राजा और तेनाली की चतुराई: एक मज़ेदार कहानी

राजा और तेनाली की चतुराई: एक मज़ेदार कहानी :- यह बेस्ट हिंदी स्टोरी राजा कृष्णदेव राय और तेनाली राम की चतुराई की है। एक दरबारी, मंगलदास, ने लाल रंग का मोर बनाकर राजा को धोखा दिया और पच्चीस हजार रुपये लिए। तेनाली ने इस चाल को पकड़ा

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राजा और तेनाली की चतुराई: एक मज़ेदार कहानी :- यह बेस्ट हिंदी स्टोरी राजा कृष्णदेव राय और तेनाली राम की चतुराई की है। एक दरबारी, मंगलदास, ने लाल रंग का मोर बनाकर राजा को धोखा दिया और पच्चीस हजार रुपये लिए। तेनाली ने इस चाल को पकड़ा और चार बेहतर लाल मोर लाकर सच्चाई सामने लाई। मंगलदास को सजा मिली, और चित्रकार को सम्मान। यह कहानी सच्चाई और चतुराई का प्रतीक है।

राजा और तेनाली की चतुराई: एक प्रेरक हिंदी कथा

विजयनगर के महान राजा कृष्णदेव राय अपने दरबार में अनोखी और दुर्लभ वस्तुओं के संग्रह के लिए प्रसिद्ध थे। वे हर अनोखी चीज देखकर खुश हो जाते थे, और उनके दरबारी इस शौक का फायदा उठाने में पीछे नहीं रहते थे। हर दरबारी अपनी बुद्धि और चालाकी से कुछ न कुछ नया लेकर आता, ताकि राजा की प्रसन्नता पाकर सम्मान और धन दोनों हासिल कर सके। एक दिन एक चतुर दरबारी, जिसका नाम था मंगलदास, ने एक अनूठी योजना बनाई।

मंगलदास ने एक स्थानीय रंग विशेषज्ञ को बुलाया और उससे एक साधारण मोर को लाल रंग से रंगवाने को कहा। जब काम पूरा हुआ, तो वह लाल मोर को लेकर सीधे राजा के दरबार में पहुँचा। उसने जोर से कहा, "महाराज, मैंने मध्य प्रदेश के गहरे जंगलों से आपके लिए एक अद्भुत और दुर्लभ लाल मोर ढूंढ निकाला है।" राजा कृष्णदेव राय ने मोर को ध्यान से देखा और आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने पूछा, "यह तो वाकई अनोखा है! लाल मोर? सचमुच, तुमने हमारे लिए कुछ खास लाया है। इसे हम राष्ट्रीय उद्यान में सुरक्षित रखवाएंगे। अब बताओ, इसकी खोज में कितना खर्च हुआ?"

मंगलदास ने अपनी चालाकी छिपाते हुए विनम्र स्वर में कहा, "महाराज, आपके लिए यह अनमोल वस्तु लाने के लिए मैंने अपने दो विश्वसनीय सेवकों को देश भर में भेजा। वे सालों तक जंगलों में भटके, और आखिरकार मध्य प्रदेश में यह लाल मोर मिला। इस मिशन पर मुझे लगभग पच्चीस हजार रुपये खर्च करने पड़े।" राजा ने तुरंत अपने मंत्री को आदेश दिया, "मंत्री जी, इस दरबारी को राजकोष से पच्चीस हजार रुपये दे दिए जाएँ।" फिर उन्होंने मंगलदास से कहा, "यह तुम्हारे खर्च का पैसा है। इसके अलावा एक सप्ताह बाद तुम्हें और पुरस्कार भी मिलेगा।"

मंगलदास की आँखों में चमक आ गई। वह तेनाली राम की ओर कुटिल मुस्कान के साथ देखने लगा, मानो कह रहा हो कि उसने बाजी मार ली। तेनाली राम, जो दरबार में हमेशा सतर्क रहते थे, ने इस मुस्कान का मतलब भाँप लिया। उन्हें शक हुआ कि लाल मोर की कहानी में कुछ गड़बड़ है। उन्होंने सोचा, "लाल मोर? ऐसा तो प्रकृति में संभव नहीं। यह जरूर किसी चाल का हिस्सा है।" लेकिन उस समय चुप रहना ही बेहतर समझा।

अगले दिन तेनाली राम ने अपनी जासूसी शुरू की। उन्होंने गुप्त सूचना के आधार पर उस रंग विशेषज्ञ को ढूंढ निकाला, जिसने मंगलदास के लिए मोर को रंगा था। तेनाली ने चार साधारण मोरों को उस चित्रकार के पास पहुँचाया और कहा, "इनका रंग लाल करो, लेकिन ऐसा कि ये और भी सुंदर दिखें।" चित्रकार ने अपनी कला दिखाई, और चार शानदार लाल मोर तैयार हो गए। तेनाली ने इन्हें उसी दिन दरबार में पेश किया।

वह बोला, "महाराज, हमारे मित्र मंगलदास ने पच्चीस हजार में सिर्फ एक लाल मोर लाया, जबकि मैंने पचास हजार में चार इससे भी खूबसूरत लाल मोर लाए हैं।" राजा ने मोरों को देखा और वाकई प्रभावित हुए। वे बोले, "सच कहा, तेनाली! ये तो मंगलदास के मोर से कहीं बेहतर हैं। मंत्री जी, तेनाली को पचास हजार रुपये तुरंत दें।" तेनाली ने हाथ जोड़ते हुए कहा, "महाराज, असली हकदार मैं नहीं, बल्कि यह चित्रकार है। इसने अपनी कला से नीले मोरों को लाल बनाया है।"

राजा को सारा खेल समझते देर नहीं लगी। वे गुस्से से बोले, "तो मंगलदास ने हमें धोखा दिया! उसने रंगवाकर मोर को दुर्लभ बताकर पैसा ऐंठा।" उन्होंने तुरंत आदेश दिया, "मंगलदास से पच्चीस हजार रुपये वापस लो और पाँच हजार रुपये का जुर्माना लगाओ। चित्रकार को उचित पुरस्कार दो।" मंगलदास का चेहरा उतर गया। वह बेबस होकर खड़ा रह गया, और राजा की सजा को स्वीकार करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं था।

इस घटना के बाद दरबार में एक नई चर्चा शुरू हुई। तेनाली ने सोचा, "चालाकी से कुछ समय के लिए फायदा हो सकता है, लेकिन सच्चाई हमेशा जीतती है।" कुछ दिन बाद, एक और दरबारी ने सोने का कृत्रिम हार लाकर पेश किया। लेकिन तेनाली ने पहले ही उसकी सच्चाई जाँच ली थी। उसने राजा से कहा, "महाराज, यह हार नकली है। इसे आजमाने के लिए इसे आग में डालें।" हार पिघल गया, और वह दरबारी भी मंगलदास की तरह सजा पाने को मजबूर हो गया।

राजा ने तेनाली की बुद्धिमानी की तारीफ की और कहा, "तेनाली, तुम्हारी चतुराई हमारे दरबार की रक्षा करती है।" तेनाली ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "महाराज, सच्चाई और मेहनत ही असली संपदा है।" इस घटना ने दरबारियों को सबक सिखाया कि राजा को धोखा देना महँगा पड़ सकता है। चित्रकार को सम्मान मिला, और वह दरबार का नियमित मेहमान बन गया। उसने अपनी कला से कई और रचनाएँ बनाईं, जिन्हें राजा ने अपने संग्रह में शामिल किया।

सीख

यह मोटिवेशनल स्टोरी सिखाती है कि चालाकी से अस्थायी सफलता मिल सकती है, लेकिन सच्चाई और मेहनत ही दीर्घकालिक जीत दिलाती है। ईमानदारी और बुद्धिमानी हमेशा सम्मान पाती है।

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