Moral Story: अनजाने कर्म का फल
एक राजा ब्राह्मणों को महल के आँगन में भोजन करा रहा था। राजा का रसोइयां खुले आँगन में भोजन पका रहा था।उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के ऊपर से गुजरी।
एक राजा ब्राह्मणों को महल के आँगन में भोजन करा रहा था। राजा का रसोइयां खुले आँगन में भोजन पका रहा था।उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के ऊपर से गुजरी।
माधव गरीब था, मगर वह मेहनती लकड़हारा था। वह राजगृह के साम्राज्य के पास एक गांव में रहता था। उसे काम करते हुए गाना गाने की आदत थी। उसका एक बेटा था, जिसका नाम किशन था।
न जाने क्यों अचानक सम्राट की नींद उड़ गई। वे अपने शयनकक्ष से बाहर निकल आये। चारों ओर सन्नाटा था। अभी पहरेदार ने बारह घंटे बजाये थे। महल के एक ओर बैठक में दीपक जल रहा था।
मृदुला, अब बस भी कर। दिन भर गुड्डे गुड़ियों का खेल खेलना पढ़ना नहीं है क्या? ‘‘मम्मी की आवाज़ सुनकर मृदुला ने अपनी सहेलियों से कहा- अब तुम लोग जाओ, मम्मी नाराज़ हो रही हैं’ फिर वह कमरे में आ गई जहाँ पर उसकी मम्मी बैठी हुईं थीं।