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बच्चों के लिए चतुर तेनालीरामन की एक मज़ेदार और दिमागी कहानी। जानिए कैसे तेनालीरामन ने अपनी चतुराई से चोरों को सबक सिखाया और अपने बागीचे की मुफ्त में सिंचाई करवा दी। Funny Moral Story in Hindi.
नमस्ते बच्चों! आज हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसी कहानी जो न केवल आपको हंसाएगी, बल्कि यह भी सिखाएगी कि "अकल बड़ी या भैंस?" कभी-कभी जब हमारे पास ताकत नहीं होती, तब हमारी बुद्धि ही सबसे बड़ी ढाल बनती है। आज की कहानी 'विजयगढ़' के सबसे चतुर सलाहकार तेनालीरामन और कुछ शातिर चोरों की है। यह कहानी चतुर तेनालीरामन की उन मजेदार तरकीबों में से एक है जो मुश्किल वक्त में भी मुस्कुराने का मौका देती हैं।
1. विजयगढ़ का चतुर सलाहकार
बहुत समय पहले की बात है, दक्षिण भारत के एक संपन्न राज्य 'विजयगढ़' में राजा कृष्णदेव राज करते थे। उनके दरबार में एक बहुत ही बुद्धिमान और हाजिरजवाब सलाहकार था, जिसका नाम था तेनालीरामन। तेनालीरामन अपनी सूझबूझ के लिए पूरे राज्य में प्रसिद्ध था। लोग कहते थे कि तेनालीरामन की बातों में शहद और दिमाग में बिजली चमकती है।
राजा कृष्णदेव तेनालीरामन से बहुत प्यार करते थे और अक्सर उन्हें कीमती उपहार देते रहते थे। तेनालीरामन का घर शहर के किनारे पर था, जहाँ उन्होंने एक बहुत ही सुंदर आम और नारियल का बागीचा बना रखा था। उस समय राज्य में भीषण गर्मी पड़ रही थी और चतुर तेनालीरामन के बागीचे के पेड़ प्यासे थे। उन्हें सींचने के लिए कुएं से पानी निकालना बहुत मेहनत का काम था।
आधी रात के बिन बुलाए मेहमान
एक रात, जब तेनालीरामन अपने घर के बरामदे में बैठा ठंडी हवा का आनंद ले रहा था, उसे बागीचे की झाड़ियों में कुछ हलचल सुनाई दी। उसने ध्यान से देखा तो उसे तीन साये नजर आए। तेनालीरामन तुरंत समझ गया कि ये चोर हैं जो शायद राजा द्वारा दिए गए सोने के सिक्कों को चुराने आए हैं।
साधारण इंसान होता तो शोर मचा देता, लेकिन चतुर तेनालीरामन ने एक अलग ही योजना बनाई। उसने ज़ोर-ज़ोर से अपनी पत्नी से बात करना शुरू किया, ताकि चोर उसकी आवाज़ सुन सकें।
"अरी ओ भाग्यवान! सुनती हो? आजकल शहर में चोरों का बहुत आतंक बढ़ गया है। मुझे डर है कि राजा साहब ने जो सोने के सिक्कों की भारी संदूक हमें दी है, वह कोई चुरा न ले।"
झाड़ियों में छिपे चोरों के कान खड़े हो गए। वे मन ही मन खुश होने लगे।
सोने की संदूक और गहरा कुआं
तेनालीरामन की पत्नी (जो बहुत समझदार थी) ने पूछा, "तो फिर आपने वह संदूक कहाँ छिपाई है?"
तेनालीरामन ने हंसते हुए कहा, "मैंने बहुत दिमाग लगाया है। चोर घर की अलमारी या ज़मीन के नीचे ढूंढेंगे, लेकिन बागीचे के उस गहरे कुएं में कभी नहीं झांकेंगे। मैंने सारा सोना एक भारी लोहे की संदूक में भरकर कुएं के पानी में नीचे गिरा दिया है। अब वह वहाँ सुरक्षित है।"
चोरों ने जैसे ही यह सुना, उनकी आँखों में चमक आ गई। उन्होंने सोचा कि अब बस कुएं से संदूक निकालनी है और वे मालामाल हो जाएंगे। तेनालीरामन अपनी पत्नी के साथ अंदर गया और लाइट बंद कर दी, जैसे कि वह सो गया हो।
चोरों की मुफ्त मज़दूरी
चोर दबे पांव कुएं के पास पहुंचे। कुआं बहुत गहरा था और पानी से आधा भरा हुआ था। संदूक निकालने के लिए पहले पानी खाली करना ज़रूरी था। चोरों ने पास पड़ी बाल्टियाँ उठाईं और कुएं से पानी निकाल-निकालकर बाहर फेंकने लगे।
वे पानी बाहर फेंकते रहे और वह पानी बहकर तेनालीरामन के सूखे बागीचे के पेड़ों तक पहुँचने लगा। एक घंटा बीता, दो घंटे बीते, चोर थककर चूर हो गए थे लेकिन लालच में वे रुके नहीं। वे पागलों की तरह पानी निकाल रहे थे।
"भाई, अभी तक संदूक नहीं आई?" एक चोर ने हांफते हुए पूछा। "बस थोड़ा पानी और बचा है, फिर सोना हमारा होगा!" दूसरे ने जवाब दिया।
सुबह की पहली किरण फूटने वाली थी। चोरों ने लगभग पूरा कुआं खाली कर दिया था। अब उन्हें कुएं के तल में एक भारी चीज़ नजर आई। उन्होंने बड़ी मशक्कत से उसे बाहर निकाला।
जब खुला राज
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जैसे ही उन्होंने संदूक का ढक्कन खोला, उनके होश उड़ गए! संदूक में सोने के सिक्के नहीं, बल्कि भारी-भारी पत्थर और ईंटें भरी हुई थीं।
तभी पीछे से ताली बजाने की आवाज़ आई। चोरों ने मुड़कर देखा तो तेनालीरामन हाथ में लाठी लिए खड़ा मुस्कुरा रहा था।
"वाह भाइयों! वाह! आप लोगों ने तो कमाल कर दिया। मेरी कमर में बहुत दर्द था और मेरे बागीचे को पानी की सख्त ज़रूरत थी। आप लोगों ने रात भर मेहनत करके मेरे पूरे बागीचे की सिंचाई कर दी, वह भी बिल्कुल मुफ्त! इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।"
चोर समझ गए कि तेनालीरामन ने उन्हें उल्लू बनाया है। वे भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन तभी राजा के सैनिकों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। तेनालीरामन ने पहले ही सैनिकों को खबर दे दी थी।
राजा कृष्णदेव ने जब यह सुना, तो वह हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। उन्होंने चतुर तेनालीरामन की इस अनोखी तरकीब की बहुत तारीफ की।
कहानी से सीख (Moral of the Story)
इस मज़ेदार कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है:
बुद्धि का सही उपयोग: शारीरिक ताकत से बड़ी बुद्धि की ताकत होती है। तेनालीरामन ने बिना लड़े ही चोरों को हरा दिया।
लालच बुरी बला है: चोरों के लालच ने ही उन्हें बेवकूफ बनाया। अगर वे लालच न करते, तो पकड़े न जाते।
मुसीबत में धीरज: जब भी कोई संकट आए, घबराने के बजाय ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए।
क्या आप जानते हैं?तेनालीरामन (जिन पर यह कहानी आधारित है) विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेवराय के दरबार में एक महान कवि और सलाहकार थे। उनकी बुद्धिमानी के किस्से पूरे भारत में सुनाए जाते हैं। आप उनके बारे में और अधिक Wikipedia पर पढ़ सकते हैं।
लेखक की कलम से: बच्चों, तेनालीरामन की तरह चतुर बनो, लेकिन अपनी चतुराई का उपयोग हमेशा दूसरों की भलाई और सच के लिए करो!
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