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तेनाली रमन और अंगूठी चोर: जादुई संदूक का कमाल

पढ़ें तेनाली रमन और अंगूठी चोर की मजेदार कहानी। जानें कैसे तेनाली ने अपनी चतुराई और एक 'जादुई संदूक' से राजा कृष्णदेवराय की खोई हुई अंगूठी ढूंढी।

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विजयनगर की शान और तेनाली का दिमाग

प्यारे बच्चों! क्या आपने कभी ऐसे इंसान के बारे में सुना है जिसके पास हर समस्या का समाधान होता है? जो अपनी बातों से किसी को भी हँसा सकता है और बड़े से बड़े अपराधी को अपनी अक्ल से पकड़ सकता है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं तेनाली रमन (Tenali Raman) की!

दक्षिण भारत में एक बहुत ही प्रसिद्ध साम्राज्य था—विजयनगर। वहाँ के राजा थे कृष्णदेवराय। राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार के नवरत्नों से बहुत प्यार करते थे, लेकिन तेनाली रमन उनके सबसे चहेते थे। तेनाली रमन न केवल एक महान कवि थे, बल्कि वे अपनी हाजिरजवाबी और बुद्धिमानी के लिए भी मशहूर थे।

लॉटपॉट.कॉम (Lotpot.com) पर आज हम आपके लिए तेनाली रमन का एक ऐसा किस्सा लेकर आए हैं, जिसे पढ़कर आप अपनी हँसी नहीं रोक पाएंगे। यह कहानी है—तेनाली रमन और अंगूठी चोर की।

राजा की बेशकीमती अंगूठी

एक दिन दरबार लगा हुआ था। राजा कृष्णदेवराय बहुत खुश नज़र आ रहे थे। उन्होंने अपनी उंगली में एक नई और बेहद खूबसूरत हीरे की अंगूठी पहन रखी थी। वह अंगूठी इतनी चमकदार थी कि उसकी रोशनी से पूरा दरबार जगमगा रहा था।

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राजा ने गर्व से अपना हाथ ऊपर उठाया और बोले, "दरबारी गण! देखो, यह अंगूठी हमें हमारे पड़ोसी राज्य के राजा ने उपहार में दी है। इसमें लगा हीरा दुनिया के सबसे नायब हीरों में से एक है। यह हमें हमारे प्राणों से भी ज्यादा प्यारी है।"

सभी दरबारी अंगूठी की तारीफ करने लगे। तेनाली रमन ने भी मुस्कुराते हुए कहा, "महाराज, यह अंगूठी सचमुच अद्भुत है, बिल्कुल आपके शाही तेज की तरह!"

उस दिन के बाद, राजा उस अंगूठी को एक पल के लिए भी खुद से अलग नहीं करते थे। रात को सोते समय वे उसे अपने तकिए के नीचे रखकर सोते थे।

अचानक हुआ एक बड़ा हादसा

कुछ दिनों बाद, एक सुबह जब राजा कृष्णदेवराय सोकर उठे, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने देखा कि तकिए के नीचे वह अंगूठी नहीं थी!

उन्होंने बिस्तर झाड़ा, कमरे का कोना-कोना छान मारा, लेकिन अंगूठी कहीं नहीं मिली। राजा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने तुरंत अपने 12 सबसे खास अंगरक्षकों (Bodyguards) को बुलाया।

राजा गरजे, "मेरी अंगूठी कल रात मेरे कमरे से चोरी हो गई है! और मेरे कमरे में तुम 12 अंगरक्षकों के अलावा कोई और प्रवेश नहीं कर सकता। इसका मतलब है कि चोर तुम में से ही कोई एक है!"

सारे अंगरक्षक डर के मारे कांपने लगे। वे सब राजा के बहुत पुराने सेवक थे और उन्होंने कभी कोई चोरी नहीं की थी। लेकिन सबूत उनके खिलाफ था। राजा ने हुक्म दिया, "अगर शाम तक चोर का पता नहीं चला, तो मैं तुम बारहों को कालकोठरी में डाल दूंगा!"

तेनाली रमन की एंट्री

पूरे महल में हड़कंप मच गया। सिपाही निर्दोष थे, लेकिन चोर को कैसे पकड़े? अंत में, हमेशा की तरह, राजा ने तेनाली रमन को याद किया।

राजा ने कहा, "तेनाली! अब तुम ही हमारी मदद कर सकते हो। हमें वह अंगूठी और वह चोर, दोनों चाहिए। यह तेनाली रमन और अंगूठी चोर का मामला तुम्हें ही सुलझाना है।"

तेनाली रमन ने उन 12 अंगरक्षकों के चेहरों को गौर से देखा। सब डरे हुए थे। तेनाली समझ गया कि चोर बहुत चालाक है, उसे डराकर नहीं, बल्कि दिमाग से पकड़ना होगा।

तेनाली ने मुस्कुराते हुए कहा, "महाराज, आप चिंता न करें। चोर कहीं बाहर का नहीं है, और मैं उसे बिना किसी मार- पिटाई के पकड़ लूंगा। बस मुझे कुछ समय और एक पुरानी, अंधेरी कोठरी चाहिए।"

राजा ने पूछा, "अंधेरी कोठरी? उसका क्या करोगे?" तेनाली बोला, "वही तो मेरा जादू है महाराज!"

जादुई संदूक और तेनाली की योजना

तेनाली रमन ने महल के एक पुराने कमरे में एक बड़ा सा संदूक (Box) रखवाया। उस कमरे में घुप अंधेरा कर दिया गया। फिर तेनाली ने दरबार में ऐलान किया।

"सुनो! सुनो! सुनो! मैंने उस कमरे में एक 'जादुई संदूक' रखा है। उस संदूक में एक दिव्य शक्ति है। जो कोई भी उस संदूक को छूकर सच बोलेगा, उसे कुछ नहीं होगा। लेकिन अगर चोर ने उस संदूक को छुआ, तो संदूक के अंदर से एक जादुई आवाज़ आएगी और चोर का हाथ वहीं चिपक जाएगा!"

सभी 12 अंगरक्षकों को लाइन में खड़ा किया गया। तेनाली ने कहा, "तुम सबको एक-एक करके उस अंधेरे कमरे में जाना है, उस जादुई संदूक पर दोनों हाथ रखने हैं और कहना है—'मैंने चोरी नहीं की'। फिर बाहर आ जाना है।"

दरबार में सन्नाटा छा गया। सबको लगा कि आज तो चोर पकड़ा ही जाएगा।

चोर की होशियारी या बेवकूफी?

एक-एक करके सारे अंगरक्षक उस अंधेरे कमरे में गए। पहला अंगरक्षक गया... कुछ देर बाद वापस आया। दूसरा गया... वापस आया। तीसरा, चौथा... और ऐसे ही बारहों अंगरक्षक कमरे के अंदर गए और बाहर आ गए।

हैरानी की बात यह थी कि किसी के भी अंदर जाने पर संदूक से कोई आवाज़ नहीं आई और न ही किसी का हाथ चिपका। राजा कृष्णदेवराय गुस्से में बोले, "तेनाली! तुम्हारा जादू तो फेल हो गया! चोर ने संदूक छुआ और उसे कुछ नहीं हुआ।"

तेनाली रमन ज़ जोर से हँसा, "नहीं महाराज! मेरा जादू कभी फेल नहीं होता। चोर पकड़ा जा चुका है।"

राजा ने पूछा, "क्या मतलब? कौन है चोर?"

तेनाली ने कहा, "सैनिकों! इन बारहों अंगरक्षकों को एक कतार में खड़ा करो और इनसे कहो कि अपने-अपने दोनों हाथ आगे फैलाएं।"

तेनाली ने किया पर्दाफाश

जैसे ही बारहों सिपाहियों ने अपने हाथ आगे किए, तेनाली रमन एक-एक करके सबके हाथों को सूंघने और देखने लगा। ग्यारह सिपाहियों के हाथ काले थे और उनमें से अजीब सी गंध आ रही थी। लेकिन एक सिपाही, जो सातवें नंबर पर खड़ा था, उसके हाथ बिल्कुल साफ-सुथरे और गोरे थे।

तेनाली ने तुरंत उस सातवें सिपाही का हाथ पकड़ा और राजा के सामने ले गया। "महाराज! यही है आपका अंगूठी चोर!"

सिपाही घबरा गया, "नहीं-नहीं हुज़ूर! मेरे हाथ तो साफ हैं, मैंने तो कुछ किया ही नहीं!"

राजा ने हैरान होकर पूछा, "तेनाली, तुम यह कैसे कह सकते हो? इसके हाथ तो सबसे साफ हैं।"

तेनाली ने रहस्य खोला, "महाराज, उस कमरे में कोई जादू नहीं था। मैंने उस संदूक के ऊपर ढेर सारी 'कालिख' (Soot/Black Powder) और इत्र लगा दिया था। जो निर्दोष थे, उन्हें डर नहीं था, इसलिए उन्होंने आदेश का पालन किया और संदूक को छुआ, जिससे उनके हाथ काले हो गए। लेकिन यह चोर डर गया था। इसे लगा कि अगर इसने संदूक छुआ, तो सचमुच इसका हाथ चिपक जाएगा। इसलिए इसने अंधेरे का फायदा उठाया और संदूक को छुआ ही नहीं! बस ऐसे ही बाहर आ गया। इसके साफ हाथ ही इसके जुर्म का सबूत हैं।"

चोर की माफी और तेनाली का इनाम

चोर सिपाही तेनाली की बात सुनकर रोने लगा और उसने राजा के पैरों में गिरकर अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि लालच में आकर उसने अंगूठी चुराकर अस्तबल में छिपा दी थी।

सैनिकों ने तुरंत जाकर अंगूठी बरामद कर ली। राजा अपनी अंगूठी वापस पाकर बहुत खुश हुए। उन्होंने उस चोर सिपाही को नौकरी से निकाल दिया और जेल भेज दिया।

इसके बाद राजा ने तेनाली रमन को गले लगा लिया। उन्होंने अपनी वही बेशकीमती हीरे की अंगूठी निकालकर तेनाली को इनाम में दे दी।

तेनाली ने हाथ जोड़कर कहा, "महाराज, आपकी खुशी ही मेरा सबसे बड़ा इनाम है।" पूरा दरबार "तेनाली रमन की जय!" के नारों से गूंज उठा।

निष्कर्ष: कहानी की सीख

प्यारे बच्चों, तेनाली रमन और अंगूठी चोर की यह कहानी हमें बहुत कुछ सिखाती है:

  1. चोरी कभी छिपती नहीं: अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो, वह कोई न कोई निशान जरूर छोड़ देता है।

  2. डर चोर की कमजोरी है: चोर के मन में हमेशा पकड़े जाने का डर रहता है, और यही डर उसे गलती करने पर मजबूर करता है।

  3. बुद्धि का प्रयोग: तेनाली ने बिना किसी हिंसा या मार-पिटाई के, सिर्फ अपनी अक्ल (Wit) का इस्तेमाल करके समस्या सुलझा दी।

तो अगली बार जब कोई मुसीबत आए, तो घबराना मत, बस तेनाली रमन की तरह ठंडे दिमाग से सोचना!

विकिपीडिया लिंक (Wikipedia Link)

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लेखक: लॉटपॉट.कॉम संपादकीय टीम

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