शिक्षाप्रद बाल कहानी : भगवान हमें हमेशा सर्वश्रेष्ठ चीज़ देते हैं

Inspirational Child Story : भगवान हमें हमेशा सर्वश्रेष्ठ चीज़ देते हैं :- एक दस साल की छोटी बच्ची थी, जो खूबसूरत थी और उसके सुनहरे बाल थे। वह अपनी मां के साथ बस स्टाॅप पर जा रही थी। रास्ते में शो केस में वहां उसने एक गुलाबी डिब्बे में सफेद गोल गोल चमकते मोतियों का हार देखा।

उसने अपनी मां से कहा, ‘मां, क्या मैं यह ले सकती हूं?’

अपनी बेटी की बात सुनकर मां ने तुरंत उस डिब्बे के पीछे उसकी कीमत देखी और फिर उसने अपनी बेटी की नीली आंखों में देखा।
‘यह हज़ार रूपये का है। अगर तुम्हें यह चाहिए तो मुझे लगता है कि तुम्हें कुछ काम करना होगा और थोड़े समय में पैसे बचाकर तुम इसे अपने लिए ले सकती हो। तुम्हारा जन्मदिन सिर्फ एक हफ्ते दूर है और तुम्हें दादी से जन्मदिन पर पैसे भी मिल सकते है।’

Inspirational Child Story

जैसे ही जीया घर पहुंची, उसने अपना पिग्गी बैंक और उसमें पड़े हुए पैसो को गिना। उसके पास 500 रूपये थे। रात के खाने के बाद उसने मां के साथ पहले से ज़्यादा मदद की और फिर वह अपनी पड़ोसन मैरी के पास गई और उसने उससे कहा कि वह उसके घर के बाहर पड़े फूलों को एक महीना रोज साफ कर देगी तो क्या वह उसे 300 रूपये-एडवांस देगी। मैरी ने उसकी बात मान ली। अपने जन्मदिन के दिन दादी ने जीया को दो सौ रूपये दिए और आखिरकार वह मोतियों का हार खरीदने के लिए उसके पास हज़ार रूपये हो गए।

जीया को अपने मोती बहुत पसंद थे। उन्हें पहनकर वह खूबसूरत महसूस करती थी और खुद को बड़ा समझती थी। वह उन्हें हर जगह पहनकर जाती थी। वह उस मोतियों के हार को सिर्फ नहाते हुए और तैराकी के समय उतारती थी। उसकी मां ने उसे बताया था कि अगर मोती गीले हो गए तो वह हरे रंग के हो जाएंगे।
जीया के पिता उससे बहुत प्यार करते थे और हर रात जब वह सोने के लिए पलंग पर लेटती थी तो उसके पिता उसके पास आकर उसे एक कहानी ज़रूर सुनाते थे। एक रात जब उन्होंने कहानी सुनानी खत्म की, तो उन्होंने जीया से पूछा,

‘क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?’

‘जी हां, पापा! आपको पता है कि मैं आपसे प्यार करती हूं।’

‘फिर मुझे अपना मोतियों का हार दे दो।’

‘पापा, कृपया मेरे मोतियों का हार मत मांगो। आप मेरी गुड़िया ले सकते हो जिसके सफेद कपड़े है और जिसकी पूंछ गुलाबी रंग की है। आपको याद है पापा? जो आपने मुझे दी थी। वह मेरी पसंदीदा गुड़िया है।’
‘कोई बात नहीं बेटा, पापा आपको बहुत प्यार करते है। अब तुम सो जाओ।’

एक हफ्ते बाद फिर कहानी सुनाने के बाद जीया के पिता ने उससे दोबारा पूछा, ‘क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?’

‘पापा, आपको पता है कि मैं आपसे प्यार करती हूं।’

फिर तुम मुझे अपना मोतियों का हार दे दो।’

 

‘पापा, कृपया मेरा मोतियों का हार मत मांगो। आप मेरी बेबी गुड़िया ले सकते हो, जो नई है जो आपने मेरे जन्मदिन पर दी थी। वह बहुत सुंदर है और आप उसके साथ पीले रंग का कंबल और उसके मिलते जुलते जूते भी ले सकते हो।’

‘कोई बात नहीं बेटा, भगवान तुम पर कृपा बनाए रखे। तुम्हारे पिता तुम से बहुत प्यार करते है।’ हमेशा की तरह उसके पिता ने उसे प्यार से सुला दिया।

कुछ रातें गुजरने के बाद जब पिता जीया के कमरे में गए तो जीया अपने पलंग पर चैंकड़ी मार कर बैठी थी।

जब पिता जीया के पास गए तो उन्होंने देखा कि जीया कांप रही थी और एक आंसू उसके गाल पर आकर गिरा। पिता ने पूछा, ‘क्या हुआ जीया? क्या बात है?’

जीया ने कुछ नहीं कहा और अपना छोटा सा हाथ पिता की तरफ बढ़ाया। जब उसने अपना हाथ खोला तो उसमें उसका छोटा मोतियों का हार था। हौंसला करके उसने आखिरकार कहा, ‘पापा, यह आपके लिए।’
यह देखकर पिता की आंखों में भी आंसू आ गए और उन्होंने एक हाथ से उस मोतियों के हार को लिया और अपने दूसरे हाथ को जेब में डालते हुए एक नीले रंग का डिब्बा निकाला जिसमें असली मोतियों की माला थी और उन्होंने उसे जीया को दे दिया।’

वह इस डिब्बे को अपने पास हमेशा रखते थे। वह सिर्फ इस बात का इंतज़ार कर रहे थे कि उनकी बेटी उन्हें नकली हार दे दे ताकि वह उसे असली मोतियों का हार दे सके।

इसी तरह भगवान हमारे साथ करते है। भगवान इंतज़ार करते है कि हम अपनी ज़िंदगी में खराब चीज़ों को त्याग दे ताकि वह हमें खूबसूरत चीजें दे सके।

क्या आप उन चीज़ों को रोक कर रख रहे है जो भगवान चाहते है कि आप छोड़ दे?

कभी कभी यह देखना मुश्किल हो जाता है कि दूसरे हाथ में क्या है लेकिन एक बात का विश्वास रखो कि भगवान हमें हमेशा सर्वश्रेष्ठ चीज़ देते है

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