बाल कहानी - अपने डर की वजह से पीछे मत हटो
यह बाल कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो ज्योतिषी (astrologer) की भविष्यवाणी (prediction) से डरकर खुद को कमरे में बंद कर लेता है। मगर नियति (destiny) को कोई नहीं टाल सकता।
यह बाल कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो ज्योतिषी (astrologer) की भविष्यवाणी (prediction) से डरकर खुद को कमरे में बंद कर लेता है। मगर नियति (destiny) को कोई नहीं टाल सकता।
हीरालाल के माता-पिता का देहांत बिजली गिरने से हो गया। ज़मींदार ने दया दिखाते हुए उसे आश्रय और भोजन दिया, लेकिन सभी घरेलू काम भी करवाए। कुछ वर्षों बाद, हीरालाल को खेत में भी काम करना पड़ा। साथी मजदूर के आलसी रवैये के बावजूद हीरालाल ने मेहनत जारी रखी।
एक बार की बात है। महर्षि रमण (Maharshi Ramana) अपने आश्रम में शांत और ध्यानमग्न बैठे थे। वहाँ पर फूलों की खुशबू और पत्तों की सरसराहट के बीच अध्यात्म की गूंज थी।
गर्मी से परेशान मोंटी बंदर ने सूरज से गुस्से में उलझ कर उसे नाराज कर दिया। सूरज के छुपने से बारिश कई हफ्तों तक होती रही और जंगल में परेशानियाँ बढ़ गईं। बाद में मोंटी ने अपनी गलती मानी और माफी माँगी। सूरज ने उसे माफ कर दिया और फिर से चमक उठा।
सेठ ने नया पाजामा सिलवाया लेकिन वह चार अंगुल बड़ा था। उसने पत्नी, बहू और बेटी से कहा कि पाजामा छोटा कर दें। सभी ने अलग-अलग समय पर चार-चार अंगुल काट दिए। जब सेठ वापस आया, तो पाया कि पाजामा बहुत छोटा हो गया है और बेकार हो गया।
रानी चींटी (Rani the ant) बहुत दिनों से अपने परिवार के साथ सुख-शांति से रह रही थी। वह रोज़ाना अपने दोस्तों के साथ भोजन इकट्ठा करने जाती और खुशी-खुशी वापस घर लौटती। लेकिन एक दिन अचानक सब कुछ बदल गया।
स्वामी दयानन्द सरस्वती (Swami Dayanand Saraswati) का जीवन ही ज्ञान, संस्कार और भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित था। एक बार जब वह कलकत्ता (Kolkata) पहुँचे,