Jungle Story: चतुर खरगोश
एक वन में हाथियों का एक झुंड रहता था। झुंड के सरदार को गजराज कहते थे। वो विशालकाय, लम्बी सूंड तथा लम्बे मोटे दांतों वाला था। खंभे के समान उसके मोटे मोटे पैर थे। जब वो चिंघाड़ता था तो सारा वन गूंज उठता था।
एक वन में हाथियों का एक झुंड रहता था। झुंड के सरदार को गजराज कहते थे। वो विशालकाय, लम्बी सूंड तथा लम्बे मोटे दांतों वाला था। खंभे के समान उसके मोटे मोटे पैर थे। जब वो चिंघाड़ता था तो सारा वन गूंज उठता था।
सूर्य अस्त हो चला था। आकाश में बादल छाए हुए थे। नीम के एक पेड़ पर ढेर सारे कौवे रात बिताने के लिए बैठे हुए थे। कौवे अपनी आदत के अनुसार, आपस में एक-दूसरे से काँव-काँव करते हुए झगड़ रहे थे।
राम, कृष्ण और मोहन तीन भाई थे, वह सभी बहुत गरीब थे, वह एक फैक्ट्री में काम करते थे। एक दिन वह अपने गांव के मंदिर में गए उन्होंने भगवान से प्रार्थना की, कि भगवान उन्हें अमीर बना दे। अचानक उनसे भगवान बात करने लगे।
यह बदले की भावना भी बड़ी विचित्र है। इन्सान तो क्या जानवर भी इससे अछूते नहीं रह पाते। एक समय की बात है एक घने जंगल में एक गीदड़ और लोमड़ी रहा करते थे। यूं कहने को तो वे मित्र थे।
चाणक्य महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री था। एक अदने ब्राहमण से वह महामंत्री बना था। नंद के अपमान फलस्वरूप उसने प्रतिज्ञा की थी, ‘मैं नंद का वंश-वृक्ष समूल रूप से नष्ट कर दूंगा।’
एक दिन बहुत ज़ोरों की बारिश हो रही थी और बारिश रुक नहीं रही थी। हर कोई अपने घर में बोर हो रहा था। तभी गीती बोली, ‘काश! हम कुछ कर सकते।’ विक्की बोला, ‘हमारे साथ कभी कुछ अलग नहीं हुआ है।’
एक मोची था, जो दिन रात पूरी ईमानदारी के साथ काम करता था। वह मोची बहुत मेहनती था। लेकिन इतनी मेहनत करने के बाद भी वह ज़्यादा पैसे नहीं कमा पाता था। उसके पास जूतों की जोड़ी बनाने के लिए बहुत कम चमड़ा था।