/lotpot/media/media_files/2026/02/21/billu-ka-chakka-indoor-cricket-moral-story-hindi3-2026-02-21-17-34-02.jpg)
बिल्लू का छक्का: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की एक पुरानी सी कॉलोनी में 8 साल का एक बेहद चुलबुला बच्चा रहता था, जिसका नाम था 'बिल्लू'। बिल्लू के अंदर क्रिकेट (Cricket) का ऐसा जुनून था कि सोते-जागते, खाते-पीते उसे बस बैट और बॉल ही दिखाई देते थे। वह खुद को मोहल्ले का सूर्यकुमार यादव समझता था।
गर्मियों की छुट्टियों का दिन था। दोपहर की तेज धूप के कारण बिल्लू की मम्मी ने उसे बाहर खेलने जाने से मना कर दिया था। लेकिन बिल्लू का मन कहाँ मानने वाला था! उसने अपना प्लास्टिक का पीला बैट उठाया, एक पुरानी टेनिस बॉल ली और सीधे अपने दादाजी (जिन्हें वह बाबूजी कहता था) के कमरे में पहुँच गया।
"बाबूजी! चलिए न, मुझे थोड़ी सी बॉलिंग कराइए। आज तो मैं ऐसा बिल्लू का छक्का मारूंगा कि गेंद सीधे टीवी के पार जाएगी!" बिल्लू ने पूरे भौकाल में कहा।
/filters:format(webp)/lotpot/media/media_files/2026/02/21/billu-ka-chakka-indoor-cricket-moral-story-hindi-2026-02-21-17-34-02.jpg)
बाबूजी अपनी आरामकुर्सी पर अखबार पढ़ रहे थे। उन्होंने अपना चश्मा नाक के नीचे खिसकाया और आँखें तरेरते हुए बोले, "अरे लल्ला! दिमाग खराब हो गया है क्या? बैठक (ड्राइंग रूम) में कहीं क्रिकेट खेला जाता है? सामने नया स्मार्ट टीवी टंगा है, उधर फ्रिज रखा है। अगर तुम्हारी बॉल लग गई न, तो तुम्हारी मम्मी मेरा और तुम्हारा, दोनों का छक्का छुड़ा देंगी।"
नो एंट्री: न बैठक, न आँगन
बिल्लू ने थोड़ा मुँह फुलाया, "तो बाबूजी, बाहर आँगन (पार्किंग) में खेल लेते हैं। वहां तो कोई टीवी नहीं है।"
बाबूजी ने अखबार मोड़ते हुए कहा, "बेटा, आँगन में भी नो एंट्री है। वहां तुम्हारे पापा की नई कार और मेरा पुराना 'बजाज चेतक' स्कूटर खड़ा है। अगर तुम्हारी गेंद से गाड़ियों के शीशे (मिरर) चटक गए, तो फिर मरम्मत के पैसे क्या तुम्हारी गुल्लक से आएंगे?"
बिल्लू को लगा कि बाबूजी तो हर जगह बस बहाने बना रहे हैं। वह चिढ़कर बोला, "आप भी न बाबूजी, सीधे कह दो कि आपके घुटनों में दर्द है और आप खेल नहीं सकते। मैं खुद ही खेल लूँगा।" बाबूजी मुस्कुराए और उसे कमरे में खेलने से सख्त मना करके नहाने चले गए।
और फिर हुआ कांड!
बाबूजी के बाथरूम में घुसते ही बिल्लू का 'क्रिकेटर' जाग गया। उसने सोचा, "धीरे से मारूंगा, किसी को पता भी नहीं चलेगा।" उसने गेंद को हवा में उछाला और पूरे जोश के साथ बैट घुमा दिया।
ठहाक... छन्नन्न! एक ज़ोरदार आवाज़ आई। बिल्लू का शॉट सीधा टीवी के ऊपर रखे उस खूबसूरत चीनी मिट्टी के गमले पर लगा, जो उसकी मम्मी कल ही बाजार से लाई थीं। गमला ज़मीन पर गिरकर चकनाचूर हो गया।
बिल्लू के पसीने छूट गए। उसका सारा भौकाल हवा हो गया। जब बाबूजी नहाकर तौलिया लपेटे बाहर आए, तो उन्होंने देखा कि बिल्लू ज़मीन पर बैठा फेविकोल से गमले के टुकड़ों को जोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहा है।
"लग गया बिल्लू का छक्का? मैंने कहा था न कि अंदर मत खेलो!" बाबूजी ने सख्त आवाज़ में पूछा।
बिल्लू लगभग रोने वाली शक्ल बनाकर बाबूजी के पैरों से लिपट गया, "बाबूजी, मुझे बचा लो! मम्मी मुझे बहुत डांटेंगी। आप किसी को मत बताना। मैं कसम खाता हूँ, आज के बाद कभी घर के अंदर बैट नहीं उठाऊंगा।"
बाबूजी को अपने पोते की घबराई हुई शक्ल देखकर दया आ गई। उन्होंने कहा, "ठीक है, मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगा।"
झूठ की ढाल और बिल्लू की होशियारी
शाम को जब मम्मी ने चाय देते वक्त टूटा हुआ गमला देखा, तो पूरे घर में भूचाल आ गया। "ये मेरा सबसे महँगा गमला किसने तोड़ा?" मम्मी ने गुस्से में पूछा।
दादी ने बिल्लू की तरफ देखा, "बिल्लू, तू यहीं खेल रहा था न? तूने तोड़ा है क्या?"
बिल्लू ने बिना पलक झपकाए बहुत ही सफाई से झूठ बोल दिया, "नहीं दादी! मैंने नहीं तोड़ा। वो... पड़ोस वाली काली बिल्ली खिड़की से आई थी, उसी ने छलांग मारी और गमला गिर गया। मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है।"
बिल्लू ने देखा कि किसी ने उसे नहीं डांटा। सबने बिल्ली को कोसा और बात खत्म हो गई। बिल्लू मन ही मन अपनी होशियारी पर बहुत खुश हुआ। उसे लगा कि उसने कितना शानदार झूठ (Lie) बोलकर खुद को बचा लिया।
बाबूजी का मास्टरस्ट्रोक
रात को सोने से पहले बाबूजी ने बिल्लू को अपने पास बुलाया। बाबूजी ने बड़े ही शांत स्वर में कहा, "बिल्लू, आज शाम को जब तुम ट्यूशन गए थे, तो मैंने तुम्हारी मम्मी और दादी को सच बता दिया था कि गमला तुम्हारी गेंद से टूटा है। मैंने उनसे यह भी कह दिया था कि वो तुम्हें न डांटें।"
बिल्लू की आँखें फटी की फटी रह गईं। "क्या? आपने सबको सच बता दिया था? पर मुझे तो किसी ने कुछ नहीं कहा! और आपने तो मुझसे वादा किया था कि आप किसी को नहीं बताएंगे।"
बाबूजी ने प्यार से बिल्लू के सिर पर हाथ फेरा और प्रेरणादायक कहानी वाले अंदाज़ में समझाया, "लल्ला, जब तुमने मुझसे वादा लिया था, तब तुम डरे हुए थे। मुझे लगा तुम अपनी गलती समझ गए हो। लेकिन शाम को मैंने देखा कि तुम कितनी बेबाकी से सबके सामने बिल्ली का बहाना बनाकर झूठ बोल रहे थे। तुम्हारी आँखों में कोई पछतावा नहीं था।"
/filters:format(webp)/lotpot/media/media_files/2026/02/21/billu-ka-chakka-indoor-cricket-moral-story-hindi-2-2026-02-21-17-34-02.jpg)
बाबूजी ने आगे कहा, "गलती इंसान से ही होती है बेटा। अगर तुम सच बोल देते, तो शायद तुम्हें थोड़ी डांट पड़ती, लेकिन सबका तुम पर भरोसा बना रहता। आज तुमने एक टूटे गमले को छिपाने के लिए अपने परिवार का भरोसा तोड़ दिया। याद रखना, झूठ के पाँव नहीं होते, वह कभी न कभी पकड़ा ही जाता है।"
एक नई शुरुआत
बाबूजी की बातें बिल्लू के दिल में सीधे उतर गईं। उसे अपनी चालाकी पर शर्म आने लगी। उसे समझ आ गया कि सच्चाई और ईमानदारी से बढ़कर कोई होशियारी नहीं है।
बिल्लू तुरंत अपनी मम्मी के पास गया, उनके गले लगा और रोते हुए माफ़ी मांगी, "मम्मी, वो बिल्ली ने नहीं, मेरे छक्के ने गमला तोड़ा था। मुझे माफ़ कर दो, मैं अब कभी झूठ नहीं बोलूंगा।"
मम्मी ने मुस्कुराकर उसे गले लगा लिया। उस दिन के बाद से घर के अंदर कभी बिल्लू का छक्का नहीं लगा। अब वह रोज़ शाम को अपनी किट उठाकर बाहर मैदान में ही खेलने जाता था।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
सच बोलने की हिम्मत: गलती हो जाना आम बात है, लेकिन उसे झूठ बोलकर छिपाना सबसे बड़ी गलती है। सच बोलने से लोग हमेशा माफ़ कर देते हैं।
बड़ों की सलाह मानें: घर के बड़े अगर किसी काम के लिए मना करते हैं, तो उसमें हमारा ही भला छिपा होता है।
जगह का चुनाव: खेलने-कूदने के लिए सही जगह (जैसे मैदान या पार्क) का ही इस्तेमाल करना चाहिए ताकि घर का नुकसान न हो।
Read More:-
बंदा हाज़िर हो: गप्पू की अति-उत्साही और चटपटी दास्तान
तेनाली रमन और अंगूठी चोर: जादुई संदूक का कमाल
