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लो गरमी की छुट्टी आई: बच्चों की छुट्टियों पर कविता

कविता “लो गरमी की छुट्टी आई” बच्चों के लिए एक सरल, शिक्षाप्रद और मनोरंजक रचना है, जो गर्मियों की छुट्टियों के माहौल को बड़ी सहजता से दर्शाती है। यह कविता गर्मियों की शुरुआत में बच्चों के मन में उमड़ते उत्साह

By Lotpot
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कविता “लो गरमी की छुट्टी आई” बच्चों के लिए एक सरल, शिक्षाप्रद और मनोरंजक रचना है, जो गर्मियों की छुट्टियों के माहौल को बड़ी सहजता से दर्शाती है। यह कविता गर्मियों की शुरुआत में बच्चों के मन में उमड़ते उत्साह और छुट्टी की मस्ती के बीच पढ़ाई की अहमियत को बड़े प्यारे ढंग से बताती है।

कविता की शुरुआत होती है जब छुट्टियाँ लगती हैं और बच्चे सोचते हैं कि अब तो सिर्फ खेलना और मिठाई खाना है। लेकिन रिंकी जैसी समझदार बच्ची उन्हें याद दिलाती है कि छुट्टियाँ सिर्फ मस्ती का समय नहीं, बल्कि पढ़ाई का भी एक सुनहरा मौका हैं। रिंकी की कथा और समझदारी से राहुल को यह बात समझ में आती है कि खेल और पढ़ाई दोनों में संतुलन ज़रूरी है।

यह कविता छोटे बच्चों को समय प्रबंधन, छुट्टियों में पढ़ाई का महत्व और अनुशासन जैसी मूलभूत बातें सिखाने का एक सुंदर माध्यम है। स्कूलों, समर कैंप्स और बाल साहित्य के लिए यह रचना बेहद उपयुक्त है। SEO के लिहाज़ से भी यह कविता उन शिक्षकों, अभिभावकों और ब्लॉगरों को आकर्षित करती है जो बच्चों की छुट्टियों से जुड़ा, शिक्षाप्रद और रोचक कंटेंट ढूंढते हैं।\

लो गरमी की छुट्टी आई

लो गरमी की छुट्टी आई,
छोड़ दो करना सभी पढ़ाई।
सुनकर रिंकी झट मुसकाई,
कहो ना ऐसा राहुल भाई।

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खेलो-कूदो, खाओ मिठाई,
सुबह-शाम हम करें पढ़ाई।
रिंकी ने फिर कथा सुनाई,
बात समझ में उसको आई।

हँसता-खेलता राहुल भाई,
करता है अब रोज़ पढ़ाई।

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