Moral Story: मूर्ख लड़का
माधव गरीब था, मगर वह मेहनती लकड़हारा था। वह राजगृह के साम्राज्य के पास एक गांव में रहता था। उसे काम करते हुए गाना गाने की आदत थी। उसका एक बेटा था, जिसका नाम किशन था।
माधव गरीब था, मगर वह मेहनती लकड़हारा था। वह राजगृह के साम्राज्य के पास एक गांव में रहता था। उसे काम करते हुए गाना गाने की आदत थी। उसका एक बेटा था, जिसका नाम किशन था।
न जाने क्यों अचानक सम्राट की नींद उड़ गई। वे अपने शयनकक्ष से बाहर निकल आये। चारों ओर सन्नाटा था। अभी पहरेदार ने बारह घंटे बजाये थे। महल के एक ओर बैठक में दीपक जल रहा था।
मृदुला, अब बस भी कर। दिन भर गुड्डे गुड़ियों का खेल खेलना पढ़ना नहीं है क्या? ‘‘मम्मी की आवाज़ सुनकर मृदुला ने अपनी सहेलियों से कहा- अब तुम लोग जाओ, मम्मी नाराज़ हो रही हैं’ फिर वह कमरे में आ गई जहाँ पर उसकी मम्मी बैठी हुईं थीं।
स्वामी विवेकानन्द उन दिनों बालक ही थे। सत्य की खोज में वे घर से निकलकर नगर-नगर घूम रहे थे घूमते-घूमते वे काशी जा पहुँचे वहाँ मन्दिरों में घूमते हुए वे एक दिन नगर से बहुत दूर निकल गए।
मीना अपनी कक्षा में सबसे मशहूर थी। हर साल उसकी कक्षा के छात्र उसे अपना पसंदीदा छात्र मानने के लिए वोट करते थे। मीना हर किसी के साथ आराम से बात करती थी और हर कोई उसके साथ रहना पसंद करता था।
एक छोटा लड़का था जिसे बहुत गुस्सा आता था और वह गुस्से में दूसरों से बुरा व्यवहार करता था। एक दिन उसके पिता ने उसे एक कीलों का बैग दिया और उससे कहा कि अगली बार जब भी उसे गुस्सा आए तो वह एक कील लेकर दीवार में ठोक दे।
एक समय की बात है, एक स्वार्थी आदमी था, उसे हर चीज़ खुद के लिए रखना पसंद था। वह अपनी चीज़ें किसी के साथ नहीं बांटता था, यहां तक कि वह अपनी चीज़ें अपने दोस्तों और गरीबों को भी नहीं देता था।