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बड़बोलापन: गप्पड़ गोलू और 'नकली' भूत का हंगामा:- दोस्तों, आपके ग्रुप में भी कोई न कोई ऐसा दोस्त ज़रूर होगा जो लंबी-लंबी फेंकता है। "अरे, मेरे मामा के पास हेलीकॉप्टर है!" या "मैंने कल शेर से कुश्ती लड़ी!" इसे ही कहते हैं—बड़बोलापन। बोलने में तो कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन जब पोल खुलती है, तो जो बेइज्जती (Insult) होती है, वो बड़ी जोरदार होती है। यह कहानी 'सिटी प्राइड सोसाइटी' के गोलू की है, जो खुद को 'बहादुर' बताता था, लेकिन एक छोटी सी घटना ने उसे पूरी कॉलोनी के सामने 'पोपट' बना दिया।
कहानी: कराटे किंग या भागम-भाग किंग?
गोलू की डिंगे (The Boasting)
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सिटी प्राइड सोसाइटी के पार्क में शाम को बच्चों की महफिल जमी थी। बीच में बैठा था गोलू—एक गोल-मटोल, चश्मा लगाने वाला लड़का, जिसके हाथ में हमेशा चिप्स का पैकेट रहता था। उसके चारों तरफ छोटे बच्चे ऐसे बैठे थे जैसे वो कोई फ़िल्मी हीरो हो।
गोलू अपनी नई 'गप्प' सुना रहा था। "तुम्हें पता है? कल रात जब मैं टेरेस (Terrace) पर टहल रहा था, तो वहां तीन चोर आ गए। उनके हाथ में चाकू थे!" बच्चे डर गए। "फिर क्या हुआ गोलू भैया?" गोलू ने चिप्स का एक टुकड़ा हवा में उछाला और मुंह में कैच किया। "फिर क्या? मैंने अपनी 'ड्रैगन किक' मारी! धड़ाम! एक चोर पानी की टंकी में गिरा, दूसरा रेलिंग से लटक गया और तीसरा तो मेरे पैर पकड़कर रोने लगा। मैंने उन्हें माफ़ कर दिया और भगा दिया।"
बच्चे तालियां बजाने लगे। "वाह! गोलू भैया तो 'कराटे किंग' हैं!" लेकिन वहीं पास में बेंच पर बैठे गोलू के असली दोस्त—अमन और रिया—एक-दूसरे को देखकर हँस रहे थे। उन्हें पता था कि गोलू कल रात टेरेस पर नहीं, बल्कि रजाई में घुसकर डोरेमोन देख रहा था।
दोस्तों का प्लान (The Prank)
अमन ने रिया से कहा, " यार, यह गोलू कुछ ज्यादा ही फेंकने लगा है। आज इसकी हेकड़ी निकालनी पड़ेगी।" रिया ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा, "मेरे पास एक प्लान है। आज रात सोसाइटी की लाइट मेंटेनेंस के लिए 1 घंटे के लिए बंद होने वाली है। बस, उसी अंधेरे का फायदा उठाएंगे।"
शाम को गोलू फिर से डिंगे हांक रहा था। "मुझे तो अंधेरे से इतना प्यार है कि मैं बिना टॉर्च के पूरा जंगल पार कर सकता हूँ। भूत-वूत तो मुझे देखकर रास्ता बदल लेते हैं।" तभी अमन वहां आया। "गोलू भाई, आज रात बेसमेंट पार्किंग में मेरी साइकिल की चेन उतर गई है। वहां बहुत अंधेरा है, मुझे डर लग रहा है। तुम चलोगे मेरे साथ? तुम तो निडर हो।"
गोलू का चिप्स हलक में अटक गया। बेसमेंट? अंधेरा? लेकिन अब इज्जत का सवाल था। सब बच्चे देख रहे थे। गोलू ने सीना चौड़ा किया (जितना हो सका)। "अरे, इसमें डरने की क्या बात है? चल, मैं अभी ठीक कर देता हूँ। मैं आगे चलूंगा, तू पीछे रहना।"
बेसमेंट का 'भूत' (The Scary Walk)
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रात के 8 बजते ही सोसाइटी की लाइट चली गई। चारों तरफ घुप अंधेरा। गोलू और अमन मोबाइल की टॉर्च जलाकर बेसमेंट की सीढ़ियां उतरने लगे। हर कदम पर गोलू का दिल धक-धक कर रहा था। "अमन, ये... ये अजीब सी आवाज़ें कैसी हैं?" गोलू ने कांपती आवाज़ में पूछा। "अरे कुछ नहीं भाई, हवा चल रही होगी। तुम तो शेर हो, डरो मत," अमन ने पीछे से मजे लेते हुए कहा।
जैसे ही वे बेसमेंट के बीच में पहुंचे, गोलू को लगा कि किसी पिलर (Pillar) के पीछे कोई खड़ा है। "कौन है वहां?" गोलू चिल्लाया। उसकी आवाज़ फट रही थी।
तभी पिलर के पीछे से एक अजीब सी परछाई निकली। उसने एक सफ़ेद चादर ओढ़ रखी थी और उसके हाथ में एक लाल चमकती हुई चीज़ (लेज़र लाइट) थी। परछाई ने एक डरावनी आवाज़ निकाली—"हूऊऊऊऊ... गोलू... मैं चोर नहीं, मैं यहाँ का पुराना भूत हूँ... तेरी कराटे किक खाने आया हूँ...!"
(असल में यह रिया थी, जिसने बेडशीट ओढ़ रखी थी और वॉइस-चेंजर वाला माइक यूज कर रही थी)।
कराटे किंग की रफ़्तार (The Climax)
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गोलू की हालत खराब हो गई। उसका 'कराटे' तो दूर, उसे अपना नाम भी याद नहीं आ रहा था। "भू... भू... भूत!" गोलू ने न अमन को देखा, न रास्ता। उसने बस एक यू-टर्न मारा और ऐसी दौड़ लगाई कि ओलंपिक के धावक (Runners) भी शर्मा जाएं।
भागते-भागते उसका पायजामा थोड़ा नीचे सरक गया, चश्मा नाक पर टेढ़ा हो गया, और हाथ का मोबाइल कहीं गिर गया। "मम्मी! बचाओ! भूत खा गया!" गोलू सीढ़ियों पर ऐसे चढ़ रहा था जैसे स्पाइडर-मैन।
रिया और अमन पीछे से हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए। उन्होंने चादर हटाई और लाइट वापस आ गई।
पोल खुल गई (The Reveal)
गोलू भागता हुआ सीधा सोसाइटी के गेट पर जाकर रुका, जहाँ गार्ड और बाकी लोग खड़े थे। वह हांप रहा था और पसीने से भीगा हुआ था। "अरे गोलू बेटा, क्या हुआ? किसी चोर से लड़कर आ रहे हो क्या?" गार्ड अंकल ने पूछा।
तभी पीछे से अमन और रिया आ गए। अमन के हाथ में गोलू का गिरा हुआ मोबाइल और रिया के हाथ में वो सफ़ेद चादर थी। रिया हँसते हुए बोली, "अरे अंकल, चोर नहीं। हमारे 'कराटे किंग' तो एक बेडशीट से डरकर भाग आए। वो 'भूत' मैं ही थी।"
वहां खड़े सारे बच्चे और बड़े ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। गोलू का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसकी सारी 'बड़बोली' हवा हो गई थी। उसने कान पकड़े और कसम खाई, "आज के बाद मैं कभी लंबी नहीं फेंकूँगा। जो हूँ, वही रहूंगा।"
निष्कर्ष: सच का सामना
उस दिन के बाद गोलू ने डिंगे हांकना बंद कर दिया। अब वह सबको हँसाता तो है, लेकिन अपनी झूठी कहानियों से नहीं, बल्कि अपनी असली मज़किया बातों से। उसे समझ आ गया कि इज़्ज़त झूठ बोलने से नहीं, बल्कि सच बोलने से मिलती है।
इस कहानी से सीख (Moral)
इस कहानी से हमें यह हँसती-खेलती सीख मिलती है:
बड़बोलापन भारी पड़ता है: उतनी ही बात बोलो जितनी तुम निभा सको। झूठ के पांव नहीं होते, वो कभी भी गिर सकता है।
असली बनो (Be Real): दूसरों को इंप्रेस करने के लिए झूठा हीरो बनने की ज़रूरत नहीं है। डर सबको लगता है, और यह नॉर्मल है।
Wikipedia Link
अधिक जानकारी के लिए देखें: डींग (Boasting) - विकिपीडिया (नोट: हिंदी पेज उपलब्ध न होने पर यह अंग्रेजी लिंक है, हिंदी में इसे 'आत्मश्लाघा' कहते हैं)।
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