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आलू बोला मुझको खा लो | स्वस्थ भोजन पर बाल कविता

“आलू बोला मुझको खा लो” एक मज़ेदार हिंदी बाल कविता है, जो बच्चों को सब्ज़ियाँ खाने और स्वस्थ रहने की सीख देती है। इस कविता में सब्ज़ियों को बोलते हुए दिखाया गया है, जिससे बच्चे आसानी से उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं।

By Lotpot
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“आलू बोला मुझको खा लो” एक रोचक और शिक्षाप्रद हिंदी बाल कविता है, जो बच्चों को खेल-खेल में स्वस्थ भोजन (healthy food) का महत्व समझाती है। इस कविता में सब्ज़ियों को बोलते हुए दिखाया गया है, जिससे बच्चे आसानी से उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। आलू, पालक, गोभी, मटर और टमाटर जैसे रोज़मर्रा के खाद्य पदार्थ बच्चों से सीधे बात करते हैं और बताते हैं कि वे शरीर को कैसे मज़बूत और स्वस्थ बनाते हैं।

आज के समय में, जब बच्चे जंक फूड की ओर ज़्यादा आकर्षित हो रहे हैं, ऐसी कविताएँ उन्हें संतुलित आहार (balanced diet) की ओर प्रेरित करती हैं। यह कविता सरल शब्दों और तुकबंदी के माध्यम से यह संदेश देती है कि सही खान-पान से न सिर्फ शरीर मज़बूत होता है, बल्कि बच्चा आत्मविश्वासी बनता है और जीवन में आगे बढ़ता है।

यह कविता नर्सरी, केजी और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए बेहद उपयोगी है। शिक्षक इसे स्वास्थ्य शिक्षा, खाद्य जागरूकता और मौखिक पाठ (recitation) के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। माता-पिता भी इस कविता के ज़रिए बच्चों को सब्ज़ियाँ खाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। सरल भाषा, मज़ेदार संवाद और सकारात्मक संदेश इसे एक आदर्श बाल कविता बनाते हैं। 

कविता: आलू बोला मुझको खा लो

आलू बोला मुझको खा लो,
मैं तुमको मोटा कर दूँगा।

पालक बोली मुझको खा लो,
मैं तुमको ताकत दे दूँगी।

गोभी, मटर, टमाटर बोले,
अगर हमें भी खाओगे।

खूब बड़े हो जाओगे,
जग में नाम कमाओगे।

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