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छुपे चोर का पर्दाफाश: नन्हे जासूसों का कमाल

पढ़ें 'छुपे चोर का पर्दाफाश' की मजेदार जासूसी कहानी। जानें कैसे नन्हे जासूसों ने बंद कमरे से गायब होती मिठाइयों का रहस्य सुलझाया। बच्चों के लिए रोमांचक हिंदी कहानी।

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सुंदरनगर की मशहूर मिठाई की दुकान

प्यारे बच्चों! क्या आपको जासूसी कहानियाँ पसंद हैं? जहाँ एक रहस्य होता है और उसे सुलझाने के लिए दिमाग के घोड़े दौड़ाने पड़ते हैं। आज लॉटपॉट.कॉम (Lotpot.com) पर हम आपके लिए एक ऐसी ही कहानी लेकर आए हैं—छुपे चोर का पर्दाफाश

सुंदरनगर नाम का एक प्यारा सा शहर था। वहाँ लाला गेंदालाल की मिठाई की दुकान बहुत मशहूर थी। लाला जी की जलेबियाँ और मोतीचूर के लड्डू जो भी खाता, वह उंगलियां चाटता रह जाता। लेकिन पिछले कुछ दिनों से लाला गेंदालाल बहुत परेशान थे। उनकी परेशानी का कारण था—मिठाइयों का गायब होना।

हर रात लाला जी दुकान बंद करके जाते, ताले लगाते, लेकिन सुबह जब दुकान खोलते तो थाल में से लड्डू गायब मिलते!

रहस्यमयी चोरी: ताला बंद और मिठाई गायब

लाला गेंदालाल ने पुलिस को खबर दी। पुलिस आई, जांच-पड़ताल की, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। दुकान के ताले टूटे नहीं थे, खिड़कियां बंद थीं और कहीं से भी किसी के अंदर घुसने का रास्ता नहीं था।

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गाँव में अफवाह फैल गई कि लाला जी की दुकान में कोई "मिठाई खाने वाला भूत" आ गया है। लोग डरने लगे। लाला जी का धंधा मंदा होने लगा।

इसी शहर में दो बहुत ही समझदार बच्चे रहते थे—आर्यन और श्रेया। वे दोनों पक्के दोस्त थे और खुद को 'नन्हे जासूस' कहते थे। जब उन्होंने इस रहस्यमयी चोरी के बारे में सुना, तो उन्होंने ठान लिया कि वे इस छुपे चोर का पर्दाफाश करके ही रहेंगे।

नन्हे जासूसों की एंट्री

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एक शाम, आर्यन और श्रेया लाला जी की दुकान पर पहुँचे।

आर्यन ने अपनी छोटी सी नोटबुक निकाली और लाला जी से पूछा, "लाला जी, क्या आपको किसी पर शक है?" लाला जी ने अपना बड़ा सा पेट सहलाते हुए कहा, "बेटा, मुझे तो अब खुद पर ही शक होने लगा है कि कहीं मैं सपने में लड्डू तो नहीं खा जाता? लेकिन नहीं, यह नामुमकिन है!"

श्रेया ने दुकान का बारीकी से मुआयना (Inspection) किया। उसने देखा कि दुकान में हवा आने के लिए छत के पास एक छोटा सा रोशनदान (Ventilator) है, लेकिन वह इतना ऊँचा और छोटा था कि कोई इंसान वहाँ से नहीं आ सकता था।

तभी श्रेया की नज़र ज़मीन पर पड़ी। वहाँ चीनी के बहुत ही हल्के, लगभग न दिखने वाले दाने बिखरे हुए थे। वे दाने दुकान के काउंटर से लेकर पीछे के गोदाम की तरफ जा रहे थे।

श्रेया ने आर्यन को इशारा किया। आर्यन समझ गया—सुराग मिल गया है!

रात का पहरा: जासूसी का प्लान

दोनों ने लाला जी से कहा, "लाला जी, आज रात हम आपकी दुकान में छुपकर पहरा देंगे। हमें लगता है कि चोर कोई इंसान नहीं, बल्कि कोई और है।"

लाला जी पहले तो नहीं माने, लेकिन बच्चों की जिद देखकर उन्होंने अनुमति दे दी। रात हुई। लाला जी ने दुकान के ताले लगा दिए और अपने घर (जो दुकान के ठीक ऊपर वाली मंजिल पर था) चले गए। आर्यन और श्रेया दुकान के अंदर, खाली बोरियों के पीछे छुप गए।

घड़ी में रात के 12 बजे। चारों तरफ सन्नाटा था। सिर्फ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी। आर्यन को नींद आने लगी थी, लेकिन श्रेया ने उसे कोहनी मारकर जगाए रखा।

चोर की आमद: एक अजीब परछाई

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अचानक, छत के पास वाले रोशनदान से खटर-पटर की आवाज़ आई। दोनों जासूस चौकन्ने हो गए। उन्होंने अंधेरे में देखा कि एक लंबी सी परछाई धीरे-धीरे नीचे उतर रही है।

क्या वह भूत था? या कोई चोर?

जैसे ही वह परछाई नीचे आई, आर्यन ने अपनी टॉर्च जलाई। क्लिक!

रोशनी पड़ते ही जो नज़ारा दिखा, उसे देखकर आर्यन और श्रेया अपनी हँसी नहीं रोक पाए।

वहाँ कोई भूत नहीं था, और न ही कोई इंसान। वह एक बंदर था! लेकिन यह कोई आम बंदर नहीं था। यह बंदर एक रस्सी के सहारे रोशनदान से नीचे उतरा था और उसने अपनी कमर पर एक छोटी सी थैली बांध रखी थी।

छुपे चोर का सच

वह बंदर बहुत ही मजे से काउंटर पर चढ़ा, उसने काजू कतली का डिब्बा खोला और एक बर्फी खाकर बड़े चाव से 'हम्म...' जैसी आवाज़ निकाली। फिर उसने कुछ लड्डू अपनी थैली में भरे और वापस रस्सी के सहारे ऊपर चढ़ने लगा।

श्रेया चिल्लाई, "पकड़ो इसे!" लेकिन बंदर बहुत फुर्तीला था। वह पलक झपकते ही रोशनदान से बाहर निकल गया।

अगली सुबह, आर्यन और श्रेया ने लाला गेंदालाल और पुलिस को सारी बात बताई। उन्होंने दुकान की छत पर जाकर देखा, तो वहाँ रस्सी का एक सिरा बंधा हुआ मिला। दरअसल, यह बंदर पास ही रहने वाले एक मदारी का था, जिसे चोरी करना सिखाया गया था। मदारी रात को उसे छोड़ देता था और बंदर मिठाइयाँ चुराकर लाता था।

जासूसों की जीत

पुलिस ने मदारी को पकड़ लिया। लाला गेंदालाल बहुत खुश हुए। उन्होंने आर्यन और श्रेया को इनाम में ढेर सारे लड्डू और 'सुंदरनगर के बेस्ट जासूस' का खिताब दिया।

लाला जी हँसते हुए बोले, "अरे भाई! मुझे तो लगा था कि भूत है, पर यह तो 'लड्डू चोर बंदर' निकला!"

उस दिन के बाद से सुंदरनगर में कोई चोरी नहीं हुई और बच्चों की जासूसी के चर्चे दूर-दूर तक फैल गए।

निष्कर्ष: कहानी की सीख

इस मजेदार जासूसी कहानी से हमें क्या सीखने को मिलता है?

  1. अंधविश्वास से बचें: हर अनसुलझी बात भूत-प्रेत नहीं होती। उसके पीछे कोई न कोई तर्क (Logic) जरूर होता है।

  2. सूझबूझ: आर्यन और श्रेया ने डरने के बजाय अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया और समस्या को सुलझाया।

  3. बारीकी से देखना: छोटी-छोटी चीजें (जैसे चीनी के दाने) बड़े रहस्य खोल सकती हैं।

विकिपीडिया लिंक (Wikipedia Link)

जासूसी कथाओं और पात्रों के बारे में और जानने के लिए यहाँ क्लिक करें:

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लेखक: लॉटपॉट.कॉम संपादकीय टीम

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