Moral Story: स्वार्थी आदमी
एक समय की बात है, एक स्वार्थी आदमी था, उसे हर चीज़ खुद के लिए रखना पसंद था। वह अपनी चीज़ें किसी के साथ नहीं बांटता था, यहां तक कि वह अपनी चीज़ें अपने दोस्तों और गरीबों को भी नहीं देता था।
एक समय की बात है, एक स्वार्थी आदमी था, उसे हर चीज़ खुद के लिए रखना पसंद था। वह अपनी चीज़ें किसी के साथ नहीं बांटता था, यहां तक कि वह अपनी चीज़ें अपने दोस्तों और गरीबों को भी नहीं देता था।
एक समय की बात है एक जंगल में एक तोता रहता था। वह बहुत सुंदर था, उसकी चोंच और पंख बहुत ज़्यादा सुंदर थे। उस तोते के साथ उसका छोटा भाई भी रहता था, वह दोनों जंगल में खुशी खुशी रहते थे।
एक दिन एक लड़का समुद्र के किनारे बैठा हुआ था तभी उसे दूर कहीं एक जहाज़ लंगर डाले खड़ा दिखाई दिया। वह उसी पल जहाज तक तैर कर जाने के लिए मचल उठा।
बंगाल के एक विद्यालय में देशभक्त मास्टर सूर्यसेन अध्यापक थे। वार्षिक परीक्षा में जिस कक्षा में उनकी ड्यूटी लगी थी, वहां विद्यालय के प्रिंसीपल का बेटा भी परीक्षा दे रहा था।
उस दिन बाज़ार जाने का दिन था और राजू किसान सड़क पर अपनी घोड़ागाड़ी चला रहा था। उसे बाज़ार जल्दी पहुँचना था ताकि वह अपना सामान बेच सके। घोड़ों के लिए कीचड़ में इतना सामान खींचना मुश्किल हो रहा था।
उस समय बहुत ज़ोर की बर्फबारी हुई थी। राहुल और ईशा शहर में अपनी दादी से मिलने जा रहे थे और वहां पर उन्हें पूरा दिन उनके साथ बिताना था। जब वह सोने के लिए पलंग पर जा रहे थे तब भी बर्फ पड़ रही थी।
Moral Story बगुला और नीली मछली : एक नदी के किनारे एक बरगद का पेड़ था। उस पेड़ में एक बगुला रहता था। वह अक्सर नदी के किनारे मछली और केकड़े का शिकार करता था। एक दिन उसने देखा कि एक सुंदर सी नीली मछली पानी में तैर रही है। बगुले को वह सुंदर मछली बहुत भा गई। उसने मछली से कहा, "नीली मछली, नीली मछली, क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी?"