Motivational Story: ममता का जादू
छत्रपति शिवाजी एक कुशल शासक होने के साथ ही साथ अनुशासन प्रिय योद्धा भी थे। अपने किलों की सुरक्षा और सैनिक व्यवस्था के प्रति उनकी सजग दृष्टि रहती थी। उनके किलों में रायगढ़ का किला सबसे महत्वपूर्ण था।
छत्रपति शिवाजी एक कुशल शासक होने के साथ ही साथ अनुशासन प्रिय योद्धा भी थे। अपने किलों की सुरक्षा और सैनिक व्यवस्था के प्रति उनकी सजग दृष्टि रहती थी। उनके किलों में रायगढ़ का किला सबसे महत्वपूर्ण था।
मनजीत के घर में चुनमुन की मीटिंग चल रही थी कि अचानक किशोर अंकल सबको छकाते हुए वहाँ आ पहुँचे, किशोर अंकल को अपने बीच पाकर क्लब के सभी सदस्य हक्का-बक्का रह गये अतः मंटू पूछ ही बैठा- ‘अंकल, आप और यहाँ।’
रात का दूसरा पहर था। गाँव में चारों तरफ सन्नाटा था। केवल झींगुरों का स्वर सुनाई पड़ रहा था। हर रात की भांति गोविन्द लाल की दुकान के बरामदे में एक पहरेदार पहरेदारी कर रहा था। पहरेदार अंधा था।
शोभन अपने पिता के पास गया जो काम करने के लिए निकल ही रहे थे। उसने कहा, ‘पापा, पापा’ आपके बाद जीतू चाचा मेरे सबसे प्रिय मित्र हैं।’ ‘वह ठीक है, लेकिन उन्होंने क्या किया है?’
राजा कृष्णा राय ने एक बहुत सुंदर महल बनवाया। उन्होंने अपने महल की एक दीवार पर सुंदर सुंदर चित्रकारी लगाने का फैसला किया। चित्रकारी खत्म होने के बाद चित्रकार राजा के पास गया।
एक लड़का था जिसका नाम सुरेश था, वह बहुत गरीब था। लेकिन गरीब होने के बावजूद वह बहुत उम्दा कलाकार था। उसने कई पेंटिंग्स बनाई जिसके लिए लोगों ने उसे बहुत सराहा। लेकिन एक समस्या थी।
एक दिन एक राजा शहर की तरफ जा रहा था। रास्ते में वह एक किसान से मिला और अपनी प्रजा के लिए चिंतित रहने वाले राजा ने उस किसान से पूछा कि वह कितना कमा लेता है? उस किसान ने उत्तर दिया, ‘महाराज, मैं एक दिन में चार सिक्के कमा लेता हूं।’