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सोने की कलम का जादू:- सुंदरपुर नाम के एक छोटे से गाँव में राजू नाम का एक लड़का रहता था। राजू दिल का बहुत अच्छा था और पढ़ाई में भी ठीक था, लेकिन उसकी एक बहुत बड़ी समस्या थी - उसकी लिखावट (Handwriting)। उसकी लिखावट इतनी खराब थी कि कभी-कभी तो वह खुद भी नहीं पढ़ पाता था कि उसने क्या लिखा है। स्कूल में उसके शिक्षक अक्सर उसे डांटते थे, "राजू! अगर तुम मोतियों जैसे अक्षर नहीं लिखोगे, तो परीक्षा में अच्छे नंबर कैसे आएंगे?"
राजू कोशिश करता, लेकिन उसकी उंगलियां जल्दी थक जातीं और अक्षर फिर से टेढ़े-मेढ़े हो जाते। वह बहुत निराश हो गया था। उसे लगता था कि शायद अच्छी लिखावट किस्मत (Luck) वालों को ही मिलती है।
रहस्यमयी बूढ़ा और अनोखा उपहार
एक दिन स्कूल से घर लौटते समय, राजू ने देखा कि एक बुजुर्ग आदमी (साधु बाबा) पेड़ के नीचे बैठे हैं और उन्हें प्यास लगी है। राजू ने तुरंत अपनी बोतल से उन्हें पानी पिलाया। बुजुर्ग बहुत खुश हुए। उन्होंने अपनी झोली में हाथ डाला और एक चमचमाती सोने की कलम (Golden Pen) निकाली।
बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, तुम बहुत नेक हो। यह कोई साधारण कलम नहीं है। यह एक सोने की कलम है। इससे तुम जो भी लिखोगे, वह मोतियों जैसा सुंदर होगा। लेकिन इस कलम का एक नियम है।"
राजू ने उत्सुकता से पूछा, "क्या नियम है बाबा?" बुजुर्ग बोले, "इस कलम का जादू तभी काम करेगा जब तुम इससे रोज़ाना 5 पन्ने (Pages) लिखोगे। जिस दिन तुमने लिखना छोड़ा, इसका जादू खत्म हो जाएगा।"
राजू ने खुशी-खुशी वह कलम ले ली। उसे लगा कि अब उसकी सारी मुसीबतें खत्म हो गईं। यह जादुई कलम की कहानी (Magic Pen Story) उसके जीवन को बदलने वाली थी।
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जादू या मेहनत?
घर आकर राजू ने तुरंत लिखना शुरू किया। उसे सोने की कलम से लिखने में बहुत मज़ा आ रहा था। वह कलम इतनी सुंदर थी कि राजू उसे हाथ से छोड़ना ही नहीं चाहता था। बाबा की शर्त पूरी करने के लिए, उसने रोज़ाना 5 पन्ने लिखना शुरू कर दिया। वह कहानियाँ लिखता, कविताएँ लिखता और अपने स्कूल का होमवर्क भी उसी कलम से करता।
धीरे-धीरे एक महीना बीत गया। स्कूल में सब हैरान थे। राजू की कॉपी अब सबसे सुंदर दिखती थी। उसके अक्षर सचमुच मोतियों जैसे चमकने लगे थे। शिक्षक उसे शाबाशी देने लगे। राजू को पूरा यकीन हो गया कि यह सब उस सोने की कलम का ही जादू है। उसे अपनी कलम पर बहुत गर्व हो गया था।
परीक्षा का दिन और टूटा हुआ भ्रम
वार्षिक परीक्षा (Annual Exam) का दिन आ गया। राजू बड़े आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने गया। लेकिन जैसे ही वह परीक्षा हॉल में बैठा, उसे याद आया कि वह अपनी सोने की कलम तो घर पर ही भूल गया है! राजू के पसीने छूटने लगे। उसने सोचा, "आज तो मैं फेल हो जाऊंगा। मेरी पुरानी लिखावट फिर से वापस आ जाएगी।"
उसके पास एक साधारण नीली पेन थी। रोते हुए मन से उसने उसी साधारण पेन से लिखना शुरू किया। उसका हाथ कांप रहा था, लेकिन जैसे-जैसे वह लिखता गया, उसने महसूस किया कि उसके अक्षर अभी भी वैसे ही सुंदर बन रहे हैं। वह हैरान था! वह साधारण पेन से भी उतना ही सुंदर लिख पा रहा था जितना सोने की कलम से।
उस दिन राजू ने अपना पेपर बहुत अच्छे से पूरा किया।
असली जादू का खुलासा
शाम को राजू दौड़कर उसी पेड़ के नीचे गया जहाँ उसे वो बुजुर्ग मिले थे। संयोग से बुजुर्ग वहीं बैठे थे। राजू ने कहा, "बाबा! आज मैं अपनी सोने की कलम भूल गया था, फिर भी मेरी लिखावट बहुत सुंदर आई। यह कैसे हुआ?"
बुजुर्ग ज़ोर से हँसे और बोले, "बेटा! वह कलम सोने की जरूर थी, लेकिन जादुई नहीं थी। जादू उस कलम में नहीं, तुम्हारे अभ्यास (Practice) में था। मैंने तुमसे रोज़ 5 पन्ने लिखने को कहा था। उस लगातार अभ्यास ने तुम्हारी उंगलियों को साध दिया और तुम्हारी लिखावट सुंदर हो गई। कलम तो बस एक बहाना थी ताकि तुम मेहनत कर सको।"
राजू को अपनी गलती और अपनी ताकत दोनों का अहसास हुआ। उसने समझ लिया कि सफलता का रहस्य (Secret of Success) किसी जादुई वस्तु में नहीं, बल्कि हमारी कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास में छिपा होता है।
बच्चों, यह प्रेरणादायक कहानी (Inspirational Story) हमें सिखाती है कि हम खुद ही अपने जीवन के जादूगर हैं।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
अभ्यास में ही शक्ति है: 'करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान' - लगातार मेहनत से हम किसी भी कौशल में माहिर हो सकते हैं।
आत्मविश्वास: हमें बाहरी वस्तुओं पर नहीं, बल्कि अपनी मेहनत पर भरोसा करना चाहिए।
- जादू हमारे अंदर है: असली जादू हमारी लगन और परिश्रम में होता है।
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