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चिंटू मिंटू कविता बच्चों के लिए लिखी गई एक हल्की-फुल्की, मज़ेदार और बेहद प्यारी हिंदी बाल कविता है। यह कविता दो नन्हे भाईयों. चिंटू और मिंटू. की मासूम दुनिया को दर्शाती है, जहाँ हँसी, शरारत और प्यार साथ-साथ चलते हैं। छोटे बच्चों को जुड़वाँ बच्चों की कहानियाँ हमेशा आकर्षित करती हैं, और यह कविता उसी आकर्षण को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है।
कविता में बिना दाँत के हँसते बच्चों का दृश्य बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है। एक खिलौने को लेकर होने वाली हल्की-सी हाथापाई. यह सीन हर घर में देखने को मिलता है। इसी वजह से यह कविता बच्चों को अपनी ही दुनिया से जुड़ी लगती है। मम्मी-पापा, ताऊ-ताई का बच्चों को गोद में लिए रहना पारिवारिक प्रेम और अपनापन दर्शाता है, जो बच्चों के भावनात्मक विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।
चिंटू मिंटू कविता बच्चों के लिए स्कूलों में कविता पाठ, नर्सरी और केजी कक्षाओं, हिंदी पठन अभ्यास और बाल पत्रिकाओं के लिए बेहद उपयोगी है। इसकी तुकबंदी, छोटे वाक्य और दृश्यात्मक शब्द बच्चों की भाषा समझने की क्षमता को बढ़ाते हैं। साथ ही यह कविता बच्चों को यह सिखाती है कि शरारतों के बीच भी परिवार का प्यार सबसे बड़ा सहारा होता है।
कविता: चिंटू–मिंटू
चिंटू–मिंटू भाई–भाई,
मिलती-जुलती सूरत पाई।
बिना दाँत के हँसते ही-ही,
जैसे कोई बुढ़िया माई।
एक खिलौना रखो बीच में,
फिर देखो तुम हाथापाई।
इन्हें लिए रहते गोदी में,
मम्मी–पापा, ताऊ–ताई।
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