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ऑपरेशन कटहल: प्रोफेसर गोलू का साइंस एक्सपेरिमेंट

गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों ने कटहल पाने की तरकीब कैसे लगाई? पढ़िए यह गुदगुदाने वाली कहानी जहाँ 'मिशन कटहल' और खड़ूस काका की तकरार है। (बच्चों के लिए मजेदार कहानी)

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ऑपरेशन कटहल:

यह कहानी सिर्फ एक कटहल (Jackfruit) के बारे में नहीं है, बल्कि उस "मिशन" के बारे में है जो हर बच्चा अपनी गर्मियों की छुट्टियों में कभी न कभी जरूर प्लान करता है। यह कहानी है बंटी, गोलू और उनकी 'वानर सेना' की, जिनका मुकाबला मोहल्ले के सबसे गुस्से वाले गणपत काका से है। क्या उनकी कटहल पाने की तरकीब काम करेगी? आइए जानते हैं।

 गणपत काका का ललचाने वाला हरा कटहल

मई की दोपहर थी। सूरज आग बरसा रहा था, लेकिन 'शांति नगर' के बच्चों को गर्मी का कोई असर नहीं था। उनका सारा ध्यान सिर्फ एक ही चीज़ पर था—गणपत काका के आंगन में लगा कटहल का पेड़।

गणपत काका मोहल्ले के वो बुजुर्ग थे जो अपनी गेंद वापस मांगने गए बच्चे को गेंद तो नहीं देते थे, ऊपर से दो घंटे का भाषण मुफ्त में देते थे। उनके बगीचे में एक पुराना कटहल का पेड़ था, और उस पर लटका था—"महा-कटहल"।

वह कोई मामूली कटहल नहीं था। वह आकार में इतना बड़ा था कि लगता था जैसे पेड़ ने जिम जाकर मसल्स बनाए हों। कम से कम 10 किलो का वह हरा, कांटेदार फल बंटी और उसकी गैंग को ललचा रहा था।

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"यार बंटी," गोलू ने अपनी नाक पर चढ़े चश्मे को ठीक करते हुए कहा, "अगर उस कटहल की सब्जी बने, तो पूरा हफ्ता चल जाएगी। और अगर पका हुआ निकला, तो मज़ा ही आ जाएगा।"

बंटी, जो इस गैंग का लीडर था, ने अपनी गुलेल जेब में रखते हुए कहा, "सब्जी नहीं गोलू, इज़्ज़त का सवाल है। कल काका ने मेरी क्रिकेट बॉल ज़ब्त कर ली थी। अब तो यह कटहल ही हमारा बदला है।"

कटहल तोड़ने की बच्चों की नाकाम कोशिशें

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कटहल पाना आसान नहीं था। गणपत काका के पास एक कुत्ता था—'शेरू', जो सोता कम था और भौंकता ज़्यादा था।

प्लान A: पिंकी (गैंग की सबसे समझदार लड़की) ने सलाह दी कि रात को चुपके से जाकर तोड़ लाते हैं। परिणाम: रात को जैसे ही बंटी दीवार पर चढ़ा, काका के घर की ऑटोमैटिक लाइट जल गई और शेरू ने ऐसा कोरस शुरू किया कि बंटी को चप्पल हाथ में लेकर भागना पड़ा।

प्लान B: गोलू ने डंडे से कटहल गिराने की कोशिश की। परिणाम: डंडा कटहल को तो नहीं लगा, लेकिन काका की सूख रही धोती पर जा गिरा। काका ने डंडा भी रख लिया और धोती गंदी होने का हर्जाना भी माँगा।

अब ज़रूरत थी एक सॉलिड, फुल-प्रूफ कटहल पाने की तरकीब की। ऐसी तरकीब जिसमें लाठी भी न टूटे और साँप भी मर जाए (यानी कटहल मिल जाए और काका को पता भी न चले)।

कटहल पाने की तरकीब: बच्चों का मास्टर प्लान

सभी बच्चे पुराने बरगद के पेड़ के नीचे जमा हुए। बंटी ने গম্ভীর होकर कहा, "हिंसा और चोरी से काम नहीं बनेगा। हमें 'साइकोलॉजी' (मनोविज्ञान) का इस्तेमाल करना होगा।"

"साइको-क्या?" छोटे चिंटू ने पूछा।

"दिमाग, मेरे भाई, दिमाग!" बंटी ने अपनी शर्ट की कॉलर ठीक की। "गणपत काका को अपनी चीज़ों से बहुत प्यार है, है न? लेकिन उन्हें किस चीज़ से डर लगता है?"

"डॉक्टर से!" पिंकी चिल्लाई। "बीमारी से!" गोलू बोला। "नुकसान से!" बंटी मुस्कुराया। "यही है हमारी चाबी।"

बंटी ने अपना प्लान समझाया। यह प्लान रिस्की था, लेकिन इसमें ड्रामा भरपूर था। इसके लिए उन्हें थोड़ी एक्टिंग और थोड़ी साइंस की ज़रूरत थी।

प्रोफेसर गोलू का अनोखा साइंस एक्सपेरिमेंट

अगली सुबह, जब गणपत काका अपने बरामदे में अखबार पढ़ रहे थे, तभी बंटी और गोलू उनके गेट पर पहुँचे। लेकिन वे अपनी सामान्य ड्रेस में नहीं थे।

गोलू ने अपने पापा का पुराना बड़ा सा लैब-कोट (Lab Coat) पहन रखा था जो उसके घुटनों तक आ रहा था। आँखों पर स्विमिंग गॉगल्स थे और हाथ में एक खिलौने वाला स्टेथोस्कोप। बंटी ने एक फाइल पकड़ी हुई थी और कानों पर पेन लगा रखा था।

"काका! काका! बाहर आइए, गज़ब हो गया!" बंटी ने घबराते हुए आवाज़ लगाई।

गणपत काका अखबार नीचे करते हुए बाहर आए, "क्या हुआ? क्यों चिल्ला रहे हो सुबह-सुबह?"

गोलू (प्रोफेसर की आवाज़ में): "काका, हम स्कूल के 'वनस्पति विज्ञान' (Botany) प्रोजेक्ट के लिए सर्वे कर रहे थे। हमारे पास यह 'रेडिएशन मीटर' है।" (गोलू ने हाथ में पकड़ा हुआ एक पुराना टीवी का रिमोट दिखाया)।

"तो मैं क्या करूँ?" काका ने गुस्से से पूछा।

बंटी ने गंभीर चेहरा बनाया, "काका, मीटर बता रहा है कि आपके पेड़ का वह बड़ा वाला कटहल... वह 'एक्सप्लोसिव' (विस्फोटक) हो गया है!"

"क्या बकवास है?" काका ने हँसते हुए कहा।

गोलू ने रिमोट को पेड़ की तरफ किया और मुंह से बीप-बीप-बीप की आवाज़ निकाली। "देखिए काका! रीडिंग बहुत हाई है। इस कटहल में 'गैसियस-फूला-नाइट्रस' भर गया है। अगर यह अगले 2 घंटे में पेड़ से अलग नहीं किया गया, तो यह फट सकता है! और अगर यह फटा... तो आपकी दीवार..."

बंटी ने बात पूरी की, "...और आपके प्यारे गेंदे के फूल... सब तबाह हो जाएंगे!"

गणपत काका का डर और कटहल बम

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गणपत काका को साइंस की समझ तो नहीं थी, लेकिन 'दीवार' और 'गेंदे के फूल' के नुकसान का सुनकर उनके पसीने छूट गए। वह कटहल को गौर से देखने लगे। संयोग से, कटहल इतना पक चुका था कि उस पर एक-दो दरारें दिख रही थीं।

"देखो गोलू... मतलब डॉक्टर साहब," काका ने घबराते हुए कहा, "तुम्हारी मशीन ठीक तो है न?"

गोलू ने चश्मा ठीक किया, "काका, यह मशीन नासा... नहीं, 'नासिक' से मंगवाई है। आप रिस्क मत लीजिए। यह कभी भी 'धड़ाम' हो सकता है।"

तभी पिंकी, जो झाड़ियों के पीछे छिपी थी, ने एक फटे हुए गुब्बारे की आवाज़ निकाली—फिस्सस्स!

काका उछल पड़े। "अरे बाप रे! यह तो आवाज़ भी कर रहा है!"

"देखा!" बंटी चिल्लाया। "काका, इसे तुरंत हटाना होगा। लेकिन इसे छूना खतरनाक है। इसके लिए एक्सपर्ट चाहिए।"

गणपत काका ने हाथ जोड़ लिए, "बेटा बंटी, तुम ही कुछ करो। इसे ले जाओ, दूर फेंक दो। मेरी दीवार बचा लो!"

मिशन कटहल सफल: बच्चों की दावत

बंटी और गोलू ने एक-दूसरे को देखा और अपनी हंसी दबाई। "ठीक है काका, हम अपनी जान जोखिम में डालकर इसे हटाएंगे। आप अंदर जाइए, रेडिएशन का असर हो सकता है," बंटी ने चेतावनी दी।

काका तुरंत घर के अंदर भाग गए और खिड़की बंद कर ली।

मैदान साफ़ था। शेरू सो रहा था (उसे शायद रिश्वत में बिस्कुट मिल चुके थे)। बंटी और उसकी गैंग ने मिलकर उस भारी-भरकम 'महा-कटहल' को पेड़ से उतारा। उसे इज़्ज़त के साथ एक बोरे में रखा और ऐसे चले जैसे कोई बम डिफ्यूज़ करने ले जा रहे हों।

जैसे ही वे काका की नज़र से ओझल हुए, उनकी चाल बदल गई। वे दौड़ते हुए पिंकी के घर के पीछे वाले बगीचे में पहुँचे।

निष्कर्ष: दावत और सीख

उस दोपहर, पिंकी की मम्मी (जो कटहल बनाने में एक्सपर्ट थीं) ने दुनिया की सबसे बेहतरीन कटहल की सब्जी और कोफ्ते बनाए। बच्चों ने पेट भर के खाया।

शाम को जब गणपत काका बाहर निकले, तो उन्होंने देखा कि पेड़ खाली है और दीवार सुरक्षित है। उन्होंने राहत की सांस ली। तभी बंटी वहां से गुज़रा।

"बेटा, वो 'बम' ठीक से फट गया था न?" काका ने पूछा। बंटी ने पेट पर हाथ फेरते हुए डकार ली, "जी काका, बहुत ज़बरदस्त धमाका था। पूरा का पूरा 'ख़त्म' हो गया!"

काका खुश थे कि दीवार बच गई, और बच्चे खुश थे कि दावत हो गई।

इस कहानी से सीख (Moral)

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि ताकत से बड़ा दिमाग होता है। जहाँ लाठी काम न आए, वहां अक्ल और थोड़ी सी मीठी बातों (या एक्टिंग) से काम बन जाता है। (लेकिन ध्यान रहे, झूठ बोलना बुरी बात है, सिवाय तब जब 'मिशन कटहल' चल रहा हो!)

Wikipedia Link

अधिक जानकारी के लिए देखें: कटहल (Jackfruit) - विकिपीडिया

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