Fun Stories: दोहरी दृष्टि
यह कहना बहुत मुश्किल था कि नीति की दोहरी दृष्टि थी। उसकी एक पल के लिए दोहरी दृष्टि होती थी और दूसरे ही पल ठीक हो जाती थी। एक दिन अचानक सड़क पर काफी भीड़ हो गई।
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यह कहना बहुत मुश्किल था कि नीति की दोहरी दृष्टि थी। उसकी एक पल के लिए दोहरी दृष्टि होती थी और दूसरे ही पल ठीक हो जाती थी। एक दिन अचानक सड़क पर काफी भीड़ हो गई।
एक शाम दो लड़के खेल रहे थे तभी अचानक उनके सामने परी आ गई और बोली, ‘मुझे तुम लोगों को नए साल का तोहफा देने के लिए भेजा गया है।’उस परी ने जल्दी से दोनों बच्चों को तोहफा दिया और वहाँ से चली गई।
चेयरमैन के बारे में यह मशहूर था कि वे एक बहुत साधारण परिवार से थे और सभी विद्यार्थी उनकी कहानी सुनने को उत्सुक थे। रंगारंग समारोह के बाद पढ़ाई, कला और खेल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों को इनाम बाँटा गया।
प्रेरणादायक कहानी; बहुत पुरानी कहानी है, एक गांव में एक बुढ़ी अम्मा रहती थी जो माँ दुर्गा की अनन्य भक्त थी। । उन्हें आँखों से दिखाई नहीं देता था लेकिन वे सारा दिन मंदिर में, माँ दुर्गा की भक्ति आराधना में लीन रहती थी। उनकी भक्ति और निष्ठा देखकर आखिर माँ दुर्गा प्रसन्न हुई और एक दिन बूढ़ी अम्मा के सामने प्रकट होकर बोली, "मैं आपकी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ, इसलिए आपको वरदान देना चाहती हूँ, लेकिन आप मुझसे सिर्फ एक वरदान माँग सकती हैं।"
एक दिन अननु अपने पिता के साथ अपनी मौसी से मिलने जा रही तीजो की उत्तरी दिल्ली मए रहती है। तभी अननु को एक बड़ा सा पहाड़ दिखा ।अननु: पापा प्लीज
ज्ञान देती एक कहानी : बेटे राजीव के एमबीए परीक्षा का रिज़ल्ट आने वाला था। सुबह से मां इंतज़ार कर रही थी कि कब बेटा परीक्षा परिणाम लेकर घर आए। माँ ने उपवास भी रख लिया और भगवान के सामने मन्नत भी मांग ली कि अगर बेटा अच्छे नंबरों से अपनी एम बी ए की परीक्षा पास कर ले तो वो और तीन दिन का उपवास रख लेगी।
स्कूल की कहानी - ईर्ष्या का फल :- गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल फिर से खुल गये थे। राम जो कि अपनी कक्षा में हमेशा सर्व प्रथम आता था। हर साल की तरह इस बार भी सर्व प्रथम आकर अगली कक्षा में चला गया था। जैसा कि हर साल अक्सर होता है, और हर साल कक्षा में नये लड़के आते हैं कुछ छोड़ कर चले जाते हैं।
सीख देती कहानी : औकात की सीख - एक समय की बात है, एक शहर में एक लालची और अमीर सेठ रहता था। नाम था उसका धन्ना सेठ। अपनी विशाल संपत्ति के बावजूद, वो हमेशा अधिक पैसा कमाने के तरीके सोचा करता था और किसी भी चीज को बेचते और खरीददे समय दुकानदार से तोल मोल को लेकर बहुत बहस करता था। एक दिन, उसका ध्यान अपने पुराने सामान, कपड़े और कबाड़ की ओर गया, जो उसके भव्य हवेली के कबाड़खाने में पड़ा था।