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लालच का पिशाच: कबीर और सोने की घड़ी का रहस्य - हिंदी कहानी

क्या लालच सच में एक पिशाच होता है? जानिए शहर के लड़के कबीर की कहानी, जिसे एक महंगी घड़ी के लालच ने डरावने सपने और बड़ी मुसीबत में डाल दिया। Moral Stories

By Lotpot
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लालच का पिशाच: भारत के एक व्यस्त महानगर 'मुंबई' की गगनचुंबी इमारतों के बीच 'सनशाइन अपार्टमेंट्स' में कबीर नाम का एक लड़का रहता था। कबीर 12 साल का था और उसे महंगे गैजेट्स, वीडियो गेम्स और स्टाइलिश कपड़ों का बहुत शौक था। वह दिल का बुरा नहीं था, लेकिन शहर की चमक-धमक ने उसके मन में चीजों को पाने की एक अजीब सी भूख पैदा कर दी थी।

लोभ (Greed) एक ऐसी भावना है जो अच्छे-खासे इंसान की बुद्धि को भी भ्रष्ट कर सकती है। कबीर के साथ भी कुछ ऐसा ही होने वाला था। उसके माता-पिता उसे हमेशा समझाते थे कि इंसान की पहचान उसके सामान से नहीं, उसके स्वभाव से होती है। लेकिन कबीर को लगता था कि जिसके पास जितनी महंगी चीजें हैं, वह उतना ही बड़ा आदमी है।

पार्क में मिली 'अनमोल' चीज़

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एक शाम, कबीर अपनी सोसाइटी के पार्क में जॉगिंग कर रहा था। तभी उसकी नज़र बेंच के नीचे पड़ी एक चमकती हुई वस्तु पर गई। उसने झुककर देखा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वह एक बेहद कीमती, सोने की चेन वाली 'रोलेक्स' घड़ी (Rolex Watch) थी, जिसमें हीरे जड़े हुए लग रहे थे।

कबीर ने इधर-उधर देखा। पार्क में उस समय कोई नहीं था। उसके मन में दो आवाज़ें गूंजीं। पहली आवाज़ (ईमानदारी): "इसे सिक्योरिटी गार्ड को दे दो, जिसका होगा ले जाएगा।" दूसरी आवाज़ (लालच का पिशाच): "अरे पागल! इसे रख ले। यह लाखों की होगी। इसे बेचकर तू नया गेमिंग कंसोल और ढेर सारे जूते ले सकता है।"

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दुर्भाग्य से, कबीर ने दूसरी आवाज़ सुनी। उसने घड़ी को अपनी जेब में डाल लिया और चुपचाप घर आ गया। उसे लगा कि उसने कोई खजाना पा लिया है, लेकिन उसे नहीं पता था कि उसने घड़ी नहीं, बल्कि एक मुसीबत पा ली है।

लालच का असर: डर और बेचैनी

घर आकर कबीर ने वह घड़ी अपनी अलमारी के सबसे गहरे कोने में, अपने पुराने कपड़ों के नीचे छिपा दी। उस रात उसे ठीक से नींद नहीं आई। उसे हर पल लगता कि पुलिस दरवाजे पर दस्तक देगी या उसके माता-पिता को पता चल जाएगा। अगले दिन स्कूल में भी उसका मन पढ़ाई में नहीं लगा। वह अपने दोस्तों से भी ठीक से बात नहीं कर पा रहा था। उसकी दोस्ती जो पहले बहुत गहरी थी, अब उसे बोझ लगने लगी क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसके दोस्त उसका राज न जान लें।

उसने लोटपोट की कई हिंदी कहानियां पढ़ी थीं जिनमें चोर पकड़े जाते थे, और यही डर उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था। वह घड़ी उसके लिए खुशी नहीं, बल्कि एक भारी पत्थर बन गई थी।

सपना और लालच का पिशाच

दूसरी रात, कबीर को एक भयानक सपना आया। उसने देखा कि वह एक अंधेरे कमरे में बैठा है और वह सोने की घड़ी उसके हाथ में है। अचानक वह घड़ी बड़ी होने लगी और उसने एक डरावने साये का रूप ले लिया। वह साया काला और धुएं जैसा था, जिसकी आँखें सोने के सिक्कों जैसी चमक रही थीं। वह साया बोला, "मैं लालच का पिशाच हूँ! तुमने मुझे अपने मन में जगह दी है। अब मैं तुम्हारी खुशी, तुम्हारी नींद और तुम्हारी शांति सब खा जाऊंगा।"

उस पिशाच ने कबीर को सोने की जंजीरों से जकड़ दिया। कबीर चिल्लाना चाहता था, लेकिन उसकी आवाज़ नहीं निकल रही थी। उसे महसूस हुआ कि यह लालच उसे धीरे-धीरे खत्म कर रहा है। उसे अपने साहस की कमी पर बहुत गुस्सा आया।

पश्चाताप और मुक्ति

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कबीर पसीने से लथपथ होकर नींद से जागा। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने तुरंत पानी पिया और घड़ी निकाली। वह घड़ी अब उसे सुंदर नहीं, बल्कि डरावनी लग रही थी। उसे समझ आ गया कि जो चीज़ उसकी नहीं है, उसे रखने का सुख नकली है, और उसका डर असली।

अगली सुबह, कबीर बिना किसी को बताए सीधे सोसाइटी के ऑफिस गया। वहां एक बुजुर्ग अंकल, जो सोसाइटी के सेक्रेटरी थे, परेशान बैठे थे। कबीर ने वह घड़ी उनकी मेज पर रख दी। "अंकल, यह घड़ी मुझे कल पार्क में मिली थी। मुझे माफ कर दीजिए, मैं इसे कल ही देने वाला था लेकिन... मैं भूल गया," कबीर ने झूठ बोला, लेकिन उसकी नीयत अब साफ थी।

अंकल की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने कबीर को गले लगा लिया। "बेटा! तुम नहीं जानते तुमने क्या किया है। यह मेरे पिताजी की आखिरी निशानी थी। तुम बहुत ईमानदार बच्चे हो।"

असली खुशी

उस दिन कबीर को जो खुशी मिली, वह उस घड़ी की कीमत से कहीं ज्यादा थी। उसे लगा जैसे उसके सीने से कोई भारी बोझ उतर गया हो। लालच का पिशाच अब हमेशा के लिए उसके मन से भाग चुका था।

कबीर ने यह बात अपने माता-पिता को भी बताई। उन्होंने उसे डांटा नहीं, बल्कि उसकी ईमानदारी की तारीफ की। यह प्रेरणादायक कहानी हमें सिखाती है कि मन की शांति से बढ़कर दुनिया में कोई दौलत नहीं है।

बच्चों, याद रखना, चोरी का धन या लालच से मिली चीज़ कभी फलती-फूलती नहीं है।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  1. लालच मानसिक शांति का दुश्मन है: परायी वस्तु का लालच हमें हमेशा डराता और परेशान करता रहता है।

  2. ईमानदारी में ही सुकून है: सच बोलने और सही काम करने के बाद जो नींद आती है, वह सबसे मीठी होती है।

  3. गलती सुधारना महानता है: अगर गलती हो जाए, तो उसे समय रहते सुधार लेना चाहिए, जैसे कबीर ने किया। 

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