Moral Story: सम्मान के चक्कर में
एक था गधा, उसका नाम झब्बू था। वह सुबह-सुबह गन्दे कपड़ों का ढ़ेर पीठ पर लादकर नदी के घाट पर पहुँच जाता। दिन भर वह नदी किनारे घास चरता था फिर नदी के जल में ही अपना रूप निहारा करता।
एक था गधा, उसका नाम झब्बू था। वह सुबह-सुबह गन्दे कपड़ों का ढ़ेर पीठ पर लादकर नदी के घाट पर पहुँच जाता। दिन भर वह नदी किनारे घास चरता था फिर नदी के जल में ही अपना रूप निहारा करता।
एक संत को अपना भव्य आश्रम बनाने के लिए धन की जरूरत पड़ी। वह अपने शिष्य को साथ लेकर धन जुटाने के लिए लोगों के पास गए। घूमते-घूमते वह सूफी संत राबिया की कुटिया में पहुँचे।
एक गुरूजी गुरूकुल में बालकों को शिक्षा प्रदान किया करते थे। वहां बड़े-छोटे सभी घरों के बच्चे पढ़ते थे। शिष्यों की शिक्षा आज पूर्ण हो रही थी। सभी घर लौटने की तैयारी कर रहे थे कि तभी गुरू जी वहां आ गए।
एक राजा ब्राह्मणों को महल के आँगन में भोजन करा रहा था। राजा का रसोइयां खुले आँगन में भोजन पका रहा था।उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के ऊपर से गुजरी।
बहुत दिन पहले, उत्तर भारत के एक गांव में एक गरीब मजदूर रहता था। वह गांव बहुत घने जंगलों और पहाड़ों के किनारे बसा हुआ था, इसलिए अक्सर जंगलों में रहने वाले डाकू रात के समय इस गांव पर धावा बोल दिया करते थे।
कौशिकांबा नगर में राजा रवि एक प्रतापी, दयालु न्यायप्रिय व महान धार्मिक स्वभाव के राजा थे। वे प्रतिदिन प्रायः स्नानादि से निवृत होकर पूजापाठ में काफी समय लगाते, जब कहीं राज्य कार्य में जुटते थे।
अकबर ने अपना शासन तेरह साल की उम्र में संभाला था। अपने शासन में अकबर ने कई बड़े अंपायर बनाए। वह अकल्पनीय चमक में रहते थे। उनके आसपास ढेरों सेवक रहते थे और उनके सेवक उनके हर शब्द को मानते थे।