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Jungle Ki Kahani: राजा उदय और ज़ालिम शेर का महायुद्ध

पढ़िए एक रोमांचक Jungle Ki Kahani, जहाँ न्यायप्रिय राजा उदय और क्रूर ज़ालिम शेर के बीच धर्मयुद्ध छिड़ता है। जानिए कैसे छोटे से चूहे और चतुर लोमड़ी ने जंगल को बचाया। बच्चों के लिए एक बेहतरीन शिक्षाप्रद कहानी।

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प्यारे बच्चों! जंगल में सिर्फ ताकतवर ही नहीं जीतता, बल्कि वो जीतता है जिसके पास वफादार दोस्त और तेज दिमाग हो। आज की हमारी Jungle Ki Kahani हमें ले जाएगी 'हरितवन' के घने जंगलों में। यह कहानी दो भाइयों की है—एक जो अपनी प्रजा को परिवार मानता था, और दूसरा जो उन्हें सिर्फ अपना भोजन समझता था। तो चलिए, देखते हैं कि अच्छाई और बुराई की इस जंग में जीत किसकी होती है।

हरितवन के दो भाई: उदय और ज़ालिम

बहुत समय पहले की बात है, विंध्याचल की पहाड़ियों के पीछे 'हरितवन' नाम का एक विशाल जंगल था। इस जंगल पर दो शेरों का प्रभाव था। एक था राजा उदय, जो सुनहरे अयाल (Mane) वाला, शांत और न्यायप्रिय शासक था। दूसरा था उसका सौतेला भाई ज़ालिम, जिसके चेहरे पर एक गहरा घाव था और दिल में नफरत भरी थी।

उदय का मानना था कि "राजा वही है जो प्रजा की रक्षा करे," जबकि ज़ालिम का मानना था, "राजा वह है जिससे प्रजा डर कर रहे।"

उदय के इलाके में जानवर बेखौफ घूमते थे, जबकि ज़ालिम के इलाके में सन्नाटा पसरा रहता था। ज़ालिम ने अपने लालच में अपने हिस्से के जंगल के लगभग सभी जानवरों का शिकार कर लिया था। अब उसकी नज़र अपने भाई के हरे-भरे इलाके पर थी।

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नन्हे चिंटू की चेतावनी

एक सुबह, राजा उदय अपनी सभा में बैठे थे। तभी चिंटू चूहा (जो बहुत छोटा था, लेकिन निडर था) आगे आया। "महाराज, मुझे माफ़ करें, लेकिन मुझे एक कड़वा सच बोलना है," चिंटू ने हाथ जोड़कर कहा।

उदय ने मुस्कुराते हुए कहा, "बोलो नन्हे चिंटू, राजा के दरबार में सच बोलने का हक सबको है।"

चिंटू बोला, "महाराज, हमारे जंगल पर संकट मंडरा रहा है। आपके भाई ज़ालिम के इलाके में अब घास का एक तिनका भी नहीं बचा है। वहां के शाकाहारी जानवर खत्म हो चुके हैं। अब उनकी नज़र हमारे इलाके पर है। मैंने कल सीमा पर ज़ालिम और उसके साथी कालिया भेड़िए को बात करते सुना था। वे नन्नी भेड़ (एक प्यारा मेमना) को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं।"

राजा उदय गंभीर हो गए। उन्होंने कहा, "चिंटू, तुम्हारी चेतावनी सही समय पर मिली है। हम किसी भी निर्दोष को मरने नहीं देंगे।"

नन्नी भेड़ और ज़ालिम का हमला

अगले ही दिन, ज़ालिम और कालिया भेड़िया चोरी-छिपे हरितवन की सीमा में घुस आए। उनकी नज़र नन्नी भेड़ पर थी, जो झाड़ियों के पास घास चर रही थी।

"आज तो दावत होगी!" ज़ालिम गुर्राया और नन्नी पर छलांग लगाने ही वाला था कि तभी... दहाड़!! राजा उदय बिजली की गति से बीच में आ गए।

"रुक जा ज़ालिम!" उदय की आवाज़ से पूरा जंगल हिल गया। "यह हरितवन है, यहाँ शिकार के नियम मैं बनाता हूँ। बेबस और बच्चों पर हमला करना कायरता है।"

ज़ालिम हंसा, "नियम? ताकतवर के लिए कोई नियम नहीं होते भाई। मुझे भूख लगी है और मैं इसे खाकर ही जाऊँगा।"

उदय ने अपनी जगह नहीं छोड़ी। "अगर तुझे भूख लगी है, तो मैं तुझे अपने हिस्से का भोजन दे सकता हूँ, लेकिन मेरी प्रजा को छूने की हिम्मत मत करना। वरना आज भाई का रिश्ता भी तुझे मेरे क्रोध से नहीं बचा पाएगा।"

उदय की आँखों में ऐसी आग थी कि ज़ालिम सहम गया। वह जानता था कि सीधी लड़ाई में वह उदय से नहीं जीत सकता। "ठीक है, आज मैं जा रहा हूँ। लेकिन याद रखना उदय, यह जंगल मेरा भी है। मैं वापस आऊँगा, और तब मुझे कोई नहीं रोक पाएगा," ज़ालिम धमकी देकर चला गया।

ज़ालिम का षड्यंत्र: पानी में ज़हर

सीधी लड़ाई में हार मानकर, ज़ालिम ने छल का रास्ता चुना। रात के अंधेरे में, ज़ालिम और कालिया भेड़िए ने एक घिनौनी चाल चली। उन्होंने हरितवन के मुख्य तालाब में सड़ा हुआ मांस और गंदगी डाल दी। साथ ही, अनाज के गोदामों में आग लगाने की कोशिश की।

अगली सुबह, जानवरों में हाहाकार मच गया। "पानी बदबूदार हो गया है! हम क्या पिएंगे?" जानवर चिल्लाने लगे। "अनाज भी कम हो गया है, हम भूखे मर जाएंगे!"

अफवाहें फैलने लगीं। कालिया भेड़िया भेष बदलकर जानवरों के बीच गया और फुसफुसाने लगा, "राजा उदय अब बूढ़ा हो गया है। वह संभल नहीं पा रहा। अगर ज़ालिम राजा होता, तो ऐसा कभी नहीं होता।"

 राजा उदय की जवाबी कार्रवाई

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राजा उदय समझ गए कि यह दुश्मन की चाल है। उन्होंने तुरंत अपनी 'विशेष टीम' को बुलाया।

  1. मिन्टी लोमड़ी (जासूस): "मिन्टी, तुम तुरंत ज़ालिम के इलाके में जाओ और पता लगाओ कि उसका अगला कदम क्या है। ध्यान रहे, किसी को तुम दिखनी नहीं चाहिए।"

  2. गजराज हाथी (रक्षक): "गजराज, तुम अपनी सूंड से तालाब की सफाई शुरू करो और यह सुनिश्चित करो कि कोई भी प्यासा न रहे।"

  3. पवन घोड़ा (संदेशवाहक): "पवन, तुम पूरे जंगल में दौड़ लगाओ और सबको बताओ कि घबराने की ज़रूरत नहीं है। राजा उनके साथ है।"

  4. चिंटू चूहा (गुप्त सैनिक): "चिंटू, तुम अपने साथियों के साथ ज़ालिम के राशन के बोरों को कुतर दो, ताकि उसकी सेना कमजोर पड़ जाए।"

मिन्टी की जासूसी और 'फूट डालो' नीति

मिन्टी लोमड़ी बहुत चालाक थी। वह ज़ालिम की गुफा के पीछे छिप गई। उसने सुना कि ज़ालिम कालिया भेड़िए से कह रहा था, "सुन कालिया, जैसे ही मैं राजा बनूंगा, सबसे पहले तुझे जंगल से निकाल दूंगा। मुझे गद्दार पसंद नहीं हैं।"

मिन्टी ने यह बात सुन ली। वह वापस आई और उदय को बताया। राजा उदय ने मुस्कुराते हुए कहा, "अब हम 'फूट डालो और राज करो' की चाल को उसी पर आजमाएंगे।"

अगले दिन, मिन्टी जानबूझकर कालिया भेड़िए को मिली। उसने कहा, "अरे कालिया भाई, तुम अभी भी ज़ालिम के साथ हो? उसने तो राजा उदय से समझौता कर लिया है कि वह तुम्हें सौंप देगा और खुद बच जाएगा।"

कालिया भेड़िया डर गया। उसे ज़ालिम की रात वाली बात याद आ गई। उसे लगा मिन्टी सच बोल रही है।

आखिरी युद्ध और जीत

उस रात, ज़ालिम ने अपनी सेना के साथ हरितवन पर हमला कर दिया। लेकिन इस बार बाजी पलट चुकी थी। जैसे ही ज़ालिम ने हमला बोला, कालिया भेड़िया और उसके साथी पीछे हट गए।

"तुम रुक क्यों गए? हमला करो!" ज़ालिम चिल्लाया। "नहीं ज़ालिम! हमें पता है तुम हमें धोखा देने वाले थे," कालिया ने कहा और वहां से भाग गया।

अब ज़ालिम अकेला पड़ गया था। राजा उदय ने उसे घेर लिया। "ज़ालिम, तूने प्रकृति के नियम तोड़े हैं। तूने पानी गंदा किया, प्रजा को डराया। अब तेरे लिए यहाँ कोई जगह नहीं है।"

ज़ालिम ने हमला किया, लेकिन राजा उदय, गजराज हाथी और बाकी जानवरों ने मिलकर उसे हरा दिया। उदय ने उसे जान से नहीं मारा, बल्कि उसे हमेशा के लिए जंगल से निकाल दिया।

हरितवन में फिर से खुशहाली लौट आई। नन्नी भेड़ अब बड़ी होकर जंगल की नई रक्षक बनी।

कहानी से सीख (Moral of the Story)

इस कहानी से हमें तीन बड़ी बातें सीखने को मिलती हैं:

  1. एकता में ही बल है: जब सभी जानवर (चूहा, हाथी, लोमड़ी) मिल गए, तो बड़ा दुश्मन भी हार गया।

  2. बुराई का अंत: छल और कपट से मिली सफलता ज्यादा दिन नहीं टिकती।

  3. सही नेतृत्व: राजा उदय ने समस्या आने पर घबराने के बजाय अपनी टीम का सही इस्तेमाल किया।

क्या आप जानते हैं? शेरों (Lions) का एक समूह जिसे 'प्राइड' (Pride) कहते हैं, उसमें शिकार का काम ज्यादातर शेरनियां करती हैं, लेकिन इलाके की रक्षा नर शेर करते हैं। शेर की दहाड़ 8 किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है! इनके बारे में और अधिक आप Wikipedia पर पढ़ सकते हैं।

लेखक की कलम से: बच्चों, जीवन में कभी भी मुसीबत आए, तो राजा उदय की तरह शांत दिमाग और दोस्तों की मदद से उसका सामना करना!

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