वो मंदिर जहां पत्थरों से निकलते हैं डमरू की आवाज

भारत के रमणीय पर्यटन क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश की खूब चर्चा है जंहा बहुत से रहस्मय और अद्भुत दर्शनीय स्थल है। देश विदेश के दूर दराज़ से लोग इन्हें देखने आते हैं। इन्हीं में से एक है सोलन का यह अद्भुत, अकल्पनीय अनूठा शिव मंदिर, जिसका नाम है जटोली शिव मंदिर। इसे एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर माना जाता है।

इसकी ऊंचाई पहले लगभग एक सौ ग्यारह फुट थी लेकिन कुछ समय पहले ही इस मंदिर में ग्यारह फुट ऊँचा, स्वर्ण कलश चढ़ाया गया था। जिससे अब इसकी ऊँचाई 122 फुट तक पंहुच गई है। इसका निर्माण दक्षिण द्रविड़ पद्धति से हुआ जान पड़ता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू धर्म के भगवान भोले बाबा शिव शंकर यहीं आकर कुछ समय के लिए ठहरे थे, तभी से इस स्थल को हिन्दुओं द्वारा बहुत पवित्र स्थल माना जाता रहा है।

सन 1950 के दशक में यहां श्री श्री 1008 स्वामी कृष्णानंद परमहंस आएँ थे। उन्होंने अपनी देखरेख और मार्गदर्शन के अनुसार इस जटोली शिव मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया और 1973/74 में इसका शिलान्यास किया था । लेकिन मंदिर पूरा होने से पहले ही स्वामी कृष्णानंद ने समाधि ले ली। तब वहां के प्रबंधन कमेटी ने निर्माण कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी उठा ली। मंदिर की भव्यता और बारीक कलाकृति इस बात की पुष्टि करता है कि इसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ भारतीय कारीगरों ने 39 वर्षो की अथक परिश्रम से निर्मित किया था। कहते है कि किसी जमाने में जटोली में पानी की बड़ी कमी थी। यहां के वासी पानी की एक एक बूंद के लिए तरसते थे।

जब ग्रामवासियों ने बाबा स्वामी कृष्णानंद से कोई उपाय करने की गुहार लगाई तो स्वामी जी ने शंकर भगवान की घोर तपस्या की और एक दिन त्रिशूल के प्रहार से धरती फोड़ कर जल धारा निकाला।

कहा जाता है कि उस दिन के बाद वहां कभी पानी की समस्या नहीं हुई और साथ ही यह भी मान्यता है कि इस जल को पीने से हर तरह के शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं। इस जटोली शिव मंदिर में बहुत सारे देवी देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित है तथा एक स्फटिक मणि शिवलिंग भी है जिसकी कीमत सत्रह लाख रुपये है।

इसे गुजरात से लाया गया है और कहा जाता है कि इस स्फटिक शिवलिंग पर सूर्य किरण पड़ने पर इसमें से सकारात्मक ऊर्जा निकलती है। इस मंदिर की एक रहस्यमयी बात यह है कि यहां लगे पत्थरों को थपथपाने से डमरू बजने जैसी आवाज़ आती है। इस मंदिर की विशेष बात यह है कि इस मंदिर का निर्माण भक्तों द्वारा दिए गए दान से ही हुआ है और अब तक इस मंदिर निर्माण में करोडों रुपये खर्च हो चुके हैं।