एकता में बल की कहानीः चार जिगरी दोस्त
सूरज की पहली किरणें घने जंगल में फैल रही थीं। पक्षियों की चहचहाहट से जंगल का हर कोना गूंज रहा था। उसी जंगल में चार घनिष्ठ दोस्त रहते थे: सोहनी मोर, बन्टी बंदर, चिंटू खरगोश, और गज्जू हाथी।
सूरज की पहली किरणें घने जंगल में फैल रही थीं। पक्षियों की चहचहाहट से जंगल का हर कोना गूंज रहा था। उसी जंगल में चार घनिष्ठ दोस्त रहते थे: सोहनी मोर, बन्टी बंदर, चिंटू खरगोश, और गज्जू हाथी।
जंगल के किनारे, एक प्यारा खरगोश और एक चतुर गिलहरी रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन उनकी आदतें और पसंद एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थीं। खरगोश बहुत तेज दौड़ता था
जंगल के बीचो-बीच एक बड़ा राजा शेर रहता था, जिसका नाम था सिंघम। सिंघम शेर बहुत समझदार और ताकतवर था, लेकिन वह अब बूढ़ा हो चुका था। उसने सोचा कि अब समय आ गया है कि वह किसी नए और योग्य जानवर को जंगल का राजा चुने।
जंगल का राज़- गहरे जंगल के अंदर, एक बहुत बड़ा और रहस्यमय इलाका था, जिसे सभी जानवर "काले पेड़ों का जंगल" कहते थे। इस जंगल में कोई भी जानवर आसानी से नहीं जाता था
भोली चुहिया कमरे के एक कोने में अपने चार बच्चों के साथ बैठी थी। बच्चे अभी केवल एक दिन के ही थे इसलिए मम्मी चुहिया उन पर बहुत ध्यान दे रही थी।
फुरफुरी वन में नया साल आने वाला था और सभी जानवर जोरों-शोरों से तैयारियों में जुटे थे। छोटे से चिल्लू गिलहरी की मम्मी ने भी अपने मेहमानों के स्वागत के लिए ढेर सारी मूंगफलियां खरीद रखी थीं।
एक हरे-भरे जंगल में एक सुंदर मोर रहता था। उसकी चमकीली, रंग-बिरंगी पंखों वाली पूंछ देखकर सभी जानवर उसकी प्रशंसा करते थे। वह हर सुबह नदी किनारे जाकर अपने पंख फैलाकर नाचता और अपने ही रूप में मगन हो जाता।