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मेहनत का फल: बादलों की हड़ताल और जिद्दी किसान - हिंदी कहानी

जब बादलों ने 10 साल तक न बरसने की कसम खाई, तो एक किसान ने हार क्यों नहीं मानी? पढ़िए 'मेहनत का फल' और निरंतर प्रयास की यह अद्भुत कहानी। Moral Stories

By Lotpot
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मेहनत का फल: बहुत समय पहले की बात है, भारत के एक विशाल क्षेत्र में कई खुशहाल गाँव बसे हुए थे। वहां के लोग खेती-बाड़ी करके अपना जीवन चलाते थे। लेकिन कहते हैं न, वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। एक बार प्रकृति और मनुष्यों के बीच कुछ अनबन हो गई। बादलों (Clouds) को लगा कि मनुष्य उनकी कद्र नहीं करते।

नाराज होकर बादलों के राजा ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और एक कठोर निर्णय लिया। उन्होंने घोषणा कर दी, "हम अगले 10 साल तक पानी नहीं बरसाएंगे! यह हमारी हड़ताल (Strike) है।"

यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई। जब बारिश ही नहीं होगी, तो फसल कैसे होगी? और फसल नहीं होगी, तो खाएंगे क्या?

हताशा और पलायन

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जैसे ही बादलों की प्रतिज्ञा की खबर पक्की हुई, अधिकांश किसानों ने उम्मीद छोड़ दी। "अब यहाँ रुकने का क्या फायदा? 10 साल तक तो सूखा ही रहेगा," एक किसान ने कहा। दूसरे ने कहा, "चलो, अपने हल और बैल पैक कर लेते हैं। अब इनकी कोई ज़रूरत नहीं है। हम शहर जाकर मज़दूरी कर लेंगे।"

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देखते ही देखते, खेतों में सन्नाटा छा गया। जो हल रोज़ चलते थे, वे कोनों में जंग खाने के लिए पटक दिए गए। कुदाल और फावड़े बक्सों में बंद हो गए। लोग हाथ पर हाथ धरकर बैठ गए और अपनी किस्मत को कोसने लगे। उन्हें लगा कि अब Hard Work (कड़ी मेहनत) करने का कोई मतलब नहीं है जब परिणाम शून्य ही मिलना है।

रामदीन का संकल्प

उसी गाँव में एक किसान रहता था जिसका नाम था 'रामदीन'। रामदीन थोड़ा अलग किस्म का इंसान था। वह कर्म में विश्वास रखता था, फल की चिंता में नहीं। जब सबने अपने हल रख दिए, तब भी रामदीन ने अपना नियम नहीं तोड़ा।

अगली सुबह, जब सूरज निकला, रामदीन अपने बैलों को लेकर सूखे, बंजर खेत में पहुँच गया। ज़मीन पत्थर जैसी सख्त हो चुकी थी। धूल उड़ रही थी। लेकिन रामदीन ने अपना हल उठाया और जुताई शुरू कर दी। गाँव वाले उसे देखकर हँसने लगे। "अरे रामदीन! क्या पागल हो गए हो? बादलों ने हड़ताल कर रखी है। 10 साल तक पानी की एक बूंद नहीं गिरेगी। तुम क्यों अपना पसीना बहा रहे हो?"

रामदीन ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। वह रोज़ सुबह आता, खेत जोतता, कंकड़-पत्थर हटाता और शाम को घर लौटता। उसका शरीर पसीने से लथपथ रहता, लेकिन उसकी आँखों में एक चमक थी। यह उसकी Persistence (दृढ़ता) थी।

बादलों का मज़ाक और रामदीन का जवाब

दिन बीतते गए, महीने बीत गए। एक दिन, कुछ बादल आसमान में बहुत नीचे से उड़ते हुए गुज़र रहे थे। उन्होंने देखा कि पूरा इलाका वीरान पड़ा है, लेकिन एक अकेला किसान तपती धूप में हल चला रहा है।

बादलों को बड़ा आश्चर्य हुआ। वे नीचे आए और रामदीन के पास रुक गए। एक बादल ने मज़ाक उड़ाते हुए पूछा, "क्यों भाई किसान! क्या तुम बहरे हो? क्या तुमने हमारी घोषणा नहीं सुनी? हम अगले 10 साल तक नहीं बरसने वाले। फिर तुम क्यों सूखी ज़मीन पर हल चलाकर अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहे हो?"

रामदीन ने अपना हल रोका, माथे से पसीना पोंछा और मुस्कुराते हुए बादलों की ओर देखा। उसने बहुत ही विनम्रता से जवाब दिया, "हे बादलों! मुझे सब पता है। मैं जानता हूँ कि आप नहीं बरसेंगे। लेकिन मैं यह हल किसी फसल के लिए नहीं चला रहा हूँ।"

बादल हैरान रह गए। "तो फिर किसलिए?"

रामदीन ने कहा, "मैं रोज़ हल इसलिए चला रहा हूँ ताकि इन 10 सालों में मैं कहीं हल चलाना न भूल जाऊँ। अगर मैं 10 साल घर पर बैठा रहा और आराम करता रहा, तो मेरा शरीर आलसी हो जाएगा और मैं खेती की कला भूल जाऊंगा। फिर जब 10 साल बाद आप बरसेंगे, तो मैं चाहकर भी खेती नहीं कर पाऊंगा। इसलिए मैं अपना अभ्यास (Practice) जारी रख रहा हूँ।"

बादलों को हुआ अपनी गलती का अहसास

किसान की यह बात सुनकर बादलों के पैरों तले जमीन खिसक गई (अगर उनके पैर होते तो!)। वे सन्न रह गए। बादलों ने आपस में कानाफूसी शुरू कर दी। "भाई, यह किसान तो सही कह रहा है। मनुष्य को तो अपनी कला याद रखने के लिए अभ्यास करना पड़ता है।"

तभी एक बूढ़े और समझदार बादल ने घबराकर कहा, "अरे मूर्खो! अगर यह किसान 10 साल हल न चलाने से हल चलाना भूल सकता है, तो हम भी तो बरसना भूल सकते हैं! अगर हम 10 साल तक निकम्मे बैठे रहे, तो क्या पता हमारे अंदर से बरसने की शक्ति ही खत्म हो जाए?"

यह डर सभी बादलों में फैल गया। उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्हें समझ आ गया कि Consistency (निरंतरता) ही अस्तित्व का नियम है।

और फिर चमत्कार हुआ

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घबराहट में बादलों ने तुरंत अपनी हड़ताल वापस ले ली। बादलों के राजा ने आदेश दिया, "बरसो! अभी बरसो! कहीं हम बरसना न भूल जाएं!"

देखते ही देखते आसमान काला हो गया। बिजली कड़कने लगी और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। सूखी धरती की प्यास बुझ गई। चूँकि रामदीन का खेत पहले से ही जुता हुआ और तैयार था, बारिश का पानी सीधे उसकी ज़मीन की गहराई तक गया। उसने तुरंत बीज बो दिए।

बाकी गाँव वाले, जिन्होंने अपने हल पैक करके रख दिए थे, वे हड़बड़ा गए। उनके खेत तैयार नहीं थे, जंग लगे औजार ठीक नहीं थे और बैल भी सुस्त हो चुके थे। जब तक वे तैयारी करते, बारिश का मौसम निकल चुका था।

उस साल, सिर्फ रामदीन के खेतों में सोना (फसल) उगा। उसकी मेहनत जीत गई और बाकी लोग सिर्फ हाथ मलते रह गए। रामदीन की Positive Thinking (सकारात्मक सोच) ने उसे विजेता बना दिया था।

आज की तैयारी, कल की सफलता

बच्चों, रामदीन की कहानी हमें जीवन का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाती है। अक्सर हमारे जीवन में भी ऐसा समय आता है जब परिस्थितियां हमारे खिलाफ होती हैं। हमें लगता है कि अभी पढ़ने का क्या फायदा जब परीक्षा दूर है? या अभी प्रैक्टिस क्यों करें जब कोई मैच नहीं है?

लेकिन कामयाबी उन्हीं को मिलती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी तैयारी नहीं छोड़ते। जो लोग "सही समय" का इंतज़ार करते हैं, वे अक्सर पीछे रह जाते हैं। और जो हर समय को "सही" मानकर मेहनत करते हैं, Success (सफलता) उनके कदम चूमती है।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  • निरंतर अभ्यास (Practice is Key): अपनी स्किल्स को कभी जंग न लगने दें, चाहे मौके हों या न हों।

  • कर्म करते रहो: फल की चिंता करके काम बंद कर देना मूर्खता है।

  • भविष्य की तैयारी: अवसर कभी भी आ सकता है, उसके लिए आज ही तैयार रहना चाहिए।

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