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बच्चों, क्या आपने कभी सोचा है कि अगर जंगल का राजा शेर न होकर कोई और जानवर बन जाए तो क्या होगा? वो भी एक ऐसा जानवर जो धोखे से राजा बना हो? आज हम 'हरियाली वन' की सैर करेंगे। यह जंगल अपनी मीठे फलों और ठंडी हवाओं के लिए मशहूर था, लेकिन यहाँ एक बड़ी गड़बड़ होने वाली थी। यह कहानी है ताकत, धोखे और सच्चाई की जीत की। तो चलिए, अपनी कुर्सी की पेटी बाँध लीजिये क्योंकि यह Jungle Ki Kahani आपको बहुत हंसाने और सिखाने वाली है।
गोलू खरगोश और गाजर का मजा
हरियाली वन के किनारे एक बहुत ही प्यारा सा, गोल-मटोल खरगोश रहता था, जिसका नाम था गोलू। गोलू को दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार सिर्फ एक ही चीज से था – लाल-लाल, मीठी गाजरें।
एक सुहानी सुबह, गोलू सरहद के पास एक झाड़ी के पीछे छिपा बैठा था। उसके हाथ में एक बड़ी सी गाजर थी। "कटर-पटर... कटर-पटर..." गोलू ने आंखें बंद करके गाजर का पहला निवाला लिया। "आहा! क्या स्वाद है," वह मन ही मन बोला।
लेकिन उसे नहीं पता था कि कुछ ही दूरी पर, दूसरे जंगल की एक चम्पा लोमड़ी उसे घूर रही थी। चम्पा की जीभ लपलपा रही थी। "वाह! आज तो नाश्ते में गोल-मटोल खरगोश मिलेगा," चम्पा ने धीरे से कहा और दबे पांव गोलू की तरफ बढ़ी।
जैसे ही चम्पा ने छलांग लगाई, गोलू चिल्लाया, "अरे मम्मा! बचाओ!" वह भागने ही वाला था कि चम्पा ने उसका रास्ता रोक लिया। गोलू थर-थर कांपने लगा।
कालू भेड़िए की एंट्री
तभी झाड़ियों से एक भारी-भरकम आवाज आई, "रुको!" वहां से निकला कालू भेड़िया। कालू दिखने में तो भयानक था, लेकिन उसके मन में कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी। उसने एक ही झपट्टे में चम्पा लोमड़ी को डरा दिया। "भाग जा यहाँ से, वरना तेरा नाश्ता मैं बना दूंगा!" कालू गुर्राया। चम्पा जान बचाकर वहां से नौ दो ग्यारह हो गई।
गोलू ने राहत की सांस ली। "श-श-शुक्रिया कालू भाई! आज तो आपने मुझे बचा लिया। लोग कहते हैं आप बुरे हो, लेकिन आप तो हीरो निकले!"
कालू ने अपनी मूंछों पर ताव दिया और बोला, "अरे गोलू, यह जंगल वाले मेरी कद्र नहीं करते। अब जब तुम्हें पता चल गया है कि मैं कितना ताकतवर और नेक हूँ, तो तुम पूरे जंगल में यह बात फैला दो। कहो कि कालू को जंगल का नया राजा बनाया जाए।"
गोलू ने अपना सिर खुजाया, "क्या? राजा? लेकिन हमारे पास तो शेर सिंह हैं न?"
कालू चिढ़ गया, "अरे वो बूढ़ा शेर? अब मेरा जमाना है। जाओ, जाकर सबको बताओ!"
शेर सिंह का दरबार और भेड़िए का अपमान
गोलू सीधा जंगल के राजा, शेर सिंह (एक विशाल और समझदार बाघ) के पास पहुंचा और पूरी बात बताई। शेर सिंह ने अपनी मूंछें हिलाईं और कालू को दरबार में बुलाया।
"सुना है कालू, तुम्हें राजा बनने का शौक चढ़ा है?" शेर सिंह ने भारी आवाज में पूछा।
कालू अकड़ते हुए बोला, "हाँ महाराज! मैंने खरगोश की जान बचाई है। मैं बहादुर हूँ, मुझे राजा होना चाहिए।"
शेर सिंह हंसे, "बहादुरी और राजा बनने में फर्क होता है कालू। तुम्हें याद है जब 'लाल दानव' ने जंगल पर हमला किया था? तब मैंने और नीली परी ने मिलकर उसे 'काली गुफा' में कैद किया था। अगर तुम सच में राजा बनना चाहते हो, तो मुझे युद्ध में हराओ। लेकिन याद रखना, धोखे से नहीं, ताकत से।"
कालू को बहुत गुस्सा आया। उसे लगा उसका अपमान हुआ है। "ठीक है शेर सिंह, देख लूंगा तुम्हें!" यह कहकर वह पैर पटकता हुआ दरबार से चला गया।
काली गुफा का डरावना सौदा
कालू के दिमाग में शैतानी आईडिया आया। वह जंगल के सबसे अंधेरे कोने में स्थित 'काली गुफा' के पास गया। यह वही गुफा थी जहां लाल दानव कैद था।
कालू ने गुफा के बाहर खड़े होकर आवाज लगाई, "ओ लाल दानव! क्या तुम सुन रहे हो?"
गुफा के अंदर से गूंजती हुई आवाज आई, "कौन है? जो मेरी नींद खराब कर रहा है?"
"मैं कालू हूँ। मैं तुम्हें आजाद कर सकता हूँ," कालू ने लालच फेंका।
दानव की आवाज में चमक आ गई, "क्या सच में? लेकिन मैं तब तक बाहर नहीं आ सकता जब तक मैं 10 जानवरों को न खा लूं। यह उस परी का श्राप है।"
कालू ने शैतानी हंसी हंसी, "मंजूर है! लेकिन बदले में मुझे इतनी शक्ति दो कि मैं उस शेर सिंह को हरा सकूं। मैं राजा बनूंगा और तुम्हें रोज एक जानवर खाने को दूंगा।"
दानव ने अपनी जादुई शक्ति का एक हिस्सा गुफा से बाहर फेंका। एक लाल रोशनी का गोला कालू के सीने में समा गया। कालू को महसूस हुआ कि उसके अंदर 10 हाथियों जितनी ताकत आ गई है। उसकी आंखें लाल चमकने लगीं। "अब आएगा मजा!" कालू गुर्राया।
जंगल का नया और क्रूर राजा
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अगले ही दिन, कालू शेर सिंह के पास पहुंचा। "शेर सिंह! गद्दी छोड़ो या मुझसे लड़ो!"
शेर सिंह को लगा कि कालू मजाक कर रहा है, लेकिन जैसे ही कालू ने शेर सिंह पर हमला किया, शेर सिंह हैरान रह गए। कालू की ताकत असाधारण थी। उसने शेर सिंह को उठाकर एक सूखे पेड़ से टकरा दिया। शेर सिंह घायल हो गए और उन्हें यकीन नहीं हुआ कि एक मामूली भेड़िया इतना ताकतवर कैसे हो गया।
जान बचाने के लिए शेर सिंह को जंगल छोड़कर भागना पड़ा।
कालू चट्टान पर खड़ा होकर चिल्लाया, "सुनो जंगलवासियों! आज से मैं तुम्हारा राजा हूँ। मेरा हुक्म है कि रोज एक जानवर मेरे पास आएगा, जिसे मैं उस गुफा वाले दानव को दूंगा। अगर किसी ने मना किया, तो मैं उसे ही खा जाऊंगा!"
पूरे जंगल में सन्नाटा छा गया। बंदर, हिरण, भालू - सब डर के मारे कांपने लगे।
शेर सिंह और नन्ही परी की मुलाकात
हफ्तों बीत गए। जंगल उदास हो चुका था। कई जानवर गायब हो चुके थे। शेर सिंह जंगल के बाहर एक फूलों वाली घाटी में उदास बैठे थे। उन्हें अपने जंगल की चिंता खाए जा रही थी।
तभी, हवा में फूलों की खुशबू घुल गई और एक झिलमिलाती रोशनी प्रकट हुई। वह नीली परी थी।
"अरे शेर सिंह! आप यहाँ अकेले क्यों बैठे हैं? और आपका जंगल कैसा है?" परी ने पूछा।
शेर सिंह ने शर्मिंदा होकर सिर झुका लिया, "परी, मुझे माफ करना। मैं हार गया। कालू भेड़िए ने मुझे हरा दिया और अब वह जंगल का राजा है। मुझे समझ नहीं आया कि उसके पास इतनी ताकत कहां से आई।"
परी सोच में पड़ गई। "हम्म... एक भेड़िया शेर को हरा दे, यह मुमकिन नहीं, जब तक कि..." परी की आँखों में चमक आई। "शेर सिंह, क्या आपको याद है हमने लाल दानव को कहां कैद किया था?"
"हाँ, काली गुफा में," शेर सिंह बोले।
"मुझे शक है कि कालू ने उस दानव से हाथ मिला लिया है। हमें अभी जाकर देखना होगा," परी ने अपनी छड़ी घुमाई और दोनों पलक झपकते ही काली गुफा के पास पहुंच गए।
वहां का नजारा देख शेर सिंह का खून खौल उठा। कालू एक बेचारे हिरण को गुफा के अंदर धकेल रहा था।
"देखा! मेरा शक सही था," परी ने कहा। "कालू की ताकत का राज यह दानव है। लेकिन चिंता मत करो, मेरे पास एक प्लान है।"
आखिरी मुकाबला
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परी और शेर सिंह वापस जंगल के बीचों-बीच पहुंचे। परी ने शेर सिंह के कान में कुछ कहा और खुद एक बड़े बरगद के पेड़ के पीछे छिप गई।
जब कालू वापस आया, तो उसने शेर सिंह को अपनी पुरानी गद्दी के पास खड़ा देखा। "अरे! तू फिर आ गया? मरने का शौक है क्या?" कालू हंसा।
शेर सिंह ने दहाड़ लगाई, "कालू! उधार की ताकत पर कूदना बंद कर। अगर हिम्मत है तो मुझसे फिर से लड़।"
कालू को अपनी जादुई ताकत पर घमंड था। वह पूरी रफ्तार से शेर सिंह की तरफ दौड़ा। जैसे ही वह शेर सिंह को मारने के लिए हवा में उछला, पेड़ के पीछे छिपी नीली परी ने अपनी जादुई छड़ी घुमाई और एक मंत्र पढ़ा:
"अकड़-बकड़ बम्बे बो, बुराई की शक्ति वापस हो!"
अचानक, कालू के शरीर से लाल रोशनी बाहर निकल गई और हवा में गायब हो गई। अब कालू सिर्फ एक साधारण भेड़िया रह गया था। वह हवा में ही लड़खड़ाया और सीधा शेर सिंह के पंजों के पास 'धड़ाम' से गिरा।
शेर सिंह ने उसे एक जोरदार थप्पड़ मारा। कालू दस फीट दूर जाकर कीचड़ में गिरा। "आह! मेरी कमर!" कालू चिल्लाया।
"क्यों कालू? अब कहां गई तुम्हारी ताकत?" शेर सिंह ने पूछा। कालू गिड़गिड़ाने लगा, "मुझे माफ कर दो महाराज! मैं लालच में आ गया था। मेरी अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे।"
तभी नीली परी सबके सामने आ गई। उसने सारे जानवरों को सच बताया कि कैसे कालू ने अपनी ताकत के लिए अपने ही साथियों को दानव को खिलाया।
जानवर गुस्से में थे, लेकिन शेर सिंह दयालु थे। उन्होंने कहा, "कालू, तुम्हें राजा बनने का शौक था न? आज से तुम्हारी सजा यह है कि तुम जंगल की सफाई करोगे और सबसे आखिर में खाना खाओगे।"
कालू ने सिर झुकाकर सजा स्वीकार कर ली।
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इसके बाद, परी और शेर सिंह काली गुफा गए। परी ने अपनी जादुई शक्ति से गुफा के मुंह पर एक विशाल पत्थर लगा दिया, जिसे कोई नहीं हटा सकता था। अंदर से लाल दानव चिल्लाता रह गया, लेकिन अब उसकी कोई सुनने वाला नहीं था।
जंगल में फिर से खुशियां लौट आईं। गोलू खरगोश ने फिर से मजे से गाजर खानी शुरू कर दी, और शेर सिंह ने जंगल पर राज किया - प्यार और ईमानदारी से।
कहानी से सीख (Moral of the Story)
इस कहानी से हमें तीन मुख्य बातें सीखने को मिलती हैं:
बुराई का रास्ता छोटा होता है: धोखे या गलत तरीके से मिली सफलता ज्यादा दिन नहीं टिकती।
घमंड का अंत: उधार की ताकत पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि असली ताकत आपकी अपनी मेहनत और चरित्र में होती है।
लालच बुरी बला है: कालू ने सत्ता के लालच में अपने दोस्तों को भी धोखा दिया, और अंत में उसे अपमानित होना पड़ा।
क्या आप जानते हैं? शेर (Lion) और बाघ (Tiger) दोनों 'बिल्ली' परिवार (Felidae) के सदस्य हैं। शेर को अक्सर "जंगल का राजा" कहा जाता है, लेकिन असल में बाघ आकार में शेर से बड़ा होता है। आप इनके बारे में और अधिक जानकारी Wikipedia पर पढ़ सकते हैं।
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