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समर की शरारत और माँ का प्यार:- भारत के एक बहुत ही खूबसूरत और शांत शहर 'आनंदनगर' में 'समर' नाम का एक दस साल का लड़का रहता था। समर बहुत ही चुलबुला, बुद्धिमान लेकिन बेहद शरारती बच्चा था। उसके मन में हमेशा कोई न कोई नई खुराफात चलती रहती थी। उसे जादू (Magic) की कहानियाँ सुनना बहुत पसंद था। वह अक्सर सोचता था कि काश उसके पास भी परियों जैसी कोई चमत्कारी शक्ति आ जाए, जिससे वह बिना मेहनत किए अपने सारे काम कर सके और खूब मज़ाक कर सके।
समर दिल का बुरा नहीं था। उसी दिन दोपहर को उसने स्कूल से लौटते समय एक छोटे से पिल्ले (Puppy) की जान बचाई थी जो नाले में गिर गया था। लेकिन उसकी शरारतों की वजह से उसके माता-पिता अक्सर परेशान रहते थे।
तूफानी रात और नीलम परी
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एक दिन रात के समय भयंकर तूफान आया। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और बिजली कड़क रही थी। समर अपने कमरे में बिस्तर पर रजाई ओढ़े लेटा था। अचानक, एक बहुत तेज़ बिजली चमकी और उसके कमरे की खिड़की के बाहर एक अजीब सी नीली रोशनी फैल गई।
समर ने घबराकर अपनी रजाई हटाई। उसने देखा कि खिड़की के बाहर हवा में एक बहुत ही सुंदर परी तैर रही है। उसने नीले रंग की चमचमाती पोशाक पहनी हुई थी। समर की आँखें फटी की फटी रह गईं।
परी खिड़की के अंदर आई और बहुत ही मीठी आवाज़ में बोली, "डरो मत समर! मैं 'नीलम परी' हूँ। मैंने आज दोपहर देखा कि तुमने अपनी जान की परवाह किए बिना उस छोटे से पिल्ले की जान बचाई थी। तुम अंदर से एक बहुत अच्छे लड़के हो। इसलिए, मैं तुम्हें एक खास उपहार देना चाहती हूँ।"
यह सुनकर समर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परी ने अपनी चमकती हुई छड़ी आगे बढ़ाई। परी ने कहा, "समर, यह एक जादुई छड़ी है। अगर तुम इसे किसी भी चीज़ की तरफ करके दो बार गोल घुमाओगे, तो वह चीज़ गायब हो जाएगी! लेकिन याद रखना, इसका इस्तेमाल केवल भलाई के लिए करना, किसी को परेशान करने के लिए नहीं।" समर ने उत्सुकता से वह छड़ी ले ली। जब तक वह परी को 'धन्यवाद' कहता, परी हवा में गायब हो चुकी थी।
स्कूल में छड़ी का कमाल और शरारतें
अगली सुबह समर बहुत जल्दी उठ गया। वह अपनी उस जादुई छड़ी को अपने स्कूल बैग में छिपाकर ले गया। उसके दिमाग में परी की दी गई चेतावनी बिल्कुल नहीं थी; वह तो बस मज़ाक करने के मूड में था।
स्कूल में जैसे ही गणित की क्लास शुरू हुई, मिस्टर शर्मा (गणित के टीचर) ने ब्लैकबोर्ड पर कुछ सवाल लिखे और डस्टर उठाने के लिए पलटे। समर ने पीछे की सीट से चुपके से अपनी छड़ी निकाली, उसे डस्टर की तरफ किया और दो बार गोल घुमाया। छूमंतर! टेबल पर रखा डस्टर पलक झपकते ही गायब हो गया! मिस्टर शर्मा हैरान रह गए। "अरे! डस्टर अभी तो यहीं था, कहाँ चला गया?" वे पूरे क्लासरूम में डस्टर ढूंढते रहे, और समर पीछे बैठकर अपनी हँसी रोकता रहा।
लंच ब्रेक में समर ने अपने दोस्त 'रोहन' का टिफिन बॉक्स गायब कर दिया। जब रोहन रोने लगा, तो समर को बहुत मज़ा आया। उसे लग रहा था कि यह दुनिया का सबसे बेहतरीन खेल है। किसी को भी शक नहीं हुआ कि यह सब समर की जादुई छड़ी का कमाल है।
एक भयानक भूल: जब माँ गायब हो गई
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स्कूल से लौटने के बाद भी समर की शरारतें रुकी नहीं। वह घर के बगीचे में रखे गमलों को गायब करने की सोच रहा था। तभी वह ड्राइंग रूम में आया। वहाँ डाइनिंग टेबल के पास एक बड़ी सी लकड़ी की कुर्सी रखी हुई थी। समर ने सोचा, "क्यों न मैं इस कुर्सी को गायब कर दूँ? जब पापा ऑफिस से आकर इस पर बैठेंगे, तो धड़ाम से नीचे गिरेंगे। कितना मज़ा आएगा!"
समर ने अपनी छड़ी निकाली। उसने कुर्सी की तरफ निशाना साधा। लेकिन तभी एक बहुत बड़ी अनहोनी हो गई। जैसे ही समर ने छड़ी को दो बार गोल घुमाया और जादू का असर होने ही वाला था, ठीक उसी पल समर की माँ रसोई घर (Kitchen) से बाहर निकलीं और उस कुर्सी के बिल्कुल सामने से गुज़रने लगीं।
छड़ी से निकली नीली रोशनी कुर्सी के बजाय सीधा समर की माँ से जा टकराई। झप! एक हल्की सी चमक उठी और अगले ही पल... समर की माँ वहां से पूरी तरह गायब हो गईं! उनके हाथ में जो पानी का गिलास था, वह ज़मीन पर गिरकर टूट गया।
पश्चाताप के आँसू और परी की वापसी
समर के हाथों से जादुई छड़ी छूटकर ज़मीन पर गिर गई। वह सन्न रह गया। उसका पूरा शरीर कांपने लगा। "माँ? माँ, आप कहाँ हो?" समर जोर से चिल्लाया। पूरे घर में सन्नाटा था। कोई जवाब नहीं आया।
समर को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे परी की वह चेतावनी याद आई कि 'इस छड़ी का इस्तेमाल किसी को परेशान करने के लिए मत करना।' उसका मज़ाक अब एक भयानक बुरे सपने में बदल चुका था। वह ज़मीन पर बैठकर फूट-फूटकर रोने लगा। "मुझे मेरी माँ वापस चाहिए! मुझे कोई जादू नहीं चाहिए!" वह बिलख-बिलख कर रो रहा था।
समर के सच्चे आँसू और पुकार सुनकर अचानक कमरे में फिर से वही नीली रोशनी चमकी। नीलम परी प्रकट हुई। परी के चेहरे पर इस बार मुस्कान नहीं, बल्कि थोड़ी सख्ती थी।
समर ने दौड़कर परी के पैर पकड़ लिए और रोते हुए बोला, "परी जी! मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मैंने आपके दिए हुए उपहार का गलत इस्तेमाल किया। कृपया मेरी माँ को वापस ला दीजिए। आप भले ही मेरी जान ले लें, लेकिन मेरी माँ को कुछ मत होने दीजिए।"
सीख और माँ का प्यार
परी को समर पर दया आ गई। उसने देखा कि समर को सच में अपनी गलती का पछतावा है। परी ने कहा, "समर, शक्ति (Power) पाना आसान है, लेकिन उसे संभालना बहुत मुश्किल। जब हम बिना सोचे-समझे काम करते हैं, तो उसका नुकसान हमारे अपनों को ही उठाना पड़ता है। मैं तुम्हारी माँ को वापस ला सकती हूँ, लेकिन इसके बदले मुझे यह जादुई छड़ी हमेशा के लिए वापस लेनी होगी।"
समर ने तुरंत छड़ी उठाकर परी के हाथों में रख दी और कहा, "हाँ! आप इसे ले जाइए। मेरे लिए मेरी माँ से बढ़कर दुनिया में कोई जादू नहीं है।"
नीलम परी ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ हवा में घुमाया। एक सुनहरी रोशनी हुई और समर की माँ उसी जगह पर वापस प्रकट हो गईं, जहाँ से वे गायब हुई थीं। माँ थोड़ी हैरान थीं, जैसे उन्हें पता ही न हो कि उनके साथ क्या हुआ है।
समर दौड़कर अपनी माँ के गले से लिपट गया और उन्हें कसकर पकड़ लिया। जब उसने पीछे मुड़कर देखा, तो नीलम परी जा चुकी थी। उस दिन के बाद से समर ने कसम खाई कि वह कभी भी किसी को परेशान करने वाली शरारत नहीं करेगा। उसे समझ आ गया था कि असली जादू छड़ी में नहीं, बल्कि माँ के प्यार और परिवार के साथ रहने में है।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
ताकत का सही इस्तेमाल: अगर हमें कोई विशेष शक्ति या ज्ञान मिलता है, तो उसका उपयोग हमेशा भलाई के लिए करना चाहिए, न कि दूसरों को परेशान करने के लिए।
सोच-समझकर कदम उठाना: बिना सोचे-समझे किए गए मज़ाक अक्सर बड़ी मुसीबत बन जाते हैं।
सबसे बड़ा जादू: दुनिया में परिवार और माँ के प्यार से बढ़कर कोई चमत्कार या जादुई चीज़ नहीं है।
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