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बच्चों को अगर सीखने के साथ-साथ हँसाना हो, तो बाल कविताएँ सबसे बेहतरीन माध्यम होती हैं। खासतौर पर जब कविता रोज़मर्रा की चीज़ों से जुड़ी हो, जैसे फल और सब्ज़ियाँ, तो बच्चे उससे तुरंत जुड़ जाते हैं। “लाल टमाटर और हरी मिर्च” पर आधारित यह कविता बच्चों की कल्पनाशक्ति को जगाने वाली एक मज़ेदार रचना है, जिसमें दोनों सब्ज़ियाँ मानवीय गुणों के साथ बातचीत करती दिखाई देती हैं।
यह कविता न सिर्फ मनोरंजन करती है, बल्कि बच्चों को यह भी सिखाती है कि हर चीज़ की अपनी पहचान और उपयोग होता है। जहाँ लाल टमाटर गोल-मटोल और सबको पसंद आने वाला है, वहीं हरी मिर्च पतली होने के बावजूद तेज़ और असरदार है। इसी मज़ेदार नोक-झोंक के ज़रिए बच्चे यह समझते हैं कि ताक़त सिर्फ आकार में नहीं होती।
यह कविता बाल साहित्य, स्कूल असेंबली, कक्षा की गतिविधियों, और नर्सरी-केजी के बच्चों के लिए बेहद उपयुक्त है। आसान भाषा, तुकबंदी और संवाद शैली इसे याद रखने लायक बनाती है। SEO के लिहाज़ से भी यह रचना “बाल कविता हिंदी में”, “सब्ज़ियों पर कविता”, और “मज़ेदार बच्चों की कविता” जैसे खोज शब्दों के लिए उपयोगी है।
कविता
लाल टमाटर
लाल टमाटर, लाल टमाटर,
मिर्ची बोली सुन लो आकर,
मैं पतली-सी हरी-हरी,
दौड़ लगाऊँ खड़ी-खड़ी।
टमाटर बोला मिर्ची रानी,
क्यों इतना इतराती हो,
पतली-सी तुम, दम भी कम है,
क्यों गुस्सा मुझे दिलाती हो।
मैं बच्चों को प्यारा लगता,
गोल-गोल हूँ, सबको भाता,
तुम तो खूब रुलाती हो,
सबको दुख पहुँचाती हो।
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