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कविता “दुनिया” बच्चों को इस विशाल और रंग-बिरंगी पृथ्वी से परिचित कराने वाली एक सरल, मधुर और ज्ञानवर्धक रचना है। इसमें दुनिया की भौगोलिक विविधता को मासूम शब्दों में दिखाया गया है। गोल-गोल दुनिया का चित्र बच्चों की जिज्ञासा जगाता है और उन्हें यह समझने में मदद करता है कि हमारा ग्रह कितना विशाल और अनोखा है।
कविता में सागर, हरी-भरी धरती, ऊँचे पर्वत और सूने रेगिस्तान जैसे प्राकृतिक दृश्य बच्चों के सामने जीवंत रूप में आते हैं। ये पंक्तियाँ केवल प्रकृति का वर्णन नहीं करतीं, बल्कि यह भी बताती हैं कि दुनिया कितनी विविध है। कहीं हरियाली है, कहीं पानी, तो कहीं ऊँचे पहाड़ और सूखे रेगिस्तान। इसके साथ-साथ कविता यह भी सिखाती है कि लोग अलग-अलग देशों में रहते हैं, अलग-अलग कपड़े पहनते हैं, फिर भी हम सब इसी एक दुनिया का हिस्सा हैं।
यह कविता बाल साहित्य, सामान्य ज्ञान, और भूगोल की शुरुआती समझ के लिए बहुत उपयोगी है। स्कूलों में कक्षा की शुरुआत, कविता पाठ, या विश्व से जुड़े अध्यायों के साथ इसे आसानी से जोड़ा जा सकता है। यह बच्चों में दुनिया को जानने, समझने और अपनाने की भावना विकसित करती है।
कविता
चल आज दिखा दें तुमको, मुनिया,
गोल-गोल अपनी यह दुनिया।
इधर-उधर बहते हैं सागर,
कहीं बिछी है हरी-सी चादर।
ऊँचे पर्वत गगन को चूमें,
रेगिस्तान हैं रहते सूने।
पहने अलग-अलग से वेश,
हम सब रहते देश-विदेश।
