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हेलो बच्चों! क्या आपको कभी किसी चीज़ से डर लगा है? जैसे अंधेरे से, कॉकरोच से, या फिर स्कूल के होमवर्क से? डरना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन डरकर भागना मज़ेदार नहीं होता। आज की हमारी कहानी 'हंसीपुर' गाँव के एक ऐसे लड़के की है जो अपनी परछाई से भी डरता था। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि उसने Dar Ke Aage Jeet Hai का मंत्र सीख लिया। यह कहानी आपको हंसाएगी भी और एक जादुई राज़ भी बताएगी।
हंसीपुर का डरपोक हीरो: बंटी
उत्तर भारत के एक छोटे और खुशहाल गाँव 'हंसीपुर' में बंटी नाम का एक गोल-मटोल लड़का रहता था। बंटी दिल का बहुत अच्छा था, लेकिन उसमें एक छोटी सी गड़बड़ थी—वह बहुत डरपोक था।
अगर बंटी को रास्ते में एक मेंढक दिख जाता, तो वह ऐसे चिल्लाता जैसे डायनासोर देख लिया हो। "बचाओ! यह मेंढक मुझे खा जाएगा!" बंटी चीखता और पेड़ पर चढ़ जाता।
उसकी माँ, सुमन, उसे समझा-समझा कर थक गई थीं। "अरे बंटी, मेंढक शाकाहारी नहीं होते, लेकिन वो इंसानों को भी नहीं खाते," माँ हंसते हुए कहतीं।
बंटी को बागवानी (Gardening) का बहुत शौक था। उसे लगता था कि पेड़-पौधे ही उसके असली दोस्त हैं क्योंकि वे न तो काटते हैं और न ही भौंकते हैं। लेकिन बंटी को क्या पता था कि उसका यह भ्रम जल्द ही टूटने वाला है।
बगीचे में 'करंट' वाला हमला
एक सुहावनी सुबह, बंटी अपने घर के पीछे वाले बगीचे में तितलियों के पीछे भाग रहा था। तभी उसकी नज़र एक अजीब से पौधे पर पड़ी। उस पौधे की पत्तियां हरे रंग की थीं और उन पर छोटे-छोटे रोएं (Hairs) थे। वह दिखने में बहुत ही मखमली और मुलायम लग रहा था।
बंटी ने सोचा, "वाह! यह तो टेडी बियर जैसा सॉफ्ट लग रहा है। इसे छूकर देखता हूँ।"
बंटी ने डरते-डरते, अपनी आदत के अनुसार, बिल्कुल धीरे से अपनी एक उंगली उस पत्ते पर लगाई। जैसे ही उसकी उंगली पत्ते से छुई, उसे लगा जैसे किसी ने सुई चुभो दी हो या हल्का सा करंट लगा हो।
"आई ई ई ई...!" बंटी जोर से चिल्लाया। "मम्मी! सांप! बिच्छू! नहीं, एलियन ने काट लिया!"
बंटी रोते हुए और हाथ झटकते हुए घर की ओर भागा। उसका चेहरा लाल और आंसुओं से भरा था।
दादी माँ का नुस्खा और विज्ञान
बंटी घर के आंगन में अपनी दादी माँ की गोद में जाकर गिरा। "दादी! उस हरे राक्षस ने मुझे काट लिया! देखो मेरा हाथ जल रहा है!"
दादी ने उसका हाथ देखा। वहां छोटे-छोटे लाल दाने हो गए थे। दादी मुस्कुराईं और बोलीं, "अरे पगले! यह कोई राक्षस नहीं, यह तो 'बिच्छू बूटी' (Nettle Plant) है।"
दादी ने तुरंत ठंडा पानी डाला और उस पर थोड़ा सा तेल लगा दिया। बंटी अभी भी सिसक रहा था। "दादी, वो पौधा मुझसे नफरत करता है। मैंने तो बस प्यार से छूना चाहा था," बंटी ने मासूमियत से कहा।
दादी ने हंसते हुए समझाया, "बेटा, यह पौधा नफरत नहीं करता, यह तो डर को पहचानता है। जब तुमने इसे डरते-डरते धीरे से छुआ, तो इसके कांटों को मौका मिल गया तुम्हें चुभने का। अगर तुम इसे पूरे आत्मविश्वास और मजबूती से पकड़ते, तो यह तुम्हें कभी नहीं काटता। यह रेशम की तरह मुलायम हो जाता।"
बंटी ने अपनी गोल-गोल आंखें नचाईं। "क्या बात कर रही हो दादी? जोर से पकड़ने पर तो और जोर से काटेगा न? यह कैसा लॉजिक है?"
दादी ने कहा, "यही तो कुदरत का जादू है। डरोगे तो डराएगा, हिम्मत दिखाओगे तो दोस्त बन जाएगा।"
बंटी बना 'बाहुबली'
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अगले दिन बंटी ने फैसला किया कि वह उस पौधे से बदला लेगा, लेकिन लड़ाई करके नहीं, बल्कि दादी के तरीके से। बंटी ने तैयारी शुरू की। उसने सिर पर क्रिकेट का हेलमेट पहना, हाथों में (सुरक्षा के लिए नहीं, बस स्टाइल के लिए) एक प्लास्टिक की तलवार ली और बगीचे की ओर कूच किया।
वह पौधे के सामने खड़ा हुआ और फ़िल्मी अंदाज़ में बोला, "सुनो मिस्टर बिच्छू बूटी! कल तुमने मुझे रुलाया था, आज मैं तुम्हें अपनी हिम्मत दिखाऊंगा।"
बंटी का दिल 'धक्-धक्' कर रहा था। उसे दादी की बात याद आई—"डरकर मत छूना, हक से पकड़ना।"
बंटी ने गहरी सांस ली, आंखें बंद कीं और... झपट्टा मारकर उस पौधे के तने को कसकर पकड़ लिया।
एक सेकंड बीता... दो सेकंड बीते... बंटी ने धीरे से एक आंख खोली। "अरे! यह क्या?" उसे कोई जलन नहीं हो रही थी। कोई करंट नहीं लग रहा था। पौधा उसके हाथ में बिल्कुल सामान्य घास जैसा महसूस हो रहा था।
जीत का जश्न और बड़ी सीख
बंटी खुशी से नाचने लगा। "यस! मैंने कर दिखाया! डर के आगे जीत है!" उसने समझ लिया कि जब उसने जोर से पकड़ा, तो पौधे के छोटे कांटे उसकी त्वचा में चुभने के बजाय दब गए।
बंटी दौड़कर घर गया और चिल्लाया, "दादी! दादी! वो पौधा तो मेरा दोस्त बन गया। मैंने उसे जोर से गले लगाया (हाथ से) और उसने मुझे कुछ नहीं कहा!"
उस दिन के बाद, बंटी का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। अब वह स्कूल में भी किसी सवाल का जवाब देने से नहीं डरता था। वह समझ गया था कि जिंदगी की मुश्किलें भी उस बिच्छू बूटी जैसी होती हैं—अगर डर-डर के हाथ लगाओगे तो बहुत दर्द देंगी, लेकिन अगर आत्मविश्वास से सामना करोगे तो आसान हो जाएंगी।
कहानी से सीख (Moral of the Story)
इस मज़ेदार कहानी से हमें ये बातें सीखने को मिलती हैं:
आत्मविश्वास ही कुंजी है: आधे-अधूरे मन या डर से किया गया काम अक्सर बिगड़ जाता है। जो भी करो, पूरे भरोसे (Confidence) के साथ करो।
डर का सामना करो: जिस चीज़ से डर लगता है, उसका सामना करने से ही डर खत्म होता है। भागने से डर और बड़ा हो जाता है।
वैज्ञानिक तर्क: बिच्छू बूटी (Stinging Nettle) के रोएं सुई जैसे होते हैं। धीरे से छूने पर वे त्वचा में घुस जाते हैं, लेकिन जोर से पकड़ने पर वे टूट जाते हैं या मुड़ जाते हैं, इसलिए चुभते नहीं।
क्या आप जानते हैं?बिच्छू बूटी (Stinging Nettle) एक औषधीय पौधा है। इसके पत्तों में 'फॉर्मिक एसिड' होता है (वही एसिड जो चींटी के डंक में होता है)। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि अगर इसे उबाल दिया जाए, तो यह खाने लायक हो जाता है और सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है! इसके बारे में और अधिक आप Wikipedia पर पढ़ सकते हैं।
लेखक की कलम से: बच्चों, अगली बार जब स्टेज पर जाने से या कोई नया काम करने से डर लगे, तो बंटी और बिच्छू बूटी को याद कर लेना। लंबी सांस लो और बस कर दिखाओ!
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