हुए था।

लुटेरों ने अंधेरे का लाभ उठाते हुए बंगले के भीतर प्रवेश किया। पहले वे पीछे से छत पर पहुँचे। उसके बाद वे चतुराई से कमरे के भीतर घुसे। कमरे का दरवाजा खुला देखकर पहले तो उन्हें आश्चर्य हुआ, किन्तु बाद में वे खुश हुए कि कुछ काटने या तोड़ने के झंझट से उन्हें छुटकारा मिल गया।

वे जैसे ही तिजोरी वाले कमरे में घुसे तो उन्हें अपनी मंजिल पर पहुँचने की प्रसन्नता हुई। उन्होंने जैसे ही अपनी टार्च जलाकर तिजोरी को अपने औजारों से खोलना चाहा तो अचानक ही कमरे की ट्यूब लाईट जल उठी। लुटेरों की सिट्टी पिट्टी गुल हो गई।

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सावधान! अगर किसी ने भी हिलने की कोशिश की तो गोलियों से सीना छलनी कर दूँगा। पुलिस इंस्पेक्टर ने गरज कर कहा।

खुद को सिपाहियों से घिरा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पलक झपकते ही उनकी कलाईयों में हथकड़ियाँ डाल दी गई।

उन्होंने इससे पहले ढेरों डाके डाले, किन्तु उनका ऐसा बुरा हाल कभी नहीं हुआ। वे मानों अजगर की मजबूत जकड़ में फँस गए थे। उन्हें चूँ करने का भी मौका नहीं मिला।

वे अपने साथ अन्य जगह का लूट का माल भी लाए थे। वह भी हाथ से जाता देख कर उनका मन रोने को करने लगा। आज पुलिस इंस्पेक्टर उन्हें यमराज के समान दिखाई दे रहा था।
उस समय एक सिपाही अंधे भिखारी को अंदर ले आया तो इंस्पेक्टर ने लुटेरों से कहा। तुम्हारा असली यमराज तो यह साहसी व्यक्ति है। तुम्हें पकड़वाने का यश इसी को जाता है। नेत्रहीन होते हुए भी इसने एक अच्छे नागरिक का कत्र्तव्य निभाया है। काश तुम भी बुराई का रास्ता छोड़ कर एक अच्छे इंसान बनने को कोशिश करते तो आज हमारा समाज बहुत आगे होता और देश तेजी के साथ विकास की ओर बढ़ता।

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यह बातें सुनकर लुटेरों के मस्तक शर्म और अपराध भावना से नीचे झुक गए। तत्पश्चात उन लुटेरों को उनके अपराध की कड़ी सजा मिली। साथ साथ उनके गिरोह के अन्य साथी भी गिरफ्तार कर लिए गए।

अंधा भिखारी आज बहुत खुश था कि अपंग होते हुए भी उसने जीवन में कोई तो अच्छा काम कर दिखलाया। जिससे उसका मान बढ़ा और सम्मान हुआ।
इस घटना से सेठ जी के मन में भी बड़ा परिवर्तन आ गया। उन्होंने न सिर्फ उस अंधे भिखारी को एक छोटा सा मकान भेंट स्वरूप दिया। बल्कि अन्य विकलांग लोगों के लिए एक आश्रम भी खुलवाया, जहाँ रह कर वे मन पसंद काम काज करके, अपनी मेहनत की कमाई से स्वाभिमान के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सके।

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