Advertisment

जादुई टीवी: आर्यन और सुपरहीरो की सीख - हिंदी कहानी

क्या हुआ जब टीवी के अंदर से एक सुपरहीरो बाहर आ गया? पढ़िए जादुई टीवी और नटखट आर्यन की मजेदार कहानी, जो स्क्रीन टाइम कम करने की सीख देती है। Fun Stories | Moral Stories

New Update
jadui-tv-aur-aaryan-ki-seekh-moral-story-hindi-3
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

जादुई टीवी: एक खूबसूरत शहर 'आनंदनगर' में आर्यन नाम का एक बहुत ही नटखट लड़का रहता था। आर्यन कक्षा दो में पढ़ता था, लेकिन उसके नखरे किसी राजा-महाराजा से कम नहीं थे। स्कूल जाने के नाम पर वह पूरे घर को सिर पर उठा लेता था। लंच बॉक्स में भी उसे रोज़ नए पकवान चाहिए होते थे—कभी पास्ता, तो कभी चीज़ सैंडविच। लेकिन आर्यन की सबसे बड़ी बीमारी कुछ और ही थी, और वह थी टेलीविज़न (Television) देखने की बुरी लत।

आर्यन की दो बड़ी बहनें भी थीं—रिया और सिया। ये तीनों भाई-बहन जब घर में होते, तो घर किसी युद्ध के मैदान जैसा लगता था। स्कूल से आते ही आर्यन का बस्ता सोफे पर उड़ता हुआ जाता और वह सीधा टीवी के सामने रिमोट लेकर बैठ जाता। उसका सबसे पसंदीदा कार्टून था—"सुपरहीरो वायु"।

घर वालों की परेशानी

jadui-tv-aur-aaryan-ki-seekh-moral-story-hindi-1

आर्यन और उसकी बहनों को टीवी देखने का इतना शौक था कि उन्हें खाने-पीने की भी सुध नहीं रहती थी। टीवी का रिमोट हमेशा आर्यन के हाथ में होता, जैसे वह कोई बंदूक लेकर सीमा पर पहरा दे रहा हो।

इस जादुई टीवी के चक्कर में पूरे घर वाले परेशान थे:

  • पापा: बेचारे दिन भर ऑफिस में काम करते और शाम को समाचार या क्रिकेट मैच देखना चाहते, लेकिन आर्यन उन्हें रिमोट छूने भी नहीं देता।

  • मम्मी: मम्मी का पसंदीदा कुकिंग शो हमेशा छूट जाता था।

  • दादा-दादी: दादाजी को देश-दुनिया की खबरें देखनी होती थीं और दादीजी को शाम के वक्त भजन सुनने होते थे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। जब आर्यन अपने मम्मी-पापा की ही नहीं सुनता था, तो दादा-दादी की बात तो बहुत दूर थी।

Advertisment

जब भी कोई आर्यन से रिमोट माँगता, वह ज़ोर-ज़ोर से रोने का नाटक शुरू कर देता। उसकी कान फाड़ू रुलाई से डरकर सब हार मान लेते थे। घर में अक्सर मजेदार कहानियां पढ़ने के बजाय, सिर्फ टीवी का ही शोर गूंजता रहता था।

दादाजी झुंझला कर कहते, "पता नहीं इन बच्चों को इस टीवी में क्या मज़ा आता है! हमारी तो भजन सुनने की किस्मत ही फूट गई है।"

एक अनोखी घटना: टीवी से बाहर आया हाथ!

रविवार का दिन था। आर्यन, रिया और सिया, तीनों एक साथ टीवी से चिपक कर "सुपरहीरो वायु" का शो देख रहे थे। आर्यन के हाथ में पॉपकॉर्न का बड़ा सा बाउल था और उसकी आँखें बिना झपकाए स्क्रीन पर गड़ी थीं।

अचानक टीवी की स्क्रीन में एक अजीब सी चमक उठी। स्क्रीन की नीली रोशनी बहुत तेज़ हो गई और कमरे में हवा चलने लगी। आर्यन ने अपनी आँखें मलीं। उसे लगा शायद उसकी आँखें थक गई हैं।

लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी! जादुई टीवी की स्क्रीन पानी की तरह हिलने लगी और उसमें से 'सुपरहीरो वायु' का एक बड़ा सा हाथ बाहर निकल आया! उस हाथ ने आर्यन के हाथ से पॉपकॉर्न का बाउल छीन लिया और फिर हल्के से आर्यन का कान पकड़ लिया।

"अरे-अरे! यह क्या हो रहा है! बचाओ!" आर्यन डर के मारे सोफे के पीछे दुबकने लगा। रिया और सिया भी डर कर चिल्लाने लगीं।

सुपरहीरो की फटकार और सीख

सुपरहीरो वायु का पूरा चेहरा टीवी की स्क्रीन से बाहर झांकने लगा। वह आर्यन को घूरते हुए बोला, "आर्यन! मैं तुमसे बहुत नाराज़ हूँ। मैं तुम्हारा दोस्त नहीं हूँ!"

आर्यन कांपते हुए बोला, "प..प..पर वायु भैया, मैंने क्या किया है? मैं तो आपका सबसे बड़ा फैन हूँ। मैं तो दिन भर आपका ही शो देखता हूँ।"

वायु ने कड़क आवाज़ में कहा, "यही तो तुम्हारी सबसे बड़ी गलती है! तुम दिन भर टीवी से चिपके रहते हो। बाहर जाकर मैदान में पसीना नहीं बहाते। क्या तुम्हें पता है, असली सुपरहीरो वो होता है जो बाहर जाकर खेलता है, स्वस्थ खाना खाता है और अपने बड़ों की बात मानता है!"

रिया और सिया भी डर कर खड़ी थीं। वायु ने उनकी तरफ देखते हुए कहा, "और तुम दोनों भी सुन लो! टीवी ज्यादा देखने से तुम्हारी आँखें खराब हो रही हैं। तुम अपने मम्मी-पापा और दादा-दादी को बहुत परेशान करती हो। क्या तुम्हें नहीं लगता कि उन्हें भी अपना पसंदीदा कार्यक्रम देखने का हक है?"

यह एक ऐसी शिक्षाप्रद कहानी बन रही थी जिसे बच्चे कभी भूलने वाले नहीं थे।

बच्चों का वादा

jadui-tv-aur-aaryan-ki-seekh-moral-story-hindi-2

आर्यन को अपनी गलती का अहसास होने लगा। उसने सिर झुकाकर कहा, "सॉरी वायु भैया। हमें टीवी देखने में बहुत मज़ा आता है, इसलिए हम रिमोट नहीं छोड़ते।"

वायु ने मुस्कुराते हुए समझाया, "मज़ा आना अच्छी बात है बच्चों, लेकिन हर चीज़ की एक सीमा होती है। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि 'अति' किसी भी चीज़ की बुरी होती है। अगर तुम सारा दिन सिर्फ कार्टून देखोगे, तो तुम्हारी बुद्धि का विकास कैसे होगा? तुम्हें लोटपोट की अच्छी-अच्छी हिंदी कहानियां पढ़नी चाहिए और बड़ों का सम्मान करना चाहिए।"

"अब तुम तीनों मुझसे प्रॉमिस करो," वायु ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा, "कि आज से तुम टीवी देखने का एक समय तय करोगे। पापा को न्यूज़ देखने दोगे और शाम को दादी को भजन ज़रूर सुनने दोगे।"

"प्रॉमिस वायु भैया! पक्का वाला प्रॉमिस!" आर्यन, रिया और सिया ने एक साथ चिल्लाकर कहा।

"और हाँ," वायु ने टीवी के अंदर जाते-जाते शरारत से कहा, "अगर तुमने अपना वादा तोड़ा, तो अगली बार मैं अपने साथ 'भयंकर दानव' को भी ले आऊँगा!"

"नहीं-नहीं! हम वादा निभाएंगे!" तीनों बच्चे घबराकर बोले।

निष्कर्ष: सुधर गया आर्यन

उस दिन के बाद से आनंदनगर के उस घर का नज़ारा पूरी तरह बदल गया। आर्यन ने अपना स्क्रीन टाइम बहुत कम कर दिया। अब वह शाम को पार्क में फुटबॉल खेलने जाता था।

शाम के सात बजते ही आर्यन खुद टीवी का रिमोट अपनी दादी के हाथों में थमा देता और कहता, "दादीजी, जल्दी से अपने भजन लगा लीजिए।" पापा भी आराम से न्यूज़ देखते और मम्मी अपने कुकिंग शो देखकर आर्यन के लिए नए-नए पकवान बनातीं।

यह जादुई टीवी का कमाल था या सुपरहीरो की सीख, लेकिन अब घर में शांति थी। कभी-कभी आर्यन का मन ज़्यादा टीवी देखने को करता, लेकिन उसे तुरंत 'भयंकर दानव' की याद आ जाती और वह टीवी बंद करके अपनी किताबों में लग जाता।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  1. समय सीमा (Screen Time): हमें टीवी, मोबाइल या वीडियो गेम्स एक निश्चित समय तक ही देखने चाहिए। ज्यादा टीवी देखने से आँखें और दिमाग दोनों कमज़ोर होते हैं।

  2. बड़ों का सम्मान: घर की चीज़ों पर सबका समान अधिकार है। हमें अपने माता-पिता और दादा-दादी की पसंद का भी सम्मान करना चाहिए।

  3. मैदानी खेल (Outdoor Games): शारीरिक और मानसिक विकास के लिए टीवी के सामने बैठने से ज्यादा अच्छा बाहर मैदान में खेलना है।

Read More:-

बंदा हाज़िर हो: गप्पू की अति-उत्साही और चटपटी दास्तान

तेनाली रमन और अंगूठी चोर: जादुई संदूक का कमाल

छुपे चोर का पर्दाफाश: नन्हे जासूसों का कमाल

जो जीता वही सिकंदर: भोलूराम और गोलगप्पापुर की महा-रेस 

Advertisment