छूटी मेरी रेल कविता – बच्चों के लिए मजेदार ट्रेन कविता हिंदी में
कविता “छूटी मेरी रेल” बच्चों के लिए बेहद मजेदार और कल्पनाशील कविता है। इसमें रेलगाड़ी (Train) का सफर और उसकी आवाज़ों को इतनी खूबसूरती से पिरोया गया है
कविता “छूटी मेरी रेल” बच्चों के लिए बेहद मजेदार और कल्पनाशील कविता है। इसमें रेलगाड़ी (Train) का सफर और उसकी आवाज़ों को इतनी खूबसूरती से पिरोया गया है
बचपन की दुनिया कितनी रंगीन होती है। न कोई चिंता, न कोई बोझ, बस हंसी-खुशी और ढेर सारी शरारतें। कविता “बहती नदिया छप-छप पानी” बच्चों के इन्हीं सुनहरे पलों को याद दिलाती है।
सुबह का समय बच्चों के लिए नई ऊर्जा (new energy) और ताज़गी (freshness) लेकर आता है। जैसे ही सूरज उगता है और चिड़ियाँ चहचहाती हैं, वैसे ही बच्चे भी मुस्कान के साथ दिन की शुरुआत करते हैं। यह प्यारी कविता “हुआ सवेरा” हमें अच्छे आदतों
यह कविता “बादल प्यारे” बच्चों की कल्पना और मासूम सवालों को बहुत सुंदर ढंग से सामने लाती है। इसमें बच्चा बादल से सीधे संवाद करता है और उसे एक दोस्त की तरह मानकर बातें करता है। बच्चा बादल से पूछता है कि बिना पंख के वह कैसे उड़ जाता है
बच्चों, हर सुबह हमारे लिए एक नई शुरुआत लेकर आती है। जब मुर्गा बांग देता है, सूरज की लालिमा आसमान में फैलती है और पक्षी चहचहाने लगते हैं, तो यह हमें जगाने और दिन की नई ऊर्जा देने का संदेश होता है।
बाल कविता -कोयल:- वसंत ऋतु का मौसम हो और पेड़ों पर नए-नए पत्ते खिलें, तो जंगल और बग़ीचों में एक खास आवाज़ गूंजने लगती है – कूऊ-कूऊ। यह होती है कोयल की मधुर पुकार। काले रंग की यह नन्हीं सी चिड़िया हरे पत्तों में छुपकर
काले मेघा पानी दे: एक मनोरंजक कविता- प्रकृति की सुंदरता और बच्चों की जिज्ञासा को एक साथ पिरोती हुई, "काले मेघा पानी दे" एक ऐसी कविता है जो छोटे-छोटे बच्चों के दिलों में खुशी और उत्साह भर देती है।