/lotpot/media/media_files/2026/01/19/pushp-ki-abhilasha-hindi-kavita-2026-01-19-11-17-59.jpg)
“पुष्प की अभिलाषा” हिंदी साहित्य की एक अमर देशभक्ति कविता है, जिसे प्रसिद्ध कवि माखनलाल चतुर्वेदी ने लिखा है। यह कविता एक साधारण फूल की भावनाओं के माध्यम से त्याग, बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का गहरा संदेश देती है। कवि यहाँ फूल की इच्छा को प्रतीक बनाकर यह स्पष्ट करते हैं कि सच्चा सौंदर्य और गौरव दिखावे में नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए बलिदान में है।
इस कविता में पुष्प यह नहीं चाहता कि उसे आभूषणों, मालाओं या देवताओं के सिर पर सजाया जाए। उसकी सबसे बड़ी अभिलाषा यह है कि वह उस मार्ग पर बिछे, जहाँ से देश के वीर अपने प्राणों की आहुति देने जाते हैं। यह भावना युवाओं में देशप्रेम, कर्तव्यबोध और निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा जगाती है।
विद्यालयों में यह कविता बच्चों और किशोरों को यह समझाने के लिए पढ़ाई जाती है कि सच्चा सम्मान बाहरी प्रशंसा में नहीं, बल्कि राष्ट्र के हित में किए गए त्याग में है। सरल भाषा, गहन अर्थ और प्रभावशाली भाव इसे हिंदी पाठ्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कविताओं में शामिल करते हैं। आज भी यह कविता विद्यार्थियों और पाठकों के मन में देश के प्रति गर्व और समर्पण की भावना जगाती है।
पुष्प की अभिलाषा
चाह नहीं, मैं
सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ।
चाह नहीं, प्रेमी माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ।।
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर,
हे हरि! डाला जाऊँ।
चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ।।
मुझे तोड़ लेना, वनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक।
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक।।
-माखनलाल चतुर्वेदी
