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Funny Story for Kids: चंपक लाल और उछलता हुआ दूध

Fun Stories | Moral Stories पढ़िए गोलमाल नगर के कंजूस दूधवाले चंपक लाल की यह मज़ेदार कहानी। जब उसने दूध में मिलाया एक "सीक्रेट फॉर्मूला", तो दूध पीने के बजाय 'उछलने' लगा! हंसी और सीख का बेहतरीन संगम।

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बच्चों! लालच इंसान से क्या-क्या नहीं करवाता? कभी-कभी यह उसे ऐसी मुसीबत में डाल देता है जहाँ से निकलना तो मुश्किल होता ही है, लेकिन देखने वालों को हंसी बहुत आती है। Funny Story for Kids की आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही अनोखे दूधवाले की है, जिसे लगता था कि वह दुनिया का सबसे बड़ा वैज्ञानिक और बिजनेसमैन है।

यह कहानी है गोलमाल नगर की, जहाँ हर चीज़ थोड़ी टेढ़ी-मेढ़ी होती है। तो चलिए, अपनी कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए क्योंकि इस कहानी में दूध बहेगा नहीं, बल्कि 'उछलेगा'!

चंपक लाल और उनकी "तूफ़ान मेल"

गोलमाल नगर में एक दूधवाला रहता था, जिसका नाम था चंपक लाल। चंपक लाल की एक खासियत थी—वह मक्खीचूस नहीं, बल्कि "मच्छर-चूस" था। वह अपनी पुरानी खटारा साइकिल, जिसे वह शान से "तूफ़ान मेल" कहता था, पर दूध बेचने निकलता था। साइकिल की चेन उतरने की रफ़्तार, उसकी साइकिल चलने की रफ़्तार से ज़्यादा थी।

चंपक की बीवी का नाम था चमेली देवी। चमेली देवी दिल की बहुत साफ़ थीं, लेकिन उनका दिमाग अक्सर 'नेटवर्क कवरेज' से बाहर रहता था। वह चंपक की हर बात को पत्थर की लकीर मानती थीं।

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चंपक का दूध इतना पतला होता था कि अगर उसे धूप में रख दो, तो पानी भाप बनकर उड़ जाता और नीचे सिर्फ सफेद रंग का पाउडर बचता। लेकिन चंपक का सपना था—रातों-रात करोड़पति बनना।

प्रोफेसर 'झोल' से मुलाक़ात

एक दोपहर, चंपक लाल अपनी साइकिल को धक्का लगाते हुए जंगल के रास्ते से आ रहा था। तभी उसे एक अजीब सा आदमी मिला। उसने रंग-बिरंगा कोट पहना था और उसके बाल बिजली के झटके खाए हुए लग रहे थे। वह था प्रोफेसर झोल, एक पागल वैज्ञानिक।

प्रोफेसर झोल एक पेड़ के नीचे बैठा अपनी नीली शीशी को देख रहा था। चंपक ने पूछा, "अरे भाई! यह क्या है?"

प्रोफेसर झोल की आँखें चमक उठीं। "यह? यह है मेरा नया आविष्कार—'सुपर-क्रीमी फॉर्मूला 420'! इसकी बस एक बूंद दूध में डालो, और दूध इतना गाढ़ा, मलाईदार और स्वादिष्ट हो जाएगा कि लोग आइसक्रीम खाना भूल जाएंगे। और सबसे बड़ी बात—1 लीटर दूध 10 लीटर जैसा लगेगा!"

चंपक के कान खड़े हो गए। उसने सोचा, "1 का 10? यह तो लॉटरी लग गई!" चंपक ने अपनी जेब से सारे पैसे निकालकर प्रोफेसर को दे दिए और वह नीली शीशी खरीद ली। प्रोफेसर ने जाते-जाते चेतावनी दी, "याद रखना! एक बार में सिर्फ़ दो बूंद ही डालना। अगर ज़्यादा डाला, तो इसका असर उल्टा हो सकता है!"

चंपक ने मन ही मन सोचा, "अरे हटो! वैज्ञानिक लोग तो डराते रहते हैं।"

फूड इंस्पेक्टर 'जासूस जलेबी' की एंट्री

चंपक घर आया और खुश होकर चमेली से बोला, "भाग्यवान! अब हमारे अच्छे दिन आ गए। इस शीशी में अमीरी का राज है।"

अगले ही दिन, शहर में खबर फैल गई कि फूड इंस्पेक्टर 'जासूस जलेबी' आ रहे हैं। जासूस जलेबी अपनी नाक के लिए मशहूर थे। कहते हैं, वह दो किलोमीटर दूर से सूंघकर बता देते थे कि समोसे में आलू पुराना है या नया।

चंपक घबरा गया। अगर इंस्पेक्टर ने उसके पतले दूध को देख लिया, तो जेल पक्की! उसने चमेली से कहा, "सुनो! आज मैं दूध में यह 'सुपर-क्रीमी फॉर्मूला' मिलाऊंगा ताकि इंस्पेक्टर को शक न हो। लेकिन ध्यान रखना, शीशी को छिपाकर रखना।"

चंपक ने कंजूसी करते हुए सिर्फ़ एक बूंद दवा डाली। दूध में जबरदस्त झाग आया और वह एकदम गाढ़ा और खुशबूदार हो गया। उस दिन चंपक ने गाँव में वाहवाही लूट ली। इंस्पेक्टर जलेबी ने भी दूध चखा और कहा, "वाह चंपक! मान गए, तुम्हारे दूध में तो जादू है!"

चमेली का "धमाकेदार" प्रयोग (The Comedy Twist)

इंस्पेक्टर जलेबी खुश होकर चले गए, लेकिन उन्होंने कहा, "मैं शाम को फिर आऊंगा, अपनी टीम के लिए खीर बनवानी है, 10 लीटर दूध तैयार रखना।"

चंपक खुशी से पागल हो गया। वह तुरंत तबेले में गया और चमेली से बोला, "सुनो! इंस्पेक्टर साहब शाम को फिर आ रहे हैं। मैं चारा लाने जा रहा हूँ, तुम दूध निकालकर रखना और उसमें यह दवा मिला देना। याद से, कंजूसी मत करना!"

चंपक चला गया। अब चमेली देवी सोचने लगीं। "इन्होंने कहा है कंजूसी मत करना। एक बूंद से दूध इतना अच्छा हुआ, तो अगर मैं पूरी शीशी डाल दूँ तो दूध तो अमृत बन जाएगा! फिर इंस्पेक्टर साहब खुश होकर हमें इनाम देंगे।"

चमेली ने अपना "दिमाग" लगाया और पूरी की पूरी नीली शीशी दूध के बड़े ड्रम में उलट दी।

जैसे ही शीशी खाली हुई, दूध के अंदर से गुड़-गुड़-गुड़ की आवाज़ आने लगी। दूध तरल (Liquid) से बदलकर एक रबड़ जैसी जेली (Solid Rubber) में बदल गया। लेकिन यह सिर्फ़ जमा नहीं था, इसमें एक अजीब स्प्रिंग जैसी ताकत आ गई थी।

इंस्पेक्टर के सामने "बाउंसिंग" तमाशा

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शाम को इंस्पेक्टर जासूस जलेबी अपनी पूरी पलटन के साथ चंपक के घर पधारे। "आओ चंपक भाई! लाओ हमारा स्पेशल दूध।"

चंपक (जिसे अभी तक चमेली के कारनामे का पता नहीं था) शान से ड्रम लेकर आया। उसने सोचा, आज तो तरक्की पक्की है। उसने बड़े स्टाइल में ड्रम से दूध निकालने के लिए उसे पलटा।

लेकिन दूध गिरा नहीं। दूध का एक बड़ा सा सफेद गोला ड्रम से फिसला और धप्प!! से ज़मीन पर गिरा। और फिर... वह वहीं नहीं रुका। वह गोला टप्पा खाकर (Bounce होकर) सीधा ऊपर उछला और इंस्पेक्टर जलेबी की पगड़ी उड़ा ले गया!

पूरा आंगन सन्न रह गया। वह "दूध का गोला" किसी बास्केटबॉल की तरह पूरे आंगन में टप्प-टप्प-टप्प उछलने लगा। कभी वह हवलदार के पेट पर लगता, तो कभी चंपक की साइकिल को गिरा देता।

इंस्पेक्टर जलेबी चिल्लाए, "अरे! यह दूध है या कंगारू? पकड़ो इसे!"

चंपक ने अपना सिर पीट लिया। उसने चमेली की तरफ देखा, जो गर्व से मुस्कुरा रही थी, "देखा जी! कितना गाढ़ा कर दिया मैंने! गिर ही नहीं रहा, सीधा उड़ रहा है!"

इंस्पेक्टर ने उस उछलते हुए दूध के गोले को बड़ी मुश्किल से पकड़ा। उन्होंने उसे दबाया तो वह रबर की तरह पिचक गया। जासूस जलेबी ने अपनी मूंछों को ताव देते हुए कहा, "बेटा चंपक! यह मिलावट नहीं, यह तो साइंस का दुरुपयोग है! चलो, अब जेल में बैठकर रबड़ की रोटियाँ खाना।"

गाँव वाले पेट पकड़-पकड़कर हंस रहे थे क्योंकि पुलिसवाले "दूध" को हथकड़ी पहनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वह बार-बार फिसलकर उछल जाता था।

कहानी से सीख (Moral of the Story)

बच्चों, चंपक लाल और उसकी बाउंसिंग खीर की इस कहानी से हमें ये बातें सीखने को मिलती हैं:

  1. लालच का शॉर्टकट (No Shortcuts): चंपक ने मेहनत करने के बजाय शॉर्टकट अपनाया, जिसका नतीजा बहुत बुरा (और फनी) हुआ।

  2. अधूरी जानकारी खतरनाक है: प्रोफेसर ने कहा था "दो बूंद", लेकिन चमेली ने पूरी शीशी डाल दी। किसी भी चीज़ का सही इस्तेमाल पता होना ज़रूरी है।

  3. ईमानदारी ही बेस्ट है: अगर चंपक शुद्ध दूध बेचता, तो उसे न डरना पड़ता और न ही जेल जाना पड़ता।

विकिपीडिया लिंक (Wikipedia Link)

रबड़ और रसायनों के बारे में मजेदार जानकारी के लिए आप यहाँ पढ़ सकते हैं: Natural Rubber - Wikipedia

तो दोस्तों, अगली बार अगर आपका दूध का गिलास हाथ से छूट जाए और दूध बिखरने के बजाय "टप्पा" खाकर वापस आपके हाथ में आ जाए, तो समझ लेना कि वह चंपक लाल की डेरी का दूध है! हमेशा ईमानदार रहें और लालच से दूर रहें, वरना ज़िन्दगी भी ऐसे ही "बाउंस" होती रहेगी।

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