चतुर बंदर और गधा भोलू की मस्ती
चंपकपुर जंगल में जानवरों की मस्ती का कोई जवाब नहीं था। यहां के जानवर हंसी-खुशी अपना जीवन बिताते थे। जंगल के दो सबसे मजेदार साथी थे - मोंटी बंदर और भोलू गधा।
चंपकपुर जंगल में जानवरों की मस्ती का कोई जवाब नहीं था। यहां के जानवर हंसी-खुशी अपना जीवन बिताते थे। जंगल के दो सबसे मजेदार साथी थे - मोंटी बंदर और भोलू गधा।
बहुत समय पहले, एक घना जंगल था जिसे सभी जानवर 'मित्रवन' कहते थे। इस जंगल में हर जानवर खुशी-खुशी रहता था, क्योंकि वहाँ के राजा शेरसिंह ने सभी के बीच सच्ची दोस्ती और सहयोग का नियम बनाया था।
चंपकवन के मेले में कोयल ने अपने गाने से सबका दिल जीता लेकिन मादा कौआ का अपमान किया। कौआ ने उसे उसके अंडे छोड़ने की सच्चाई बताई, जिसे सुन कोयल को अपनी गलती का अहसास हुआ। कोयल ने माफी मांगी और त्याग का महत्व समझा। कहानी सिखाती है, सम्मान और एकता जरूरी हैं।
बरसात का मौसम आने वाला था। आसमान में बादल उमड़-घुमड़ रहे थे, और हवा में नमी बढ़ गई थी। एक नन्ही चिड़िया, जो अपने बच्चों के साथ नदी किनारे एक सुरक्षित आश्रय ढूंढ रही थी, वह पेड़ों की ओर जा पहुँची।
कुत्ते का एक छोटा-सा पिल्ला अपने माता-पिता के साथ जंगल के पास रहता था। एक दिन उसके माता-पिता खाना ढूंढने के लिए निकले। शाम होने लगी लेकिन वे वापिस नहीं आए। पिल्ले को डर लगने लगा।
एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक ऊंचे पेड़ पर एक गौरैया का घोंसला था। वह घोंसला उसका प्यारा घर था, जिसमें वह और उसके बच्चे रहते थे। सर्दी के दिन थे, और कड़ाके की ठंड से पूरा जंगल ठिठुर रहा था।
बहुत समय पहले तिब्बत के घने जंगल में दो उल्लू एक पुराने पेड़ पर रहते थे। ये दोनों अच्छे दोस्त थे और अक्सर जीवन की गहराइयों पर चर्चा करते थे। एक दिन सुबह का समय था, जब दोनों उल्लू अपने-अपने शिकार के साथ उस पेड़ पर आए।