Motivational Story: मुझे कहाँ ढूंढे रे बन्दे?
एक मोची भगवान का सच्चा भक्त था। जब वह प्रतिदिन जूते मरम्मत व गांठने का काम करता तो उसकी आंखों से आंसुओं की धारा बहती रहती। वह मन ही मन कहता- हे भगवान! मैं कब आपके सुंदर मुख के दर्शन कर सकूंगा?
एक मोची भगवान का सच्चा भक्त था। जब वह प्रतिदिन जूते मरम्मत व गांठने का काम करता तो उसकी आंखों से आंसुओं की धारा बहती रहती। वह मन ही मन कहता- हे भगवान! मैं कब आपके सुंदर मुख के दर्शन कर सकूंगा?
एक वन में हाथियों का एक झुंड रहता था। झुंड के सरदार को गजराज कहते थे। वो विशालकाय, लम्बी सूंड तथा लम्बे मोटे दांतों वाला था। खंभे के समान उसके मोटे मोटे पैर थे। जब वो चिंघाड़ता था तो सारा वन गूंज उठता था।
एक दिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे। ऐसे में बीरबल से जलने वाले सभी सभासद बीरबल के खिलाफ बादशाह अकबर के कान भर रहे थे। अक्सर ऐसा ही होता था, जब भी बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं होते थे, तभी दरबारियों को मौका मिल जाता था।
सूर्य अस्त हो चला था। आकाश में बादल छाए हुए थे। नीम के एक पेड़ पर ढेर सारे कौवे रात बिताने के लिए बैठे हुए थे। कौवे अपनी आदत के अनुसार, आपस में एक-दूसरे से काँव-काँव करते हुए झगड़ रहे थे।
यह बदले की भावना भी बड़ी विचित्र है। इन्सान तो क्या जानवर भी इससे अछूते नहीं रह पाते। एक समय की बात है एक घने जंगल में एक गीदड़ और लोमड़ी रहा करते थे। यूं कहने को तो वे मित्र थे।
चाणक्य महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री था। एक अदने ब्राहमण से वह महामंत्री बना था। नंद के अपमान फलस्वरूप उसने प्रतिज्ञा की थी, ‘मैं नंद का वंश-वृक्ष समूल रूप से नष्ट कर दूंगा।’
एक दिन बहुत ज़ोरों की बारिश हो रही थी और बारिश रुक नहीं रही थी। हर कोई अपने घर में बोर हो रहा था। तभी गीती बोली, ‘काश! हम कुछ कर सकते।’ विक्की बोला, ‘हमारे साथ कभी कुछ अलग नहीं हुआ है।’