Jungle Story: उन्मत्त हाथी को सिखाया सबक
एक बार की बात है, घने जंगल में एक उन्मत्त हाथी ने भारी उत्पात मचा रखा था। वह अपनी ताकत के नशे में चूर होने के कारण किसी को कुछ नहीं समझता था। एक पेड़ पर एक चिड़िया व चिड़े का छोटा-सा सुखी संसार था।
एक बार की बात है, घने जंगल में एक उन्मत्त हाथी ने भारी उत्पात मचा रखा था। वह अपनी ताकत के नशे में चूर होने के कारण किसी को कुछ नहीं समझता था। एक पेड़ पर एक चिड़िया व चिड़े का छोटा-सा सुखी संसार था।
बंटी आज जब स्कूल से आया तो फिर उसने घर पर ताला देखा। घर की सीढ़ियों पर वह अपना बैग रख कर बैठ गया। उसे भूख लगी थी और वह थका हुआ भी था। वह सोचने लगा, काश मेरी माँ भी राजू की माँ की तरह ही घर पर ही होती।
एकबार एक आदमी रेगिस्तान में कहीं भटक गया। उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी-बहुत चीजें थीं वो जल्द ही खत्म हो गयीं और पिछले दो दिनों से वो पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था। वह मन ही मन जान चुका था।
एक अमीर आदमी का सिर्फ एक बेटा था। उसका बेटा बुरी संगत में पड़ गया था। उसमें बुरी आदतें आ गई थीं। वह आदमी अपने बेटे की आदतों से बहुत चिंतित था। उसने पूरी कोशिश की कि वह अपने बेटे की बुरी आदतों को सुधार सके।
एक बूढ़ा रास्ते से कठिनता से चला जा रहा था। उस समय हवा बड़े ज़ोरों से चल रही थी। अचानक उस बूढ़े का हैट हवा से उड़ गया। उसके पास ही दो लड़के स्कूल जा रहे थे। उनसे बूढ़े ने कहा- मेरा हैट उड़ गया है, उसे पकड़ो।
गाँव के स्कूल में पढ़ने वाली छुटकी आज बहुत खुश थी, उसका दाखिला शहर के एक अच्छे स्कूल के क्लास 6 में हो गया था। आज स्कूल का पहला दिन था और वो समय से पहले ही तैयार होकर बस का इंतज़ार कर रही थी।
नदी किनारे एक विशाल पेड़ था। उस पेड़ पर बगुलों का बहुत बड़ा झुंड रहता था। उसी पेड़ के कोटर में काला नाग रहता था। जब अंडों से बच्चे निकल आते और जब वह कुछ बड़े होकर मां-बाप से दूर रहने लगते, तभी वह नाग उन्हें खा जाता था।