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“मेरा घर” एक भावनात्मक और सरल बाल कविता है, जो बच्चों के जीवन में घर के महत्व को बहुत ही सहज शब्दों में व्यक्त करती है। घर केवल चार दीवारों की संरचना नहीं होता, बल्कि वह जगह होती है जहाँ सुरक्षा, अपनापन और प्यार मिलता है। इस कविता में बच्चा अपने घर को सबसे प्यारा और सबसे खास बताता है, क्योंकि वही उसे धूप, ठंड और बारिश से बचाता है।
कविता बच्चों के मन में घर के प्रति कृतज्ञता और जुड़ाव की भावना पैदा करती है। नाना-नानी जैसे प्रिय रिश्तों का उल्लेख करते हुए भी बच्चा अपने घर को सबसे ज़्यादा प्यारा मानता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हर बच्चे के लिए उसका अपना घर सबसे सुरक्षित और सुकून देने वाली जगह होती है। यही भाव इस कविता को बेहद आत्मीय बनाता है।
यह कविता नर्सरी, केजी और प्राइमरी कक्षा के बच्चों के लिए उपयुक्त है। शिक्षक इसे कविता पाठ, चित्र-वर्णन, घर पर बोलना सीखना और भावनात्मक शिक्षा से जोड़कर पढ़ा सकते हैं। अभिभावक भी बच्चों को यह समझा सकते हैं कि घर का महत्व सिर्फ आराम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन की कठिन परिस्थितियों से भी बचाता है।
सरल भाषा, छोटी पंक्तियाँ और स्पष्ट भाव इस कविता को बच्चों के लिए यादगार बनाते हैं। “मेरा घर” बच्चों में सुरक्षा, अपनापन और पारिवारिक मूल्यों को मज़बूत करने वाली एक सुंदर बाल कविता है।
मेरा घर
मुझको लगता प्यारा घर,
सबसे न्यारा मेरा घर।
धूप, ठंड और वर्षा से,
मुझे बचाता मेरा घर।
नाना-नानी के घर से,
प्यारा मुझे है मेरा घर।
