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बचपन कल्पनाओं की दुनिया होता है, जहाँ बच्चे खुद को कभी राजा, कभी परी, तो कभी आसमान में उड़ता महसूस करते हैं। ऐसी ही मासूम और कल्पनात्मक भावनाओं को शब्दों में ढालती है यह कविता “आसमान की परी”। यह कविता बच्चों की कोमल सोच, उनकी उड़ती कल्पना और प्रकृति से जुड़े सपनों को बहुत ही सरल और मधुर भाषा में प्रस्तुत करती है।
आज के समय में जब बच्चे मोबाइल और स्क्रीन तक सीमित हो रहे हैं, तब हिंदी बाल कविताएँ उनके मन को रचनात्मकता की ओर मोड़ने का काम करती हैं। इस कविता में परी का रूप बच्चों के मन की स्वतंत्रता और कल्पनाशीलता का प्रतीक है। वह कभी चाँद नगर की रहने वाली बनती है, कभी हवा से बातें करती है और कभी नीले गगन में उड़ती हुई नजर आती है।
यह कविता न सिर्फ बच्चों को आनंद देती है, बल्कि उनकी भाषा-समझ, कल्पना शक्ति और भावनात्मक विकास में भी सहायक है। स्कूलों में कविता पाठ, गृहकार्य, मंचीय प्रस्तुतियों और बच्चों की पत्रिकाओं के लिए यह कविता बेहद उपयुक्त है।
आसमान की परी
मैं शहजादी परियों की हूँ,
आसमान में मेरा घर।
राहों में मेरी बिछे सितारे,
मेरा पता है चाँद नगर।
मैं कलियों-सी सुंदर कोमल,
चाहूँ जहाँ पर जाती हूँ।
हवा के संग मैं बातें करती,
नीले गगन में उड़ती हूँ।
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