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बचपन (Childhood) जीवन का सबसे उजला और आशा से भरा चरण होता है। बच्चे केवल अपने परिवार की खुशी नहीं होते, बल्कि समाज और देश का भविष्य भी होते हैं। “बच्चे उजियारा बांटे” कविता बच्चों की उसी मासूम दुनिया को दर्शाती है जहाँ सपने बड़े होते हैं और कदम छोटे, लेकिन हौसला आसमान जितना ऊँचा होता है। यह कविता नन्हे बच्चों की जिज्ञासा, ऊर्जा, उत्साह और समानता की भावना को खूबसूरती से प्रस्तुत करती है।
आज के समय में जब शिक्षा (education), सपने (dreams) और आत्मविश्वास (confidence) बच्चों के विकास के महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं, ऐसी कविताएँ उन्हें प्रेरित करती हैं कि वे बिना डर आगे बढ़ें। कविता यह संदेश देती है कि हर बच्चा रोशनी का स्रोत है। वे भेदभाव नहीं जानते, उनके लिए पूरी दुनिया एक खेल का मैदान है जहाँ सीखना, समझना और मुस्कुराना सबसे बड़ा लक्ष्य है।
यह रचना बच्चों में सकारात्मक सोच, बराबरी की भावना और मेहनत का महत्व सिखाती है। माता-पिता और शिक्षकों के लिए भी यह कविता एक याद दिलाती है कि हर बच्चा अपने भीतर उजाला लेकर चलता है, बस उसे सही दिशा और प्यार की जरूरत है।
बच्चे उजियारा बांटे
पीठ पे बस्ता भारी लेकर,
और आँखों में ख्वाब,
घर से निकले नन्हे बच्चे,
लेने कई जवाब।
छोटे-छोटे कदमों से,
नापेंगे पूरी दुनिया,
कोई न होगा पीछे,
मुन्ना हो या मुनिया।
अचरज और उत्साह है भीतर,
चेहरे पर मुस्कान,
चुटकी में ये कर देंगे,
हर मुश्किल आसान।
आसमान का सूरज हैं ये,
बांटें बस उजियारा,
भेदभाव ये नहीं जानते,
इनका है जग सारा।
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