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बचपन की कविताएँ बच्चों के मन को प्रकृति के करीब ले जाती हैं। ऐसी ही एक सरल, मधुर और कल्पनाशील कविता है “चिड़िया ओ चिड़िया, कहाँ है तेरा घर?”। यह कविता बच्चों की जिज्ञासा को दर्शाती है, जहाँ वे एक नन्हीं चिड़िया से उसके घर के बारे में पूछते हैं। चिड़िया का उड़ना, उसका फर-फर करना और पेड़ों पर बसेरा बनाना — यह सब बच्चों के लिए किसी कहानी से कम नहीं लगता।
यह कविता बच्चों को प्रकृति (Nature), पक्षियों (Birds) और पेड़ों (Trees) के महत्व को सहज भाषा में समझाती है। चिड़िया का घर खर-पातों से बना होना यह सिखाता है कि प्रकृति अपने आप में कितनी सुंदर और संतुलित है। आज के डिजिटल दौर में, जब बच्चे मोबाइल और स्क्रीन तक सीमित हो रहे हैं, ऐसी कविताएँ उन्हें फिर से जंगल, पेड़-पौधों और खुले आसमान की ओर सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।
यह कविता न केवल स्कूल के पाठ्यक्रम के लिए उपयोगी है, बल्कि घर पर पढ़ने, कविता पाठ प्रतियोगिता, बाल मंच और नैतिक शिक्षा के लिए भी बेहद उपयुक्त है। हिंदी बाल कविता, चिड़िया पर कविता, और प्रकृति पर बच्चों की कविता जैसे कीवर्ड्स के कारण यह रचना SEO के लिहाज़ से भी मजबूत बनती है। सरल शब्द, दोहराव वाली पंक्तियाँ और लयबद्ध संरचना इसे बच्चों के लिए यादगार बनाती है।
कविता
चिड़िया ओ चिड़िया
आओ पढ़ें—
चिड़िया, ओ चिड़िया,
कहाँ है तेरा घर?
उड़-उड़ आती है,
जहाँ से फर-फर!
चिड़िया, ओ चिड़िया,
कहाँ है तेरा घर?
उड़-उड़ जाती है,
जहाँ को फर-फर!
वन में खड़ा
है जो
बड़ा-सा तरुवर,
उसी पर बना है
खर-पातों वाला घर!
उड़-उड़ आती हूँ,
वहीं से फर-फर!
उड़-उड़ जाती हूँ,
वहीं को फर-फर!
सीख (Lesson for Children)
यह कविता बच्चों को सिखाती है कि पक्षियों का घर पेड़ होते हैं और हमें प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए, ताकि चिड़िया सुरक्षित रह सके।
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