Moral Story: हर पल का मजा उठाओ
मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ, जो किसी ऐसी चीज़ को नहीं अपनाते जो उन्हें खुशी दे सकती है, केवल इसलिए क्योंकि वे समझते हैं कि उनके पास समय नहीं है। वह कार्य उनकी सूची में नहीं होता।
मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ, जो किसी ऐसी चीज़ को नहीं अपनाते जो उन्हें खुशी दे सकती है, केवल इसलिए क्योंकि वे समझते हैं कि उनके पास समय नहीं है। वह कार्य उनकी सूची में नहीं होता।
एक दिन मैं रेल में सफर कर रहा था जब किशोरों का एक समूह गाड़ी में सवार हो गया। जल्दी ही पूरा डिब्बा हंसी और खुशी की किलकारियों से भर गया और मैं भी इसका आंनद लेने लगा जब अचानक ही मौत जैसी चुप्पी पसर गई।
फटे-पुराने कपड़े पहने एक महिला पंसारी की दुकान में गई और बहुत विनम्रतापूर्वक ढंग से बताया कि उसका पति बीमार है और वह कोई काम-धंधा करने में असमर्थ है। उसके 7 बच्चे हैं, जिनका भरण-पोषण करने के लिए मुझे उधार समान की जरूरत है।
मेरे भईया यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं, और बस समझ लीजिए कि वे दुनियाँ के आठवें आश्चर्य हैं। छुट्टियों में घर आते ही उनका रोब शुरू हो जाता है। और वह दहाड़-दहाड़ कर कहते हैं, ‘अरे भाई, मैं चिड़िया घर का जानवर थोड़े ही हूँ।
यह उस समय की कहानी है जब मनुष्य ने विद्या और बुद्धि की उन्नति नहीं की थी, जितनी वर्तमान में कर ली है। आजकल इतने बड़े तराजू बन गये हैं, कि हाथी ही क्या मालगाड़ी के सभी डिब्बों का वज़न तोला जा सकता है।
आज अंकल को मौहल्ले के तमाम लड़के घेर कर बैठे थे। कारण यह था कि आज अंकल अपने शिकारी जीवन की सबसे अनोखी दास्तान सुनाने जा रहे थे। वे हर शाम को मौहल्ले के सारे बच्चों को एकत्रित कर उन्हें आश्चर्यजनक सत्य किस्से सुनाते थे।
मल्लू और गल्लू सियार भाई-भाई थे। मल्लू सीधा-सादा और भोला था। वह बड़ा ही नेक दिल और दयावान था। दूसरी ओर गल्लू एक नम्बर का धूर्त और चालबाज़ सियार था। वह किसी भी भोले-भाले जानवर को अपनी चालाकी से बहलाकर उसका काम तमाम कर देता था।