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बच्चों की प्रेरणादायक कहानी: अपनी रोशनी खुद ढूंढना

एक छोटे से गाँव के लड़के 'अमन' की कहानी जो अंधेरे में भी हार नहीं मानता और अपनी मेहनत से अपनी किस्मत को खुद रोशन करता है। यह Motivational Story बच्चों को सिखाएगी कि कैसे हर चुनौती में अपनी 'भीतरी रोशनी' को जगाया जाए।

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जब अंधेरा छा जाए, तो रोशनी कहाँ से आए?

प्यारे बच्चों, क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि आप किसी मुश्किल में फंस गए हैं और आपको कोई रास्ता नहीं दिख रहा? जैसे एक घने जंगल में खो जाने पर चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा हो। ऐसे में हम अक्सर दूसरों की मदद या रोशनी का इंतज़ार करते हैं। लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि असली रोशनी आपके अंदर ही छिपी है?

आज हम एक बहुत ही खूबसूरत और प्रेरणादायक कहानी पढ़ेंगे, जिसका नाम है "अपनी रोशनी खुद ढूंढना"। यह कहानी हमें सिखाएगी कि कैसे एक छोटा सा लड़का, 'अमन', अपनी हिम्मत और लगन से अपनी हर मुश्किल को पार करता है और अपनी किस्मत को खुद रोशन करता है। यह कहानी हमें याद दिलाएगी कि हार न मानना और अपनी 'भीतरी रोशनी' पर विश्वास करना ही सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है।


छोटा अमन, बड़ा सपना और गाँव का अंधेरा

एक छोटे से गाँव में, जिसका नाम 'नवरंगपुर' था, वहाँ अमन नाम का एक बहुत ही उत्साही और मेहनती लड़का रहता था। नवरंगपुर गाँव बहुत सुंदर था, लेकिन वहाँ बिजली की सुविधा नहीं थी। शाम होते ही पूरा गाँव अंधेरे में डूब जाता था। बच्चे लालटेन या दिए की रोशनी में पढ़ाई करते थे।

अमन को पढ़ने का बहुत शौक था। वह हर रात अपनी माँ के दिए की टिमटिमाती रोशनी में घंटों पढ़ाई करता। उसके पास किताबें तो थीं, लेकिन अक्सर बिजली न होने के कारण उसे बहुत परेशानी होती थी। उसके दोस्त अक्सर कहते थे, "अमन, इतनी मुश्किल में पढ़ने का क्या फायदा? जब शहर में बिजली ही नहीं है।"

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लेकिन अमन हार मानने वालों में से नहीं था। वह हमेशा कहता था, "बिजली न हो तो क्या हुआ? मैं अपनी रोशनी खुद ढूंढूंगा।"

अमन का एक सपना था: वह बड़ा होकर अपने गाँव के लिए कुछ करना चाहता था, ताकि किसी को भी अंधेरे में न रहना पड़े। वह एक इंजीनियर बनकर अपने गाँव में बिजली लाना चाहता था।

शहर का सफर और संघर्ष की शुरुआत

अपने सपने को पूरा करने के लिए, अमन ने दसवीं कक्षा पास करने के बाद शहर जाने का फैसला किया। उसके माता-पिता गरीब थे, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को आशीर्वाद दिया और थोड़ी-बहुत जमापूंजी देकर उसे विदा किया।

शहर पहुँचकर अमन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उसके पास रहने के लिए अच्छी जगह नहीं थी और खाने के लिए भी मुश्किल से कुछ मिलता था। उसे एक छोटे से कमरे में रहना पड़ता था, जहाँ बिजली आती-जाती रहती थी। कई बार तो रात में बिल्कुल बिजली नहीं होती थी।

अमन ने सोचा, 'यहाँ भी वही अंधेरा, जो मेरे गाँव में था।' लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वह दिन में मजदूरी करता ताकि अपनी पढ़ाई का खर्च और खाना जुटा सके। रात में, जब बिजली नहीं होती थी, तो वह सड़क किनारे लगे खंभों की हल्की रोशनी में या कभी-कभी स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई करता।

"अमन, तुम इतनी मुश्किल में कैसे पढ़ते हो?" उसके साथी छात्र पूछते।

अमन मुस्कुराता, "मैं अपनी रोशनी खुद ढूंढता हूँ।"


अंधेरे में चमकती लगन

अमन को गणित और विज्ञान बहुत पसंद था। खासकर भौतिकी (Physics) में उसे गहरी रुचि थी। उसे बिजली और ऊर्जा के सिद्धांतों को समझना बहुत अच्छा लगता था। वह घंटों तक तारों और बल्बों के बारे में किताबें पढ़ता रहता।

एक बार उसके कॉलेज के प्रोफेसर ने एक मुश्किल प्रोजेक्ट दिया: 'कम लागत में बिजली बनाने का कोई तरीका ढूंढो।' सभी छात्र परेशान थे, क्योंकि इसके लिए बहुत रिसर्च और महंगे सामान की ज़रूरत थी।

अमन के पास पैसे नहीं थे, लेकिन उसके पास एक चीज़ थी: लगन और अपनी 'भीतरी रोशनी'। उसने कबाड़ की दुकानों से पुराने पुर्जे इकट्ठा किए, टूटी-फूटी बैटरियाँ जोड़ीं और अपनी मेहनत से एक छोटा सा जनरेटर बनाने की कोशिश की। कई बार वह फेल हुआ, चीजें टूटीं, लेकिन उसने हार नहीं मानी। वह रात-रात भर जागकर काम करता, जब शहर की सारी बत्तियाँ बुझ जातीं, तब भी वह अपनी छोटी सी लालटेन की रोशनी में अपने काम में लगा रहता।

उसके दोस्त उसे पागल समझते थे। "छोड़ो अमन, यह तुमसे नहीं होगा। तुम्हारे पास साधन नहीं हैं।"

लेकिन अमन जानता था कि उसके अंदर एक ऐसी रोशनी है जो कभी नहीं बुझ सकती।


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सफलता की किरण और गाँव की रोशनी

अमन ने अपने प्रोफेसर को वह छोटा सा जनरेटर दिखाया, जिसे उसने कबाड़ से बनाया था। वह जनरेटर कम मात्रा में ही सही, लेकिन बिजली पैदा कर रहा था। प्रोफेसर अमन की मेहनत और दिमाग से बहुत प्रभावित हुए।

"अमन, यह अद्भुत है! तुम्हारे पास साधन नहीं थे, फिर भी तुमने इतनी मुश्किल चीज़ बनाई," प्रोफेसर ने कहा।

अमन ने कड़ी मेहनत और लगन से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उसने अपनी पढ़ाई के दौरान ऐसे कई नए तरीके सीखे जिनसे कम खर्च में बिजली पैदा की जा सके।

पढ़ाई पूरी होने के बाद, अमन को बड़ी-बड़ी कंपनियों से नौकरी के ऑफर आए, लेकिन उसे अपना गाँव याद था। उसने अपने गाँव नवरंगपुर लौटकर वहाँ बिजली लाने का फैसला किया। उसने अपनी सीख और ज्ञान का उपयोग करके गाँव में छोटे-छोटे सोलर पैनल और विंड टर्बाइन लगाए। गाँव के लोग, जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनके गाँव में बिजली आएगी, अब रोशन घरों में रहने लगे थे।

अमन ने अपने गाँव को न केवल बिजली दी, बल्कि उसने सभी को यह भी सिखाया कि कैसे अपनी मेहनत और लगन से अपनी रोशनी खुद ढूंढना संभव है। गाँव के बच्चे अब अंधेरे में नहीं, बल्कि अपने रोशन घरों में पढ़ाई करते थे और अमन से प्रेरणा लेते थे।


सीख (Moral of the Story)

यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। जब हमें कोई रास्ता न दिखे या चारों तरफ अंधेरा छा जाए, तो हमें अपनी भीतरी शक्ति और लगन पर विश्वास करना चाहिए। अपनी मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच के साथ, हम हर चुनौती को पार कर सकते हैं और अपनी रोशनी खुद ढूंढकर न केवल अपनी जिंदगी, बल्कि दूसरों की जिंदगी को भी रोशन कर सकते हैं। याद रखो, असली रोशनी हमेशा हमारे अंदर ही छिपी होती है!

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टैग्स (Tags): बच्चों की प्रेरणादायक कहानी, अपनी रोशनी खुद ढूंढना, Motivational Story for Kids, सफलता का मंत्र, मेहनत का फल, कभी हार न मानना, हिंदी में प्रेरणादायक कहानी।

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