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राजा बलराम और तीन बेटों की अनोखी परीक्षा: राजा बलराम अपने तीन बेटों में से सबसे योग्य उत्तराधिकारी चुनना चाहते हैं। वे एक सवाल पूछते हैं – अपराधी को क्या सजा दो? सबसे छोटा बेटा कहता है, “पहले सच जान लो, फिर सजा दो।” और एक पुरानी कहानी सुना कर सबको चुप कर देता है।
चलो, अब पढ़ते हैं ये दिलचस्प और बहुत गहरी सीख देने वाली कहानी...
किसी पुराने राज्य में राजा बलराम राज करते थे। उनके तीन बेटे थे – बड़ा विक्रम, बीच का विराट और सबसे छोटा विवान। तीनों होशियार, तीनों बहादुर, पर राजा सोचते रहते थे, “मेरा सिंहासन किसे सौंपूँ जो सचमुच न्याय कर सके?”
एक दिन दरबार में राजा ने तीनों को बुलाया। राजा – “बेटो, एक सवाल है। अगर कोई अपराधी तुम्हारे सामने खड़ा हो, तुम क्या करोगे?”
विक्रम (बड़ा बेटा) तपाक से बोला, “पिताजी, उसे फाँसी पर चढ़ा दूँगा। अपराधी को जीने का हक नहीं!” विराट (बीच का) बोला, “नहीं पिताजी, पहले जेल में डालूँगा। सजा तो बनती है।”
विवान (सबसे छोटा) शांत स्वर में बोला, “पिताजी, मैं पहले सच जानूँगा कि उसने अपराध किया भी है या नहीं। बिना जाँच-पड़ताल के सजा देना तो अन्याय होगा।”
दरबार में सन्नाटा छा गया। राजा मुस्कुराए और बोले, “विवान, अपनी बात साबित करो।”
विवान ने एक पुरानी कहानी सुनानी शुरू की –
“पहले के जमाने में एक राजा थे। उनके पास एक बहुत समझदार तोता था, नाम था मिठ्ठू। एक दिन मिठ्ठू बोला, “महाराज, मुझे मम्मी-पापा से मिलने जाना है।” राजा बोले, “जा बेटा, पर पाँच दिन में लौट आना।”
मिठ्ठू पाँच दिन मम्मी-पापा के पास रहा। लौटते वक्त सोचा, “महाराज को कुछ तोहफा दूँ।” उसने सुना था कि हिमालय पर अमृत फल लगता है – खाओ तो कभी नहीं मरोगे। वो उड़कर पहाड़ पर पहुँचा, रात हो गई। फल तोड़ लिया, पर सो गया।
रात में एक जहरीला साँप आया और फल चखने लगा। फल में उसका जहर लग गया। सुबह मिठ्ठू ने फल उठाया और खुशी-खुशी राजा के पास पहुँचा। “महाराज! ये अमृत फल है, खाइए, अमर हो जाइए!”
राजा खुश, फल उठाने ही वाले थे कि चालाक मंत्री बोला, “रुकिए महाराज, पहले जाँच कर लें।” राजा ने हुक्म दिया, “कुत्ते को खिलाओ।” कुत्ते ने एक टुकड़ा खाया और तड़प-तड़प कर मर गया।
राजा को गुस्सा आ गया। “धोखेबाज तोता!” तलवार निकाली और मिठ्ठू का सिर धड़ से अलग कर दिया। फल फिंकवा दिए।
कई साल बाद उसी जगह एक पेड़ उगा। राजा ने सोचा, “ये जहरीले फल वाला पेड़ होगा, किसी को छूने न दो।”
एक दिन एक बूढ़ा यात्री पेड़ तले बैठा। भूख से बेहाल। उसने फल तोड़ा और खा लिया। खाते ही बूढ़ा जवान हो गया!
राजा को पता चला तो पैरों तले जमीन खिसक गई। “अरे, वो फल तो अमृत था! साँप का जहर लगा था, मिठ्ठू बेकसूर था!” राजा रोने लगे, “मैंने बिना सच जाने अपने सबसे वफादार दोस्त को मार डाला!”
विवान की कहानी खत्म हुई। दरबार में सन्नाटा था।
राजा ने उठकर विवान को गले लगा लिया। “बेटा, तू ही मेरा उत्तराधिकारी बनेगा। न्याय वही करता है जो पहले सच जानता है।”
विवान के राजा बनने के बाद राज्य में नया नियम बना – कोई सजा देने से पहले पूरी जाँच। लोग कहते, “हमारे राजा विवान तो मिठ्ठू तोते की याद में न्याय करते हैं।” बूढ़े मंत्री अक्सर बच्चों को यही कहानी सुनाते, “बेटा, जल्दबाजी में कभी फैसला मत करना, वरना पछतावा रह जाता है।”
सीख:
दोस्तों, गुस्से में, जल्दबाजी में कभी सजा मत दो। पहले पूरा सच जान लो। बेकसूर को सजा देना सबसे बड़ा पाप है। न्याय की असली ताकत धैर्य और सच्चाई में होती है।
