Advertisment

चोर की दाढ़ी में तिनका: शरारती बच्चों का राज़ - मजेदार कहानी

क्या आपने 'चोर की दाढ़ी में तिनका' कहावत सुनी है? जानिए कैसे मास्टरजी ने अपनी अक्ल से शरारती राजू और बबलू की चोरी पकड़ी। बच्चों की मज़ेदार कहानी।

New Update
chor-ki-dadhi-mein-tinka-hindi-story-3
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

चोर की दाढ़ी में तिनका: बच्चों, आपने अपने घर में दादा-दादी या नाना-नानी को अक्सर बात-बात में मुहावरे और कहावतें बोलते हुए सुना होगा। हिंदी भाषा में मुहावरा (Idiom) और लोकोक्तियाँ बातों का मज़ा दोगुना कर देते हैं। ऐसी ही एक बहुत मशहूर कहावत है—"चोर की दाढ़ी में तिनका"

इसका मतलब यह नहीं है कि चोर की सचमुच कोई दाढ़ी होती है और उसमें तिनका फँसा होता है। इसका असली मतलब यह है कि जो इंसान कोई गलत काम या चोरी करता है, उसके मन में हमेशा एक डर बना रहता है, और उसी डर की वजह से वह खुद ही अपनी चोरी पकडवा देता है। आज हम आपको इसी कहावत पर आधारित एक बहुत ही मज़ेदार कहानी सुनाने जा रहे हैं।

यह कहानी है 'आनंदपुर' गाँव के एक छोटे से स्कूल की, जहाँ दो पक्के दोस्त पढ़ते थे—'राजू' और 'बबलू'। ये दोनों पूरे स्कूल में अपनी शरारतों के लिए मशहूर थे।

मास्टरजी के खास बेसन के लड्डू

आनंदपुर के स्कूल में 'रमाकांत' नाम के एक बहुत ही सख्त लेकिन प्यार करने वाले मास्टरजी पढ़ाते थे। मास्टरजी अनुशासन (Discipline) के बहुत पक्के थे। एक दिन मास्टरजी के घर में पूजा थी, तो उनकी पत्नी ने उनके लिए एक बड़े से डिब्बे में शुद्ध देसी घी के बेसन के लड्डू बाँधकर दिए थे।

Advertisment

मास्टरजी जब स्कूल आए, तो उन्होंने वह लड्डुओं का डिब्बा अपनी मेज (Desk) पर रख दिया और बच्चों को पढ़ाने लगे। पूरे कमरे में देसी घी और इलायची की इतनी अच्छी खुशबू फैल गई कि सारे बच्चों के मुंह में पानी आ गया। खासकर राजू और बबलू का तो पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लग रहा था। उनकी नज़रें बार-बार उस लाल रंग के डिब्बे पर जा रही थीं।

"यार बबलू, खुशबू तो बड़ी गज़ब की आ रही है," राजू ने फुसफुसाते हुए कहा। बबलू ने होंठों पर जीभ फेरते हुए जवाब दिया, "हाँ भाई! अगर एक लड्डू चखने को मिल जाए, तो मज़ा ही आ जाए।"

लंच ब्रेक और डब्बा गोल!

chor-ki-dadhi-mein-tinka-hindi-story-2

थोड़ी देर बाद 'टन-टन-टन' स्कूल की घंटी बजी और लंच ब्रेक (Recess) हो गया। सारे बच्चे और मास्टरजी बाहर मैदान में चले गए। लेकिन राजू और बबलू चुपके से क्लासरूम में ही रुक गए।

यह उनके लिए साहस दिखाने का नहीं, बल्कि खुराफात करने का समय था। दोनों दबे पांव मास्टरजी की मेज के पास गए। राजू ने धीरे से लाल डिब्बे का ढक्कन खोला। अंदर गोल-गोल, सुनहरे बेसन के लड्डू रखे थे, जिन पर काजू और बादाम चिपके हुए थे।

"बस एक-एक खाते हैं, मास्टरजी को पता नहीं चलेगा," बबलू ने कहा। लेकिन लड्डू इतने स्वादिष्ट थे कि एक खाने के बाद वे रुके ही नहीं। देखते ही देखते उन दोनों ने आधा डिब्बा खाली कर दिया! इसके बाद उन्होंने जल्दी से डिब्बा बंद किया, अपने मुंह को पानी से धोया और ऐसे सीधे-सादे बच्चे बनकर मैदान में खेलने चले गए, जैसे उन्होंने कुछ किया ही न हो।

क्लास में पूछताछ और भारी सन्नाटा

लंच खत्म होने के बाद जब मास्टरजी वापस क्लास में आए, तो उन्होंने सोचा कि अब एक लड्डू खाकर पानी पी लिया जाए। जैसे ही उन्होंने डिब्बा खोला, उनके होश उड़ गए। डिब्बे के आधे लड्डू गायब थे!

मास्टरजी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उन्होंने अपनी छड़ी (Stick) मेज पर ज़ोर से पटकी। ठकाऽऽक! पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया। सब बच्चे डर के मारे सहम गए।

"यह डिब्बा किसने खोला?" मास्टरजी ने कड़कती आवाज़ में पूछा। "मेरे मेज से लड्डू किसने चुराए हैं?" किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। राजू और बबलू तो सिर झुकाकर ऐसे बैठे थे मानो वे दुनिया के सबसे शरीफ और सीधे बच्चे हों। उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी।

मास्टरजी ने एक-एक करके सभी बच्चों से पूछा, लेकिन सबने मना कर दिया। मास्टरजी बहुत समझदार थे। वे समझ गए कि चोर इसी क्लास में बैठा है, बस उसे पकड़ने के लिए कोई दिमागी चाल चलनी होगी।

मास्टरजी की चालाकी: 'चोर की दाढ़ी में तिनका'

मास्टरजी ने अपना गुस्सा शांत किया और चेहरे पर एक रहस्यमयी (Mysterious) मुस्कान ले आए। उन्होंने बच्चों की तरफ देखते हुए कहा, "बच्चों! मुझे पता चल गया है कि लड्डू किसने खाए हैं।"

सारे बच्चे हैरान होकर मास्टरजी को देखने लगे। राजू और बबलू की धड़कनें थोड़ी तेज़ हो गईं, लेकिन उन्होंने अपने चेहरे पर कोई भाव नहीं आने दिया।

मास्टरजी ने अपनी चाल चलते हुए एक गप्प (Fake Story) गढ़ी। उन्होंने कहा, "बच्चों, तुम्हें पता नहीं है कि वो कोई मामूली लड्डू नहीं थे। वे पूजा के सिद्ध किए हुए जादुई लड्डू थे! उन लड्डुओं की खासियत यह है कि जो भी उन्हें बिना पूछे चुराकर खाता है, उसके चेहरे पर, खासकर उसकी ठुड्डी (Chin) पर, एक सफेद रंग का तिनका (Straw) चिपक जाता है। और वह तिनका सबको दिखाई देता है!"

यह बात सुनकर राजू और बबलू के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उनके दिमाग में खतरे की घंटी बजने लगी। उन्हें लगा कि शायद सचमुच उनके चेहरे पर कोई तिनका या बेसन का टुकड़ा चिपक गया है और मास्टरजी ने उसे देख लिया है।

राज़ खुला और पकड़ी गई चोरी

घबराहट के मारे राजू और बबलू ने बिना कुछ सोचे-समझे, जल्दी से अपने-अपने हाथों से अपनी ठुड्डी (Chin) और मुँह को पोंछना शुरू कर दिया। वे बार-बार हाथ फेर कर चेक कर रहे थे कि कहीं कोई तिनका तो नहीं चिपका है।

मास्टरजी की पैनी नज़रें पूरी क्लास पर थीं। जैसे ही उन्होंने राजू और बबलू को अपना मुँह पोंछते हुए देखा, वे ज़ोर से हँस पड़े। "राजू! बबलू! खड़े हो जाओ!" मास्टरजी ने आवाज़ लगाई।

दोनों कांपते हुए अपनी जगह पर खड़े हो गए। मास्टरजी ने कहा, "मैंने तो सिर्फ एक झूठ बोला था कि लड्डू जादुई हैं और चोर के चेहरे पर तिनका चिपक जाता है। अगर तुमने लड्डू नहीं खाए थे, तो तुम दोनों डर के मारे अपनी ठुड्डी क्यों पोंछ रहे थे?"

chor-ki-dadhi-mein-tinka-hindi-story-1

राजू और बबलू की चोरी पकड़ी गई। उनका सारा भौकाल हवा हो गया। पूरी क्लास उन पर हँसने लगी। दोनों ने सिर झुकाकर अपनी गलती मान ली। "हमें माफ़ कर दीजिए मास्टरजी। लालच में आकर हमने आपके लड्डू खा लिए थे। हम आगे से कभी चोरी नहीं करेंगे।"

मास्टरजी ने उन्हें डांटने के बजाय समझाया, "बच्चों, इसे ही कहते हैं—चोर की दाढ़ी में तिनका! इंसान लाख झूठ बोले, लेकिन उसका अपना डर ही उसकी चोरी पकड़वा देता है। चोरी करना बहुत बुरी आदत है। अगर तुमने मुझसे मांग लिया होता, तो मैं खुशी-खुशी तुम्हें लड्डू दे देता।"

उस दिन के बाद से राजू और बबलू ने कभी किसी की चीज़ को बिना पूछे हाथ नहीं लगाया। बच्चों, लोटपोट की ये हिंदी कहानियां हमें हंसते-खेलते बहुत बड़ी सीख दे जाती हैं।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  • डर सच उगलवा देता है: जब हम कोई गलत काम करते हैं, तो हमारे मन में हमेशा पकड़े जाने का डर रहता है (चोर की दाढ़ी में तिनका)।

  • ईमानदारी अपनाएं: चोरी करना या बिना पूछे किसी की चीज़ लेना गलत है।

  • अक्ल का इस्तेमाल: मास्टरजी की तरह अगर हम समझदारी से काम लें, तो बड़ी से बड़ी समस्या या रहस्य को बिना डंडे के भी सुलझाया जा सकता है।

Read More:-

बंदा हाज़िर हो: गप्पू की अति-उत्साही और चटपटी दास्तान

तेनाली रमन और अंगूठी चोर: जादुई संदूक का कमाल

छुपे चोर का पर्दाफाश: नन्हे जासूसों का कमाल

जो जीता वही सिकंदर: भोलूराम और गोलगप्पापुर की महा-रेस  

Advertisment