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बच्चों की तुकबंदी से भरी मज़ेदार कविता “आम चोरी चप्पल चोरी”। हँसी, खेल और कल्पना से सजी प्यारी बाल कविता।
बचपन की सबसे बड़ी खूबी होती है उसकी बेफिक्री, मस्ती और शब्दों से खेलने की आज़ादी। बच्चों की बाल कविताएँ (children poems in Hindi) इसी मासूम दुनिया का आईना होती हैं। “आम चोरी चप्पल चोरी” एक ऐसी ही चुलबुली और लयात्मक कविता है, जो बच्चों की जुबान पर तुरंत चढ़ जाती है। इसमें न कोई भारी सीख थोपी गई है और न ही जटिल भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
यह कविता तुकबंदी, हास्य और कल्पनाशील घटनाओं से भरी हुई है। आम, चप्पल, पानी-पूरी, रस मलाई, नानी-नाना, मछली, काँटा — हर पंक्ति में कोई नया दृश्य उभरता है। बच्चे इसे पढ़ते या सुनते समय खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करते हैं। यही कारण है कि ऐसी कविताएँ नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों में बहुत लोकप्रिय होती हैं।
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“आम चोरी चप्पल चोरी” न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि बच्चों की भाषा-समझ, स्मरण शक्ति और कल्पनाशक्ति को भी बढ़ाती है। यही वजह है कि यह कविता आज भी बच्चों के बीच उतनी ही पसंद की जाती है।
कविता
आम चोरी चप्पल चोरी
आम चोरी, चप्पल चोरी,
गरम मसाला, पानी-पूरी।
एक आम कच्चा,
हिरण का बच्चा।
नानी को मनाएंगे,
रस मलाई खाएंगे।
रस मलाई खट्टी,
नानी की हमसे कट्टी।
बच्चा गया पानी में,
पकड़ी उसकी नानी ने।
रस मलाई कच्ची,
हमने खाई मछली।
मछली में निकला काँटा,
तेरा मेरा चाँटा।
चाँटा लगा जोर से,
हमने खाए समोसे।
समोसे बड़े अच्छे,
नाना-नानी नमस्ते!
नानी गई लंदन,
वहाँ से लाई कंगन।
कंगन गए टूट,
नानी गई रूठ।
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