बैल की कहानी: मेहनत, मूर्खता और समझदारी की सीख
Web Stories यह कहानी नवनीत और उसके दादा जी की है, जहां दादा जी उसे बैल की मेहनत और मूर्खता की कथा सुनाते हैं। बैल मेहनती थे, लेकिन पुआल को चुनकर
Web Stories यह कहानी नवनीत और उसके दादा जी की है, जहां दादा जी उसे बैल की मेहनत और मूर्खता की कथा सुनाते हैं। बैल मेहनती थे, लेकिन पुआल को चुनकर
यह कहानी नवनीत और उसके दादा जी की है, जहां दादा जी उसे बैल की मेहनत और मूर्खता की कथा सुनाते हैं। बैल मेहनती थे, लेकिन पुआल को चुनकर अपनी मूर्खता साबित कर दी। कहानी सिखाती है कि मेहनत के साथ समझदारी भी जरूरी है, तभी सच्ची सफलता मिलती है।
बाप-बेटा दोनों धार्मिक प्रवृत्ति के थे। जब भी कहीं भजन-कीर्तन होता, दोनों साथ जाते। एक बार दोनों बाप-बेटा भजन-कीर्तन कर कहीं से घर लौट रहे थे। रास्ते में एक घना जंगल पड़ता था।
एक बार कबूतरों का एक झुंड भोजन की तलाश में उड़ान भरता है। कई दिनों की खोज के बाद उन्होंने एक बरगद के पेड़ के नीचे चावल के दाने बिखरे देखे। बिना समय गंवाए, सभी कबूतर खाने में जुट गए।
Motivational Stories : जीवन में सुख और दुख का हमारे हाथ में नियंत्रण- कुछ व्यक्ति सदैव दुखी रहते हैं, और उनका मानना होता है कि सारी मुसीबतें केवल उनके हिस्से में आती हैं।
बरसों पुरानी बात है, हरिपुर का राजा था भद्रसेन वह अपनी न्यायप्रियता और दयालु स्वभाव के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। एक दिन एक देवता, राजा भद्रसेन पर उसकी दयालुता और न्यायप्रियता के कारण प्रसन्न हो गए।
बहुरूपिया राजा के दरबार में पहुंचा, और बोला "यशपताका आकाश में सदैव फहराती रहे। बस दस रूपये का सवाल है, महाराज से बहुरूपिया और कुछ नहीं चाहता"। "मैं कला का परखी हूं।