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एक नए जीवन की शुरुआत
घने जंगलों के बीच, जहाँ सूरज की पहली किरणें पुराने बरगद के पत्तों से छनकर आती थीं, वहाँ 'मधुलोक' नाम का एक विशाल शहद का छत्ता था। वह दिन बहुत खास था। छत्ते के अंदर सैकड़ों नन्हे अंडों से नई मधुमक्खियाँ बाहर आने वाली थीं। चारों तरफ पंखों की भिनभिनाहट और एक नई उम्मीद का शोर था। इन्हीं नन्हे बच्चों के बीच एक ऐसी मधुमक्खी ने जन्म लिया, जिसकी आँखें बाकी सब से ज्यादा चमक रही थीं। उसका नाम रखा गया— निक्की।
निक्की आम मधुमक्खियों जैसी नहीं थी। जहाँ बाकी बच्चे कतार में खड़े होना सीख रहे थे, निक्की छत्ते की ऊँची दीवारों को देख रही थी और सोच रही थी कि इस मोम की दुनिया के पार क्या है।
निक्की का स्वभाव और उसकी जिज्ञासा
छत्ते का अनुशासन बहुत कड़ा था। मार्गदर्शक मधुमक्खी, जिन्हें सब 'बड़ी दीदी' कहते थे, सबको उनके नाम और काम समझा रही थीं।
"निक्की, तुम्हें कतार में चलना होगा। हम मधुमक्खियों का जीवन अनुशासन से चलता है," बड़ी दीदी ने कहा।
निक्की ने मासूमियत से पूछा, "पर दीदी, हमें नाम की क्या जरूरत? क्या हम एक-दूसरे को बस 'ए मधुमक्खी' कहकर नहीं बुला सकते?"
बड़ी दीदी मुस्कुराईं और बोलीं, "अगर मैं 'मधुमक्खी' कहूँगी तो यहाँ मौजूद हजारों बहनें एक साथ मुड़ेंगी। नाम ही हमें भीड़ में हमारी पहचान देता है।" निक्की को यह बात समझ तो आई, पर उसके मन में सवालों का पिटारा अभी बंद नहीं हुआ था। उसने देखा कि कोई सफाई कर रहा है, कोई फूलों का रस (अमृत) ला रहा है, तो कोई पहरेदारी कर रहा है।
निक्की ने फिर पूछा, "क्या हमें सारा दिन बस काम ही करना होगा? क्या हम कभी खेल नहीं सकते?"
वहाँ मौजूद जूलियन नाम की एक सख्त मधुमक्खी ने टोकते हुए कहा, "सवाल मत करो निक्की! काम ही पूजा है। अगर हम शहद नहीं बनाएंगे, तो हमारा परिवार भूखा मर जाएगा।"
जब निक्की ने देखा छत्ते के बाहर का संसार
निक्की को कतार में चलना पसंद नहीं था। वह उड़ना चाहती थी, गिरना चाहती थी और फिर संभलना चाहती थी। उसकी इस बेताबी को देखकर छत्ते की दयालु महारानी आभा ने उसे अपने पास बुलाया।
महारानी ने देखा कि निक्की का दिल काम में नहीं, बल्कि खोज में है। उन्होंने फैसला किया, "निक्की को फूलों का रस लाने वाली टीम (कलेक्टर) में शामिल किया जाए। यह छत्ते के लिए भी अच्छा होगा और निक्की की बाहर जाने की इच्छा भी पूरी होगी।"
जैसे ही निक्की पहली बार छत्ते से बाहर निकली, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। नीला आसमान, रंग-बिरंगे फूल और ठंडी हवा! उसने अपनी परछाई को पानी में देखा और उसे लगा कि कोई और मधुमक्खी उसे चिढ़ा रही है। वह अपनी ही परछाई से बातें करने लगी, जिसे देखकर पास में बैठा एक टिड्डा हँसने लगा।
टिल्लू टिड्डा और सच्ची दोस्ती
"अरे छोटी मधुमक्खी! वह तुम्हारी परछाई है, कोई दुश्मन नहीं," टिड्डे ने कहा।
निक्की ने शर्माते हुए पूछा, "आप कौन हैं?"
"मैं हूँ टिल्लू टिड्डा! इस जंगल का सबसे बड़ा मुसाफिर। तुम यहाँ अकेली क्या कर रही हो? तुम्हारा झुंड तो आगे निकल गया।"
निक्की को अहसास हुआ कि वह तो रास्ता भटक गई है। टिल्लू ने निक्की को जंगल के खतरों के बारे में बताया और उसे सबसे मीठे फूलों का पता भी दिया। निक्की ने ढेर सारा रस इकट्ठा किया, लेकिन घर लौटते समय वह बहुत थक गई थी और एक सुंदर फूल के अंदर आराम करने के लिए रुक गई। उसे नहीं पता था कि काल की छाया उसके करीब है।
काले ततैया की कैद और खौफनाक साजिश
तभी अचानक, दो बड़े और डरावने काले ततैया (जिन्हें जंगल में 'लुटेरे डंक' कहा जाता था) वहाँ आए। उन्होंने निक्की को एक जाल में पकड़ लिया।
"देखो उस्ताद! एक नन्ही मधुमक्खी हाथ लगी है," एक ततैया बोला।
उन्होंने निक्की को एक अंधेरी गुफा में बंद कर दिया। निक्की बहुत डर गई थी, लेकिन उसने अपनी हिम्मत नहीं हारी। वह चुपचाप उनकी बातें सुनने लगी।
ततैया का सरदार कह रहा था, "कल सुबह जब सूरज आधा निकलेगा, हम 'मधुलोक' पर हमला करेंगे। हम उनका सारा शहद लूट लेंगे और उनके छत्ते को तबाह कर देंगे।"
निक्की का दिल जोर से धड़कने लगा। उसे अपने परिवार को बचाना था। उसने गौर किया कि ततैयों ने पूरे शरीर पर मजबूत कवच पहन रखा है, लेकिन उनकी गर्दन खाली है। यही उनकी कमजोरी थी!
मधुलोक की रक्षा: निक्की की बहादुरी
निक्की ने अपनी पूरी ताकत लगाई और गुफा की एक छोटी सी दरार से बाहर निकलने में कामयाब रही। वह बिना रुके, बिना थके मधुलोक की ओर उड़ी। छत्ते पहुँचते ही उसने महारानी आभा और पहरेदारों को ततैयों की साजिश के बारे में बताया।
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"महारानी! वे कल हमला करने वाले हैं। लेकिन मैंने उनकी कमजोरी जान ली है। हमें उनकी गर्दन पर हमला करना होगा!" निक्की ने चिल्लाकर कहा।
अगली सुबह, जैसे ही काले ततैयों की फौज ने हमला किया, मधुमक्खियाँ तैयार थीं। निक्की के नेतृत्व में, मधुमक्खियों ने एक खास रणनीति अपनाई। उन्होंने सीधे ततैयों की गर्दन पर डंक मारना शुरू किया। ततैया इस अचानक और सटीक हमले से घबरा गए। वे अपनी जान बचाकर वहाँ से भाग खड़े हुए।
कहानी की सीख
(Moral of the Story)
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हर व्यक्ति की अपनी एक विशेष योग्यता होती है। अनुशासन जरूरी है, लेकिन जिज्ञासा और साहस ही हमें बड़ी मुसीबतों से लड़ना सिखाते हैं। साथ ही, अपनी बुद्धिमानी का उपयोग करके हम सबसे बड़े दुश्मन को भी हरा सकते हैं।
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