शेर और तीन बैलों की कहानी: एकता में शक्ति
एक बार की बात है, जंगल में तीन बैल रहते थे। वे बहुत अच्छे दोस्त थे और हमेशा साथ रहते थे। जहां भी जाते, साथ में चरते, खेलते, और एक-दूसरे का ध्यान रखते। उनकी एकता और दोस्ती इतनी गहरी थी
एक बार की बात है, जंगल में तीन बैल रहते थे। वे बहुत अच्छे दोस्त थे और हमेशा साथ रहते थे। जहां भी जाते, साथ में चरते, खेलते, और एक-दूसरे का ध्यान रखते। उनकी एकता और दोस्ती इतनी गहरी थी
इस कहानी (Everyone has their own habits) एक भला आदमी रोज़ बिल्लियों को रोटियां देता था, लेकिन उनकी लड़ाई के कारण बंदर रोटियां ले जाते। उन्हें सबक सिखाने के लिए उसने बंदरों को रोटियां देना शुरू किया।
बहुत समय पहले की बात है। एक शांत और सुंदर झील के किनारे एक हंस और उल्लू रहते थे। दोनों में गहरी दोस्ती थी और वे साथ में अपना समय खुशी-खुशी बिताते थे। दिन के समय हंस झील में तैरता और उल्लू पेड़ की शाखाओं पर आराम करता।
एक घने जंगल के किनारे, बांस की झाड़ियों के बीच चुहिया रानी का छोटा सा घर था। चुहिया रानी, जो सबकी प्यारी और शरारती थी, दिन भर इधर-उधर उछल-कूद करती रहती।
एक घना जंगल था, जहाँ अलग-अलग तरह के जानवर रहते थे। उसी जंगल में मोनू नाम का एक चालाक बंदर भी रहता था। मोनू अपनी शरारतों और चतुराई के लिए पूरे जंगल में मशहूर था।
किसी घने जंगल में एक बहुत बड़ा पेड़ था। उस पेड़ पर कई बगुलों के परिवार बसे हुए थे। बगुले दिनभर तालाबों और नदियों के किनारे जाकर मछलियां पकड़ते और अपना जीवन खुशी-खुशी बिताते।
नए साल की पहली किरण जैसे ही आसमान में टिमटिमाने लगी, गुलमोहर के पेड़ पर सोया किटू बंदर तुरंत जाग गया। उछलकर जोर से चिल्लाया, "जंगल के सभी प्राणियों की ओर से, सूरज दादा, मैं तुम्हें बधाई देता हूं।"